संस्कृत में एक धातु है पा जिसका अर्थ है पीना,एक ही सांस में चढ़ाना। संस्कृत के अप् से ही बना है पानी। पानी के अर्थ वाला संस्कृत का अप् फारसी में आब बनकर मौजूद है । आब का एक अर्थ चमक भी होता है, ज़ाहिर है प्रकाश के सम्पर्क में आने पर पानी में पैदा होने वाली कान्ति से आब में चमक वाला अर्थ भी समा गया। आब का एक अर्थ इज्जत भी होता है जिसे आबरू कहते हैं। फारसी का रु दरअसल रुख का संक्षेपीकरण है और चांदी के लिए संस्कृत शब्द रौप्य से जन्मा है जिससे संसकृत में बना रूप और फारसी में जन्मा रुख। इसका एक रूप आबरुख भी है जिसका मतलब हुआ चेहरे की चमक । माना जा सकता है यहां चेहरे पर चरित्र की चमक से अभिप्राय है। वैसे हिन्दी में बेइज्जती के लिए चुल्लू भर पानी में डूब मरने वाली कहावत में भी चरित्र का संबंध पानी से जुड़ रहा है। प्राचीनकाल से ही जलस्रोतों के नज़दीक मानव का आवास हुआ सो जनशून्य जलस्रोतों के निकट जब लोग बसे तो वे आबाद कहलाए। जाहिर है इसी बसाहट को आबादी कहा गया जो बाद में जनसंख्या के अर्थ मे हिन्दी में रूढ़ हो गया। भोजन-पानी के संदर्भ में आबो-दाना शब्द भी फारसी का है और इसी मूल से जन्मा है। आब यानी पानी, दाना यानी खुराक।
आबाद का ही एक रूप प्राचीन ईरानी में हुआ
आबूद। भारोपीय भाषाओं में नकारात्मकता, विलोम अथवा रहित के अर्थ में जो उपसर्ग प्रयोग होते हैं उनमें मुख्यतः
न ध्वनि सुनाई पड़ती है।
आबाद/आबूद का विलोम हुआ नाबूद यानी ध्वंस का शिकार, विनष्ट, गायब, बरबाद आदि। यहां
नेस्त शब्द की दो व्युत्पत्तियां हो सकती हैं।
... नेस्तनाबूद शब्द में किसी चीज़ को समूलनाश करने का अभिप्राय छिपा है तो भी इसका प्रयोग किसी बसाहट, संरचना और ढांचे के संदर्भ में ही सही होता है। ...
वैदिक दर्शन में कई तरह के पारिभाषिक शब्द आते हैं। भारतीय मनीषा में
अस्ति और
नास्ति दो तरह के विचारों की एक लम्बी दार्शनिक परम्परा रही है जो ईश्वर के होने, उसके सगुण-साकार, निर्गुण निराकार रूपों की विभिन्न तरह से व्याख्याएं करती हैं। अस्ति यानी होना,
नास्ति या न होना। यहां संदर्भ ईश्वर का है। नास्ति विचार के लोग ईश्वर को नहीं मानते। आसानी से समझने के लिए इसे यूं भी समझ सकते हैं कि जो लोग ईश्वर को मानते हैं वे आस्तिक और जो नहीं मानते वे नास्तिक कहलाते हैं। हालांकि यह सरलीकरण है। इसकी विस्तार से विवेचना उचित शब्द के संदर्भ में अगली किसी कड़ी में की जाएगी। नेस्त शब्द संभवतः इसी वैदिक दर्शन के नास्ति से जन्मा है और अवेस्ता में इसका रूप नेस्त होता है। इस तरह
नेस्तनाबूद का मतलब हुआ जो अब बसा सहुआ नहीं है अर्थात जो विनष्ट हो चुका है।
मगर नास्ति से नेस्त की व्युत्पत्ति तार्किक है। किसी रचना को नष्ट करने के पीछे जो सोच काम करती है वह नास्तिवाद की हो सकती है। बामियान में बुद्ध की प्रतिमाओं का तोड़ा जाना क्या साबित करता है? बुद्ध नष्ट हुए या प्रतिमाएं? एक नास्तिक वृत्ति की नकार अभिव्यक्ति का यह जबर्दसस्त उदाहरण है। नेस्तनाबूद के नेस्त की रिश्तेदारी एक अन्य इंडो-ईरानी धातु नश् से जुड़ती है। नश् का अर्थ होता है खो जाना, गायब होना, अन्तर्धान होना, लुप्त होना आदि। जाहिर है किसी वस्तु, रचना आदि में टूट-फूट या अन्य विकार आ जाने से भी उसके मूल आकार का तो लोप हो ही जाता है। इस तरह देखें तो नश् से बने नाश शब्द में हानि, विध्वंस, अस्थाई जैसे भाव आए। नष्ट, विनष्ट, विनाशकारी, नाशवान जैसे शब्द इसी धातुमूल से जन्मे हैं। नश्वर का मतलब होता है क्षणभंगुर या जिसका अस्तित्व अल्पकालीन हो। नेस्तनाबूद में फारसी के नेस्त शब्द की नश् से रिश्तेदारी पर गौर करें तो नेस्तनाबूद की व्याख्या का मजबूत आधार मिलता है।
फारस की खाड़ी में शत-अल-अरब समुद्री मार्ग के मुहाने पर एक छोटा सा द्वीप है
अबादान। यह ईरान के खुजेस्तान प्रांत की राजधानी है और तेल व्यापार का बड़ा केंद्र और बंदरगाह है। यह ऐतिहासिक शहर है जिसका उल्लेख प्राचीन संदर्भों में खूब आया है। नाम से ही स्पष्ट है कि अबादान का मतलब खुशहाल आबादी से है जिसमें
आबोदाना छुपा हुआ है। अबादान यानी एक ऐसी जगह जहां वे तमाम सरंजाम थे जिनकी ज़रूरत खुशहाली के लिए होती है। उर्दू-फारसी में अबादान का एक अर्थ आबाद से भी होता है। अरबी में अबादान,
अब्बादान बनकर पहुंचा। मतलब यहां भी वही है। कुल मिलाकर
नेस्तनाबूद शब्द में किसी चीज़ को समूलनाश करने का अभिप्राय छिपा है तो भी इसका प्रयोग किसी बसाहट, संरचना और ढांचे के संदर्भ में ही सही होता है।
| ये सफर आपको कैसा लगा ? पसंद आया हो तो यहां क्लिक करें |
12 कमेंट्स:
बहुत आभार इस व्याख्या के लिए.
"नेस्तनाबूद शब्द में किसी चीज़ को समूलनाश करने का अभिप्राय छिपा है तो भी इसका प्रयोग किसी बसाहट, संरचना और ढांचे के संदर्भ में ही सही होता है।"
सुन्दर व्याख्यान, जानकारी देने के लिए आभार!
वाह !
बहुत खूब
अत्यन्त रोचक व उपयोगी जानकारी !
बधाई !
नेस्त-नाबूद हो गया ढांचा
देखने वालो ने यहीं आंका
बामियाँ हो के बाबरी अबतो,
तौड़ने वालो को...लगा चांटा.
म.हाश्मी
नेस्तनाबूद बड़ा विध्वंसक टाइप भाव रखता है। नेस्त का कहीं "नेति नेती" छाप सकारात्मक प्रयोग होता है!
nestanabud ko bahut badhiya aabad kiya .gyanvardak post.
नेस्तनाबूद ही करना चाहिए अपने दुश्मनों को . जैसे चाणक्य ने पैर में लगे काटे के सूखे पेड़ को मट्ठा डाल कर उसका सामूलनष्ट कर दिया
कुछ अधिक ही खींच गए बंधु. नेस्तोनाबूद का फ़ारसी समासविग्रह सिर्फ़ इतना है -- न+अस्त न+बूद. अस्त का अर्थ है और बूद का था. यानी न है और न था. वाक्य प्रयोग -- इमारत नेस्तोनाबूद हो गई. यानी इस तरह तोड़ी गई जैसे लगता है कि न है और न कभी थी.
सिर्फ़ नुक्ताचीनी न समझे इसे. मैं आपके काम को पसंद करता हूँ.
आभार इस व्याख्या के लिए.
प्यारे भाई, नेस्तनाबूद का जो समासविग्रह आपने बताया है वह भी शानदार है। तार्किक जामा भी पहनाया जा सकता है, मगर मैं इसे इतना भर नहीं मानता। शायद विद्वान और रोशनी डाल सकें। नेस्तनाबूद दरअसल सही रूप में नेस्तोनाबूद है। इसका अर्थ हुआ नेस्त-ओ-नाबूद
न अस्त, न बूद से नेस्तनेबूद बन सकता है, नास्तनाबूद बन सकता है मगर नेस्तनाबूद बन सकता है, इसमें मुझे संदेह है। न अस्त ओ न बूद तार्किक नहीं है। इसमें पहला न(कार) ने में बदलता है और दूसरा न(कार)ना में बदलता है। यह बात कुछ खटकती है। वैसे आपका हस्तक्षेप अच्छा लगा। ....और नाम क्यूं छुपा लिया है। आप तो सफर के साथी है।
प्रिय अजित जी,
आप व्यर्थ उलझ गए। अनाम मित्र की बात सही है। अस्त का नकार फ़ारसी में नस्त नहीं नेस्त ही होता है.. नून ये सीन और ते।
नाबूद में ना तो नकार है ही और बूद आ रहा है फ़ारसी की बूदन क्रिया से। बूदन का अर्थ होता है होना, ठहरना, टिकना, गुज़रना।
नेस्तओनाबूद शब्द नहीं वाक्यांश है।
और इस का आब या नाश से कुछ लेना-देना है मुझे संशय है।
बाक़ी सफ़र अच्छा चल रहा है, देखता रहता हूँ।
Post a Comment