Saturday, July 11, 2009

नेस्तनाबूद करने की नास्तिकता

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नेस्तनाबूद शब्द दरअसल फारसी मूल का शब्द है और इसका संबंध प्राचीन इंडो-ईरानी भाषा परिवार से है। यह बना है नेस्त+नाबूद से।112105 crescent_city_cars March 1964

प्रा चीन ईरानी संस्कृति का भारतीय सभ्यता से घनिष्ठ रिश्ता है। भाषावैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो इसकी पुष्टि कई स्तरों पर होती है और प्राचीन भारत-ईरान करीब-करीब एक सी संस्कृति वाले क्षेत्र के रूप में दिखाई पड़ते हैं। भारत का प्राचीनकाल से ही यूरोपीय समाज से रिश्ता रहा है। अफगानिस्तान, ईरान होते हुए काकेशस पर्वतों के पार तुर्की होते हुए इंडो-यूरोपीय संबंधों ने भूमध्यसागरीय संस्कृति को समृद्ध किया।
न संबंधों का प्रभाव समाज के विभिन्न आयामों में नजर आता है किन्तु खान-पान और रहन-सहन जैसे साक्ष्य बचे तो हैं मगर केवल संग्रहालयों या पुरातात्विक खनन स्थलों पर ही ये मौजूद हैं, क्योंकि सभ्यताएं विनष्ट हो चुकी हैं। एकमात्र जीवित प्रमाण अगर कहीं मिलता है तो वह भारत से यूरोप के बीच बिखरे विभिन्न समाजों की भाषा में है जहां विभिन्न शब्दों के अनगिनत रूप प्रचलित हैं जो ध्वनिसाम्य-अर्थसाम्य के जरिये अपने एक ही मूल और प्रकारांतर से सभ्यताओं की रिश्तेदारी की बात कहते हैं। समूल नाश के अर्थ में हिन्दी में नेस्तनाबूद शब्द प्रचलित है। संचार-माध्यमों से लेकर बोलचाल तक में यह शब्द इस्तेमाल होता है जिसका अर्थ है नष्टभ्रष्ट करना, समूचा खत्म करना, उजाड़ना, तोड़-फोड़ करना, बरबादी आदि। नेस्तनाबूद शब्द दरअसल फारसी मूल का शब्द है और इसका संबंध प्राचीन इंडो-ईरानी भाषा परिवार से है। यह बना है नेस्त+नाबूद से। यह शब्द हिन्दी में इतना लोकप्रिय है कि समूलनाश के अर्थ में इसका प्रयोग मुहावरे की तरह भी होता है। फ़ारसी के बूदन शब्द में मौजूदगी, होना, अवस्थिति, अस्तित्व जैसे भाव हैं । नेस्तनाबूद का बूद इसी बूदन से आ रहा है । बूद में ना उपसर्ग लगने से भाव पैदा होता है न रहने का । जॉन प्लैट्स के कोश में नेस्तनाबूद के संदर्भ में नाबूद में तोड़ना, नष्ट करना, ढहाना, गिराना, मटियामेट करना, ज़मींदोज़ करना जैसे भाव हैं । 


यहां नेस्त शब्द की दो व्युत्पत्तियां हो सकती हैं। वैदिक दर्शन में कई तरह के पारिभाषिक शब्द आते हैं। भारतीय मनीषा में अस्ति और नास्ति दो तरह के विचारों की एक लम्बी दार्शनिक परम्परा रही है । मूलतः नास्ति भी अस्ति से ही बना है । अस्ति यानी जो है । ना लगने से नकार उभरता है यानी कुछ नहीं है । नेस्त में शब्द संभवतः इसी वैदिक दर्शन के नास्ति से जन्मा है और अवेस्ता में इसका रूप नेस्त होता है । जॉन प्लैट्स के कोश से इसकी पुष्टि होती है जहाँ जेंद में अस्ति में ना लगने से नेस्त बनना बताया गया है । इस तरह नेस्तनाबूद का मतलब हुआ जो अब बसा हुआ नहीं है अर्थात जो विनष्ट हो चुका है ।गर नास्ति से नेस्त की व्युत्पत्ति तार्किक है। किसी रचना को नष्ट करने के पीछे जो सोच काम करती है वह नास्तिवाद की हो सकती है। बामियान में बुद्ध की प्रतिमाओं का तोड़ा जाना क्या साबित करता है? बुद्ध नष्ट हुए या प्रतिमाएं?  एक नास्तिक वृत्ति की नकार अभिव्यक्ति का यह जबर्दस्त उदाहरण है।

कुछ जानकार नेस्तनाबूद में न है , न था वाला भाव देखते हैं । मोटे तौर पर यह सही भी है । किसी निर्माण को यूँ मिटा देना कि लगे मानो वहाँ कभी कुछ था ही नहीं । मगर नेस्त में ना शामिल है । ना + अस्त से नेस्त बना है जिसमें नष्ट करने का भाव है । प्लैट्स के कोश में नेस्तनाबूद का अर्थ ढहाना, नष्ट करना, विनष्ट करना बताया है । नेस्तनाबूद पद का निर्माण नेस्त ओ नाबूद से हुआ है न कि ना अस्त, ना बूद से । हालाँकि नेस्त में ना अस्त ही है और नाबूद का निर्माण बूद में ना उपसर्ग से ही हुआ है । मगर नेस्तनाबूद शब्द तब बना जब नेस्त और नाबूद बन चुके थे । कुल मिलाकर नेस्तनाबूद शब्द में किसी चीज़ को समूलनाश करने का अभिप्राय छिपा है तो भी इसका प्रयोग किसी बसाहट, संरचना और ढांचे के संदर्भ में ही सही होता है।   

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12 कमेंट्स:

Udan Tashtari said...

बहुत आभार इस व्याख्या के लिए.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

"नेस्तनाबूद शब्द में किसी चीज़ को समूलनाश करने का अभिप्राय छिपा है तो भी इसका प्रयोग किसी बसाहट, संरचना और ढांचे के संदर्भ में ही सही होता है।"

सुन्दर व्याख्यान, जानकारी देने के लिए आभार!

AlbelaKhatri.com said...

वाह !
बहुत खूब
अत्यन्त रोचक व उपयोगी जानकारी !

बधाई !

Mansoor Ali said...

नेस्त-नाबूद हो गया ढांचा
देखने वालो ने यहीं आंका
बामियाँ हो के बाबरी अबतो,
तौड़ने वालो को...लगा चांटा.
म.हाश्मी

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

नेस्तनाबूद बड़ा विध्वंसक टाइप भाव रखता है। नेस्त का कहीं "नेति नेती" छाप सकारात्मक प्रयोग होता है!

िकरण राजपुरोिहत िनितला said...

nestanabud ko bahut badhiya aabad kiya .gyanvardak post.

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

नेस्तनाबूद ही करना चाहिए अपने दुश्मनों को . जैसे चाणक्य ने पैर में लगे काटे के सूखे पेड़ को मट्ठा डाल कर उसका सामूलनष्ट कर दिया

Anonymous said...

कुछ अधिक ही खींच गए बंधु. नेस्तोनाबूद का फ़ारसी समासविग्रह सिर्फ़ इतना है -- न+अस्त न+बूद. अस्त का अर्थ है और बूद का था. यानी न है और न था. वाक्य प्रयोग -- इमारत नेस्तोनाबूद हो गई. यानी इस तरह तोड़ी गई जैसे लगता है कि न है और न कभी थी.

सिर्फ़ नुक्ताचीनी न समझे इसे. मैं आपके काम को पसंद करता हूँ.

अभिषेक ओझा said...

आभार इस व्याख्या के लिए.

अजित वडनेरकर said...

प्यारे भाई, नेस्तनाबूद का जो समासविग्रह आपने बताया है वह भी शानदार है। तार्किक जामा भी पहनाया जा सकता है, मगर मैं इसे इतना भर नहीं मानता। शायद विद्वान और रोशनी डाल सकें। नेस्तनाबूद दरअसल सही रूप में नेस्तोनाबूद है। इसका अर्थ हुआ नेस्त-ओ-नाबूद
न अस्त, न बूद से नेस्तनेबूद बन सकता है, नास्तनाबूद बन सकता है मगर नेस्तनाबूद बन सकता है, इसमें मुझे संदेह है। न अस्त ओ न बूद तार्किक नहीं है। इसमें पहला न(कार) ने में बदलता है और दूसरा न(कार)ना में बदलता है। यह बात कुछ खटकती है। वैसे आपका हस्तक्षेप अच्छा लगा। ....और नाम क्यूं छुपा लिया है। आप तो सफर के साथी है।

अभय तिवारी said...

प्रिय अजित जी,
आप व्यर्थ उलझ गए। अनाम मित्र की बात सही है। अस्त का नकार फ़ारसी में नस्त नहीं नेस्त ही होता है.. नून ये सीन और ते।
नाबूद में ना तो नकार है ही और बूद आ रहा है फ़ारसी की बूदन क्रिया से। बूदन का अर्थ होता है होना, ठहरना, टिकना, गुज़रना।
नेस्तओनाबूद शब्द नहीं वाक्यांश है।
और इस का आब या नाश से कुछ लेना-देना है मुझे संशय है।
बाक़ी सफ़र अच्छा चल रहा है, देखता रहता हूँ।

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