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पिछली कड़ी- 1.क़यामत से क़यामत तक से आगे
दिलचस्प है कि q-a-m में निहित स्थिरता के भाव ही इसे आश्रय से भी जोड़ते हैं। इस धातु की रिश्तेदारी संभव है किसी काल में प्रोटो इंडो-यूरोपीय धातु k-a-m से भी रही होगी जिससे ही कमरा, कैमेरा, कमान, कमानी जैसे शब्द बने हैं। क़याम में जो q की ध्वनि है अर्थात नुक्ते का प्रयोग वह इसे देवनागरी वर्ण ख के करीब पहुंचाता है। क़ाम में स्थिरता के भाव से ही बनता है अरबी का क़ाइम शब्द जिसका हिन्दी रूप कायम है और यह खूब इस्तेमाल होता है। कायम का अर्थ भी स्थिर होना, मज़बूती से डटे रहना, दृढ़ रहना आदि। किसी भी भवन को स्तम्भ ही आधार प्रदान करते है। स्तम्भ का एक अन्य रूप संस्कृत में स्कम्भ होता है। खम्भा इससे ही बना है अर्थात पाया। गौरतलब है कि पाया अर्थात पैर ही स्थिरता प्रदान करते हैं।

आश्रय के सदर्भ में भी अरबी की क-अ-म धातु से कुछ शब्द बने हैं जो हिन्दी में भी प्रचलित हैं। निवास, रहना या रुकने के संदर्भ में मक़ाम शब्द है। यह मुक़ाम के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है। मराठी में इसका उच्चारण कुछ और गाढ़ेपन के साथ मुक्काम हो जाता है। इस्लाम में मक़ाम के दार्शनक मायने भी हैं जिसके मुताबिक घर या निवास से हटकर इसका मतलब लक्ष्य, मंजिल और गंतव्य हो जाता है। एक सूफी संत के लिए मक़ाम मस्जिद नहीं बल्कि ईश्वर प्राप्ति है। वैसे मक़ाम का अर्थ मकान, निवास, गृह, आवास, स्थान आदि भी होता है मगर इसका प्रयोग दार्शनिक अर्थों में अधिक व्यापक है। मकान भी इसी मूल से निकला है जिसका बहुवचन मकानात अर्थात घरों का संकुल होता है। इसी तरह मक़ाम का बहुवचन मक़ामात होता है। पश्चिम एशिया देशों खासतौर पर अरब मुल्कों के अलावा सीरिया, तुर्की और इराक की एक खास संगीत शैली भी मक़ाम कहलाती है। इन्द्रियातीत अनुभूति और अनिवर्चनीय आनंद की सृष्टि करने की वजह से ही इस संगीत को मक़ाम नाम मिला है। जाहिर है हर कला का उद्धेश्य परमानंद की प्राप्ति ही है। वह श्रोता जो संगीत के जरिये बेखुदी के आलम में पहुंच जाए, समझो अपने मक़ाम पर पहुंच गया। सूफी शब्दावली में जिसे हाल यानी परमानंद कहते है, वही है असली मक़ाम यानी मक़ाम की संगीत शैली। मक़ाम से एक शब्द मक़ामी भी बनता है जिसका मतलब होता है रहनवाला, निवासी या स्थायी। सूफियों के दो खास रूप हैं एक मक़ामी जो किसी भी जगह पर डेरा डाल लेते हैं। दूसरे दरवेश जो कभी टिक कर नहीं बैठते।
सूफी दर्शन के मुताबिक ईश्वर के स्वरूप से साक्षात्कार इतना आसान नहीं है। उस दिव्यता को देख पान असंभव है इसलिए उस तक पहुंचने के सात मक़ाम बताए गए हैं। सूफी विचारक ग़ज़ाली के मुताबिक अल्लाह सत्तर हजार पर्दो के पीछे है। ईश्वर की दिव्यता से यकायक सामना करने की क्षमता इन्सान में नहीं है इसीलिए ये मक़ाम बनाए गए हैं। सात मकाम यानी सात मंज़िलें। हर एक में दस हजार पर्दे। ये मंजिले हैं -पश्चाताप, भय, त्याग, अभाव, धैर्य, समर्पण और संतोष। इन सात मंजिलों से होकर गुज़रने और इन पर्दों के हटते ही मनुष्य की आत्मा भी दिव्य हो जाती है तभी वह प्रभु की आभा को देख पाती है। एक सूफी का जीवन दरअसल आध्यात्मिक सफर होता है। इस यात्रा पर आगे बढ़ना तरीका यानी रास्ता या मार्ग कहते हैं। परम लक्ष्य होता है फ़ना और इसके दर्म्यान जो कुछ है वह है मक़ामात। वैस ज्यादातर सूफी सात की जगह दस मक़ाम गिनाते हैं- 1.तौबा यानी पश्चाताप 2.वारा यानी संयम 3.ज़ुहद यानी विरक्ति 4.फक्र यानी अभाव 5.सब्र यानी धैर्य 6.शुक्र यानी कृतज्ञता 7.ख़ौफ़ यानी भय 8. रज़ा यानी आशा 9.तवक्कुल यानी भरोसा और 10.रिज़ा यानी संतोष। एक सच्चा सूफी इन तमाम मक़ामात से गुज़रने के बाद सचमुच आखिरी मक़ाम यानी फ़ना के परमलक्ष्य को प्राप्त कर लेता है। फ़ना का अर्थ यूं तो मृत्यु या गायब होना है मगर आध्यात्मिक अर्थों में इसके मायने वही हैं जो हिन्दू दर्शन में निर्वाण या मोक्ष के हैं।
इन्हें भी ज़रूर देखे- 1.कुछ न कहो, कुछ भी न कहो 2.दरवेश चलेंगे अपनी राह
Sunday, July 19, 2009
आखिरी मक़ाम की तलाश... पिया मिलन को जाना...

एक निवेदन- शब्दकी तलाश दरअसल अपनी जड़ों की तलाश जैसा ही है।शब्द की व्युत्पत्ति को लेकर भाषा विज्ञानियों का नज़रिया अलग-अलग होता है। मैं न भाषा विज्ञानी हूं और न ही इस विषय का आधिकारिक विद्वान। अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए स्वातःसुखाय जो कुछ खोज रहा हूं, पढ़ रहा हूं ,समझ रहा हूं ...उसे आसान भाषा में छोटे-छोटे आलेखों में आप सबसे साझा करने की यह मेरी कोशिश है।-अजित वडनेरकर
- अजित वडनेरकर
- मोबाइल-9425012329, India
- बीते 24 वर्षों से पत्रकारिता। प्रिंट व टीवी दोनों माध्यमों में कार्य।


बहुत शोधपरक, उपयोगी और महत्वपूर्ण जानकारियां। हिंदी में इतनी संलग्नता के साथ ऐसा परिश्रम करने वाले विरले ही होंगे।
अशोक पाण्डे
'शब्दों का सफर' मुझे व्यक्तिगत रूप से हिन्दी का सबसे समृद्ध और श्रमसाध्य ब्लॉग लगता रहा है।अरविंदकुमार

मैं ने पहली बार आप का ब्लाग पढ़ा-पशु और फ़ीस वाला। बधाई!अब इसे फ़ेवरिट की सूची में डाल लिया है। लगातार ज़ारी रखें..
अभय तिवारी
आप के समर्पण और लगन के लिए मेरे पास ढेर सारी प्रशंसा है और काफ़ी सारी ईर्ष्या भी।
सच कहूँ ,ब्लॉग-जगत का सूर और ससी ही है शब्दों का सफ़र . बधाई.... अंतर्मन से शास्त्री जे सी फिलिप
लिखते रहें. यह मेरे इष्ट चिट्ठों मे से एक है क्योंकि आप काफी उपयोगी जानकारी दे रहे हैं.संजय पटेल
थोड़े में कितना कुछ कह जाते हैं आप. आपके ब्लाँग का नियमित पारायण कर रहा हूं और शब्दों की दुनिया से नया राब्ता बन रहा है.
आपकी मेहनत कमाल की है। आपका ये ब्लॉग प्रकाशित होने वाली सामग्री से अटा पड़ा है - आप इसे छपाइये !हर्षदेव
विष्णु बैरागी
भाषिक विकास के साथ-साथ आप शब्दों के सामाजिक योगदान और समाज में उनके स्थान का वर्णन भी बडी सुन्दरता से कर रहे हैं।आपको पढना सुखद लगता है।पंकज श्रीवास्तव
आपकी मेहनत को कैसे सराहूं। बस, लोगों के बीच आपके ब्लाग की चर्चा करता रहता हूं। आपका ढिंढोरची बन गया हूं। व्यक्तिगत रूप से तो मैं रोजाना ऋणी होता ही हूं.ज्ञानदत्त पांडे
आपकी पोस्ट पढ़ने में थोड़ा धैर्य दिखाना पड़ता है. पर पढ़ने पर जो ज्ञानवर्धन होताहै,वह बहुत आनन्ददायक होता है.रवि रतलामी
किसी हिन्दी चिट्ठे को मैं ब्लागजगत में अगर हमेशा जिन्दा देखना चाहूंगा, तो वो यही होगा-शब्दों का सफर.विजय गौर
निश्चित ही हिन्दी ब्लागिंग में आपका ब्लाग महत्वपूर्ण है. जहां भाषा विज्ञान पर मह्त्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध रह्ती है. बालेंदु दाधीच

आपने सिद्ध किया है कि तकनीक का सार्थक प्रयोग कैसे होता है ... बिना स्पष्ट लाभ के मोटीवेशन कायम रखते हुए स्थायी महत्व का कार्य कैसे किया जा सकता है.
समीरलाल
इस सफर में आकर सब कुछ सरल और सहज लगने लगता है। बस, ऐसे ही बनाये रखिये. आपको शायद अंदाजा न हो कि आप कितने कितने साधुवाद के पात्र हैं.लावण्या शाह

बिल्कुल अलग है आपका ब्लाग, सबसे अलग। इसकी हर पोस्ट अपने आप में विशिष्ट होती है. शुभकामनाएं.
अनूप शुक्ल
बेहतरीन उपलब्धि है आपका ब्लाग! मैं आपकी इस बात की तारीफ़ करता हूं और जबरदस्त जलन भी रखता हूं कि आप अपनी पोस्ट इतने अच्छे से मय समुचित फोटो ,कैसे लिख लेते हैं.
शब्दों का सफर मेरी सर्वोच्च बुकमार्क पसंद है -मैं इसे नियमित पढ़ता हूँ और आनंद विभोर होता हूँ !आपकी ये पहल हिन्दी चिट्ठाजगत मे सदैव याद रखी जायेगी.Dr.bhoopendra
good,innovative explanation of well known words look easy but it is an experts job.My heartly best wishes.श्रद्धा जैन
आप जाने कहाँ कहाँ से इतनी अनमोल जानकारी ढूँढ लाते हैं और आपके ब्लॉग पर आना सार्थक हो जाता है।लिखते रहे आप बहुत अलग, बहुत प्रभावशाली है
प्रभाकर पाण्डेय
पता नहीं भविष्य में चिट्ठों का अस्तित्व रहे या ना रहे पर "शब्दों का सफर" शोधार्थियों एवं हिन्दी प्रेमियों के लिए प्रेरक बना रहेगा।
मंसूर अली हाशमी
ऐसे समय में जब कुछ लोग भाषाओ और शब्दों को धर्म से जोड़ कर देखने लगे है, शब्दों के सफर में धर्म, समाज और देशो के दायरों को तोड़ते हुए, भाषाई रिश्तों की यह पड़ताल अमूल्य है।
सोमाद्रि
लोग पूछते है - ऐसा क्या है शब्दावली में? मेरा, कहना है अगर आप पढोगे, तो जानोगे। मेरा शब्दों के प्रति ज्ञान बढाने में आपके इस ब्लॉग का बहुत बड़ा हाथहै।
आशीर्वचन
अजित वडनेरकर अपने विश्लेषण में व्युत्पत्तिशास्त्र के समस्त संभव प्रतिमानों का उपयोग करते हैं। वे सावधानी के साथ लोकव्यवहार में प्रचलित उन शब्दों का
चयन करते हैं, जिनके अर्थ को लेकर लोकमानस में जिज्ञासा हो सकती हो। फिर वे उस शब्द की धातु, उस धातु के अर्थ और अर्थ की विविध भंगिमाओं तक पहुँचते हैं। फिर वे समानार्थी शब्दों की तलाश करते हुए विविध कोनों से उनका परीक्षण करते हैं. फिर उनकी तलाश शब्द के तद्भव रूपों तक पहुंचती है और उन तद्बवों की अर्थ-छायाओं में परिभ्रमण करती है। फिर अजित अपने भाषा-परिवार से बाहर निकलकर इतर भाषाओँ और भाषा-परिवारों में जा पहुँचते हैं। वहां उन देशों की सांस्कृतिक पृष्टभूमि में सम्बंधित शब्द का परीक्षणकर, पुनः समष्टिमूलक वैश्विक परिदृश्य का निर्माण कर देते हैं। यह सब रचनाकार की प्रतिभा और उसके अध्यवसाय के मणिकांचन योग से ही संभव हो सका है। व्युत्पत्तिविज्ञान की एक नयी और अनूठी समग्र शैली सामने आई है।[डॉ.सुरेश वर्मा ख्यात भाषाविद् हैं। मुझे इनके मार्गदर्शन में अध्ययन करने का अवसर मिला है।]



पांव रक्खो रकाब पर
जंगल-जंगल, नद्दी-नाले कूद-फांद कर
धरती रौंदो
जैसे भादों की रातों में
बिजली कौंधे
ऐसे कौंधो...
-भवानीप्रसाद मिश्र
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चर्चा हिन्दुस्तान में
शब्दों के प्रति लापरवाही से भरे इस दौर में हर शब्द को अर्थविहीन बनाने का चलन आम हो गया है। इस्तेमाल किए जाने भर के लिए ही शब्दों का वाक्यों के बाच में आना जाना हो रहा है, खासकर पत्रारिता ने सरल शब्दों के चुनाव क क्रम में कई सारे शब्दों को हमेशा के लिए स्मृति से बाहर कर दिया। जो बोला जाता है वही तो लिखा जाएगा। तभी तो सर्वजन से संवाद होगा। लेकिन क्या जो बोला जा रहा है, वही अर्थसहित समझ लिया जा रहा है ? उर्दू का एक शब्द है खुलासा । इसका असली अर्थ और इस्तेमाल के संदर्भ की दूरी को कोई नहीं पाट सका। इसीलिए बीस साल से पत्रकारिता में लगा एक शख्स शब्दों का साथी बन गया है। वो शब्दों के साथ सफर पर निकला है। अजित वडनेरकर। ब्लॉग का पता है http://shabdavali.blogspot.com दो साल से चल रहे इस ब्लॉग पर जाते ही तमाम तरह के शब्द अपने पूरे खानदान और अड़ोसी-पड़ोसी के साथ मौजूद होते हैं। मसलन संस्कृत से आया ऊन अकेला नहीं है। वह ऊर्ण से तो बना है, लेकिन उसके खानदान में उरा (भेड़), उरन (भेड़) ऊर्णायु (भेड़), ऊर्णु (छिपाना)आदि भी हैं । इन तमाम शब्दों का अर्थ है ढांकना या छिपाना। एक भेड़ जिस तरह से अपने बालों से छिपी रहती है, उसी तरह अपने शरीर को छुपाना या ढांकना। और जिन बालों को आप दिन भर संवारते हैं वह तो संस्कृत-हिंदी का नहीं बल्कि हिब्रू से आया है। जिनके बाल नहीं होते, उन्हें समझना चाहिए कि बाल मेसोपोटामिया की सभ्यता के धूलकणों में लौट गया है। गंजे लोगों को गर्व करना चाहिए। इससे पहले कि आप इस जानकारी पर हैरान हों अजित वडनेरकर बताते हैं कि जिस नी धातु से नैन शब्द शब्द का उद्गम हुआ है, उसी से न्याय का भी हुआ है। संस्कृत में अरबी जबां और वहां से हिंदी-उर्दू में आए रकम शब्द का मतलब सिर्फ नगद नहीं बल्कि लोहा भी है। रुक्कम से बना रकम जसका मतलब होता है सोना या लोहा । कृष्ण की पत्नी रुक्मिणी का नाम भी इस रुक्म से बना है जिससे आप रकम का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे तमाम शब्दों का यह संग्रहालय कमाल का लगता है। इस ब्लॉग के पाठकों की प्रतिक्रियाएं भी अजब -गजब हैं। रवि रतलामी लिखते हैं कि किसी हिंदी चिट्ठे को हमेशा के लिए जिंदा देखना चाहेंगे तो वह है शब्दों का सफर । अजित वडनेरकर अपने बारे में बताते हुए लिखते हैं कि शब्द की व्युत्पत्ति को लेकर भाषा विज्ञानियों का नज़रिया अलग अलग होता है। मैं भाषाविज्ञानी नहीं हूं, लेकिन जज्बा उत्पति की तलाश में निकलें तो शब्दों का एक दिलचस्प सफर नजर आता है। अजित की विनम्रता जायज़ भी है और ज़रूरी भी है क्योंकि शब्दों को बटोरने का काम आप दंभ के साथ तो नहीं कर सकते। इसीलिए वे इनके साथ घूमते-फिरते हैं। घूमना-फिरना भी तो यही है कि जो आपका नहीं है, आप उसे देखने- जानने की कोशिश करते हैं। वरना कम लोगों को याद होगा कि मुहावरा अरबी शब्द हौर से आया है, जिसका अर्थ होता है परस्पर वार्तालाप, संवाद । शब्दों को लेकर जब बहस होती है तो यह ब्लॉग और दिलचस्प होने लगता है। दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा का एक लोकप्रिय लैंडमार्क है- अट्टा बाजार। इसके बारे में एक ब्लॉगर साथी अजित वडनेरकर को बताता है कि इसका नाम अट्टापीर के कारण अट्टा बाजार है, लेकिन अजित बताते हैं कि अट्ट से ही बना अड्डा । अट्ट में ऊंचाई, जमना, अटना जैसे भाव हैं, लेकिन अट्टा का मतलब तो बाजार होता है। अट्टा बाजार । तो पहले से बाजार है उसके पीछे एक और बाजार । बाजार के लिए इस्तेमाल होने वाला शब्द हाट भी अट्टा से ही आया है। इसलिए हो सकता है कि अट्टापीर का नामकरण भी अट्ट या अड्डे से हुआ हो। बात कहां से कहा पहुंच जाती है। बल्कि शब्दों के पीछे-पीछे अजित पहुंचने लगते हैं। वो शब्दों को भारी-भरकम बताकर उन्हें ओबेसिटी के मरीज की तरह खारिज नहीं करते। उनका वज़न कम कर दिमाग में घुसने लायक बना देते हैं। हिंदी ब्लॉगिंग की विविधता से नेटयुग में कमाल की बौद्धिक संपदा बनती जा रही है। टीवी पत्रकारिता में इन दिनों अनुप्रास और युग्म शब्दों की भरमार है। जो सुनने में ठीक लगे और दिखने में आक्रामक। रही बात अर्थ की तो इस दौर में सभी अर्थ ही तो ढूंढ़ रहे हैं। इस पत्रकारिता का अर्थ क्या है? अजित ने अपनी गाड़ी सबसे पहले स्टार्ट कर दी और अर्थ ढूंढ़ने निकल पड़े हैं। --रवीशकुमार [लेखक का ब्लाग है http://naisadak.blogspot.com/ ] -
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'अनहद' शिवराम की कविता - कल शिवराम की कुछ अटपटी सी, लटपटी सी कविता* "सुनो भाई गप्प-सुनो भाई सप्प"* आप के सामने थी। आज उन की एक बहुत ही लघु कविता आप के सामने है। यह शिल्प का अनुपम उ...22 hours ago
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महाभारत : और श्री बी आर चोपड़ा जी की यादें ......... - रूपा गांगुली -- मेरे आराध्य श्री कृष्ण हैं - - मेरे मन के भाव , इसी गीत में प्रकट हैं सुनियेगा ......... .http://www.youtube.com/watch?v=sqRfhMWjbn4&feature...22 hours ago
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इस संसार में लगा हुआ है पीड़ा का अथाह अंबार ! - अन्ना अख़्मातोवा की कवितायें आप पहले भी कई दफा पढ़ चुके हैं। आज प्रस्तुत है उनकी एक और कविता:अगर आसमान में परिक्रमा करना छोड़ दे चाँदअगर आसमान में परिक्रमा करना...22 hours ago
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गेरुआ : चार व्यंग्यचित्र - गेरुआ : चार व्यंग्यचित्र------घनाक्षरी में....... आज दूसरा सुबह राम बेचता हूं, सांझ श्याम बेचता हूं, फूल, परशाद, खील, नारियल-मौली जी. राम जी की किर...23 hours ago
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आज चर्चा में हैं दो नायिकायें -गुप्ता और लक्षिता! - आज दो नायिकाओं का वर्णन जिनमें बहुत कुछ गोपनीयता के आवरण में है -ये हैं *गुप्ता और लक्षिता* ! *गुप्ता* उस नायिका को कहते हैं जो प्रिय मिलन को गोपनीय रख पान...23 hours ago
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इस ब्लॉगर को पहचानिये : पहले पहेली तो मानिये : पहेली रेल की : मेल की - रेल का नाम कोंकण कन्या एक्सप्रेस रेल का पहचान नंबर ०११२ चलेगी मडगांव से ब्लॉगर सवार करमाली से होंगे। करमाली कहां है यह हम नहीं बतायेंगे 5 दिसम्ब...1 day ago
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एक पहेली --- - पिछली पोस्ट में हमने जानकारी प्राप्त की --एड्स से बचाव के बारे में। अगली पोस्ट में , एड्स से १०० गुना ज्यादा संक्रामक बीमारी के बारे में बात करेंगे । क्या ...1 day ago
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प्राणों के रस से सींचा पात्र :बाउ (गिरिजेश भईया की लंठ महाचर्चा) - एक आलसी का चिट्ठा- गिरिजेश भईया का चिट्ठा, स्वनाम कृतघ्न आलसी का चिट्ठा । यहाँ पहुँचते ही होंगे -अवाक ! टिप्पणी को विचारेंगे, होंगे किंकर्तव्य- विमूढ़ । अग...1 day ago
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काल का गवैया गाए जा रहा है राग भोपाल - *घर में अंग्रेजी का अखबार देर से आता है - दिन में ११ बजे के आसपास , सो उसे रात को ही बाँचता हूँ फुरसत से। कल रात में अखबार पढ़ते हुए देखा कि पूरा एक पेज भो...1 day ago
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जस्टिस तुलाधर कमीशन की रिपोर्ट - दस दिन तो लग गए जस्टिस तुलाधर कमीशन की रिपोर्ट उलटने-पलटने में. कुल ९८ वाल्यूम की रिपोर्ट. लगभग दो वाल्यूम प्रति साल का हिसाब पड़ता है. क्या कहा आपने? मैंन...1 day ago
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सेकुलर को हिन्दी में क्या कहेंगे ?- धर्मनिरपेक्ष या पंथनिरपेक्ष - सेकुलर को हिन्दी में क्या कहेंगे ? धर्मनिरपेक्ष या पंथनिरपेक्ष वैसे भारत के संविधान में सेकुलर शब्द को पंथनिरपेक्ष लिखा गया है . कृपया जबाब दे यह कोई पहेल...1 day ago
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अन्ताक्षरी भाग २ कविताओ, गजलो, शेरो ओर गीतो की. - आप सब का स्वागत है आज कि इस आंताक्षरी मै, इस आंताक्षरी मै आप अपनी कविताये, गजले, शायरो शायरी, भजन, शलोक, गीत, कव्वाली जो चाहे जनाब लिख सकते है, बस आप ने अप...1 day ago
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राजस्थानी लोकगीतों में नारी संवेदना - बचपन से मैं विभिन्न अवसरों पर गाए जाने वाले महिलाओं के गीत सुनता आया हूं और साहित्य में रूचि पैदा होने के बाद से इन गीतों के विविध पक्षों को लेकर सोचता ...1 day ago
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नज़्म - आइये इक पहर यहीं बैठें - आइये इक पहर यहीं बैठें साथ सूरज के ढलें सुरमई अंधेरों में सुने बेचैन परिन्दों की चहक लौट कर आते हुये फिर उन्ही बसेरों में आसियाँ सबको हसीं लगता है अपना, ले...1 day ago
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पकड़ सकते हो!! - ये मेरा पसंदीदा खेल है.. कभी बाबा के साथ तो कभी मम्मी के साथ.. खूब खेलते है पुरे जोश और मस्ती के साथ.. बाबा थक जाते है पर 'आची' नहीं.. २ मिनिट का ये वीडियो...1 day ago
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लेकॉनिक टिप्पणी का अभियोग - श्रीश पाठक “प्रखर” का अभियोग है कि मेरी टिप्पणी लेकॉनिक (laconic) होती हैं। पर मैं बहुधा यह सोचता रहता हूं कि काश अपने शब्द कम कर पाता! बहुत बार लगता है ...1 day ago
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Minarett-Verbot - This is a guest post by Naeem, an artist friend. The post is a cull from a conversation regarding the recent ban in Switzerland imposed on building minaret...1 day ago
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मैंने इससे पहले खुद को इतना बेबस और लाचार कभी नही पाया था! - सारी रात खांसते-छिंकते बीती थी और बड़ी मुश्किल से सुबह सुबह नींद लगी थी कि मोबाईल ने घनघनाना शुरु कर दिया। लगातार बज़ रहे फ़ोन ने अज़ीब सी खीज़ पैदा कर दी थी और...1 day ago
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सफलता हमेशा काम के बाद आती है - यह चिट्ठी ई-पाती श्रंखला की कड़ी है। यह श्रंखला, नयी पीढ़ी की जीवन शैली समझने, उनके साथ दूरी कम करने, और उन्हें जीवन मूल्यों को समझाने का प्रयत्न है। यदि...1 day ago
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मैं ऐसे बोलता हूँ जैसे कोई सुनता हो मुझे ! - एक नई कविता ..... रात भर पुरानी फ़िल्मों की एक पसन्दीदा श्वेत-श्याम नायिका की तरह स्मृतियां मंडराती सर से पांव तक कपड़ों से ढंकीं कुछ बेहद मज़बूत पहाड़ी पेड़ों ...1 day ago
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इश्क की सालगिरह - "मुझे तेरी स्माइल सबसे अच्छी लगती है""मुझे भी"--------------------------"तू रोज रोज और सुंदर कैसे होती जाती है, बहुत प्यारी लग रही है, नज़र लग जायेगी, इधर आ द...2 days ago
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ठाकरे की ठकुराई - एक छोटे ठाकरे ने एक बड़े ठाकरे की ठकुराई पर अपनी जीत का ग्रहण लगा दिया है। बड़े ठाकरे के अपने लोग, जो उनकी ठकुरसुहाती कहते-करते अघाते नहीं थे, अब न केवल ...2 days ago
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जो मार खा रोईं नहीं - विष्णु खरे की कविता ‘जो मार खा रोईं नहीं’ का एक ख़याल-पाठहिंदी कविता के पारंपरिक काव्य-आस्वादन-पठन-अभिरुचियों की रूढ़ता को विष्णु खरे की कविता जिस तरह-...2 days ago
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दुआ करना मेरे लिए..बहुत मिस कर रहा हूँ आप सब को - नमस्कार साथियो ! बहुत मिस कर रहा हूँ आप सबको लेकिन काम का बोझ इतना ज़्यादा आन पड़ा है कि अपने भांजे की शादी भी बीच में छोड़ कर आना पड़ा....... कल बाड़मेर मे...2 days ago
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जूता विमर्श के बहाने : पुरुष चिन्तन - कल ही नीलिमा जी को पढ़ता था कि कामकाजी महिलाओं के लिए *आरामदायक चप्पल* मिलना कितना मुश्किल है. जल्दी मिलती ही नहीं, हर समय तलाश रहती है. आज बरसों गुजर गय...2 days ago
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ज्ञान जी का प्रस्ताव और धन! - मेरे कल के आलेख प्राचीन भारत में आर्थिक विषमता नहीं थी! पर टिपियाते समय ज्ञानदत्त जी ने एक आश्चर्यजनक बात कह दी जो इस प्रकार है: मनुष्य समान बन नहीं सकता। ...2 days ago
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…मेरी पोस्ट के अर्थ अनेकों हैं - सुबह-सुबह बच्चे को स्कूल के लिये बस तक छोड़ने गया था। देखा तो सूरज भाई साहब गोल-गोल लाल टिकिया से खुले में खिले थे। सोचा कि मोबाइल लाये होते तो एक तो फ़ोटॊ ...2 days ago
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दिल्ली में 19 नवबर 09 - पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 ज़िलों के गन्ना किसानों का अद्भुत जमावाड़ा था। किसान एकता का यह प्रशंसनीय उदाहारण है। किसान एक होकर अगर खड़े हो गए होते तो जिस प...3 days ago
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बुरा जो देखन मैं चला...... - एक स्त्री होते हुए स्वयं भी उन समस्त विषम परिस्थितियों से गुजरी हूँ जिससे एक आम भारतीय स्त्री को गुजरना पड़ता है और आस पास असंख्य स्त्रियों को भी उन त्रासद...3 days ago
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हरियाणा की लोकरंग में रंगा--'तू राजा की राजदुलारी मैं सिर्फ़ लंगोटे वाला सूं' : मास्टर राजबीर की आवाज़ - 'रेडियोवाणी' पर 'नीरज' का जिक्र बार-बार होता रहा है । लेकिन आज एक फिल्मी-गीत के बहाने हो रहा है । मज़े की बात ये है कि ये गीत नीरज जी ने नहीं लिखा है । ...3 days ago
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गैस आंदोलन ने दी अपारंपरिक शिक्षा - भोपाल गैस त्रासदी के 25 वर्ष पर यूरिग सैनदरेट बता रहे हैं कि किस तरह से गरीब और निरीह जनता ने नित्य प्रति जीवन में दमन के प्रति पहले लचीलापन दिखाया और इसे ...3 days ago
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बैंगलोर में मार-कुटाई की बातें - दो लोग मेरी जिंदगी में ऐसे भी हैं जिन्हें देखते ही धमाधम मारने का बहुत मन करने लगता है.. पता नहीं क्यों.. एक को तो अबकी पीट आया हूं और दूसरे को धमका आया हू...3 days ago
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भोपाल गैस काण्ड : पच्चीस वर्ष : कवितायेँ : राजेन्द्र राजन - भोपाल गैस काण्ड के २५ वर्ष पूरे होने जा रहे हैं | दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रासदी से जुड़े सवाल ज्यों के त्यों खड़े हैं | हाल ही में इस बाबत मनमोहन सिंह...4 days ago
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भारतवंशियों स्वदेश लौटो! - [image: clip_image002] अंग्रेज़ों भारत छोड़ो की तर्ज पर ये गुहार है. गुहार नहीं, बल्कि एक आंदोलन है. भारत के शीर्ष पर बैठे राजनेता द्वारा छेड़ा गया आंदोल...4 days ago
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विजेट्स की परेशानियां : काम जारी है... - बहुत दिन से ब्लॉग जगत से दूर रहा। इस दौरान सैकड़ों साथियों की मेल और टिप्पणियां मिलीं। समय पर उत्तर नहीं दे पाने का मुझे खेद है। सबसे पहले मैं उन साथियों क...4 days ago
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The Sweetest Little Magenta Flower Girl - *By A. Surekha Rao * Hey Guys, I thought I must share this exqusite experience I had this morning while returning from my morning walk, I came across this...4 days ago
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आफ्नै मनको कुरा - महिनौं ब्लगबाट हराउनुको कारण के हो ? भन्ने प्रश्नको उत्तर बाहेक यो अबधिमा मैले थुप्रै कुराहरु पत्ता लगाएको छु, जस्तो की, १. ब्लग नलेखी हुँदै हुँदैन भन्ने ...4 days ago
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ये बकरे और मुर्गे नहीं हैं.. इंसान हैं .. मेरे – तुम्हारे जैसे इंसान - * एक पुरातत्ववेत्ता की डायरी –नौवाँ दिन –चार * किशोर , अशोक ,अजय सब नींद के आगोश में जा चुके थे । मैं जाग रहा था और एकटक तम्बू की छत की ओर देख रहा ...4 days ago
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मिथकों का मानव के अवचेतन पर प्रभाव - 2 - पिछली पोस्ट से आगे ... कई बार किसी प्रकार की आवाज गंध या दृश्य भी अवचेतन में प्रतीकों की तरह व्यवहार में आते हैं...जैसे आप कहीं जा रहे हो, किसी खाद्य पदार्थ...5 days ago
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बिस्तर ज़मीं को,बांह को तकिया बना लिया - यूं हसरतों का दायरा हद से बढ़ा लिया खुशियों को जिन्दगी से ही अपनी घटा लिया खुद पर भरोसा था तभी, उसने ये देखिये दीपक हवा के ठीक मुकाबिल जला लिया हम ...5 days ago
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एक वी.आई.पी. शादी जयपुर में...। - [image: विकास परिणय प्रीति] आजकल शादियों का मौसम चल रहा है। ज्योतिषियों ने बता दिया कि शादी के लायक शुभ मुहूर्त की तिथियाँ गिनती की ही हैं। इसका नतीजा ...5 days ago
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कुछ क्षणिकायें ........ - * सुइयों की पोटली है .....जो अक्सर सुलगाती रहती है इक आग ....वह अंधेरे में छोटी-बड़ी लकीरें खींचती है .....सीढियों से अँधेरा उतर कर आता है .....और रख देता ह...5 days ago
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जैव जगत में संक्रमण के दौरान परावर्तन - हे मानवश्रेष्ठों, पिछली बार हमने अजैव जगत में परावर्तन के कुछ रूपों की चर्चा की थी। इस बार जैव जगत में संक्रमण के दौरान परावर्तन के रूपों के जटिलीकरण पर एक...5 days ago
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"लोकगीत में स्त्री" विषयक राष्ट्रीय सेमीनार में नहीं दिया जा सका एक सम्बोधन - शिरीष कुमार मौर्य - नंदा राजजात का एक दृश्य देवियो और सज्जनो ! हिंदी की राष्ट्रव्यापी गोष्ठियों से गदगद इस समय में मैं आप सबको अभिवादन करता हूँ ! मैं कहीं चूक भी सकता हूँ इ...6 days ago
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अजीजन मस्तानी और बहुरुपिया का प्रदर्शन एनआरआई फिल्म फेस्टिवल 2010 में... - पत्रकार से फिल्म मेकर बने पंकज शुक्ल की दो शॉर्ट फिल्में अगले साल जनवरी में दिल्ली में होने जा रहे प्रवासी फिल्म समारोह यानी एनआरआई फिल्म फेस्टिवल में प्र...6 days ago
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बर्फीली घाटियों का क्लेश... - [ताड़-पत्र से ली गई एक और पुरानी कविता] मैं विवश हूँ सोचने पर मान्यताओं और आस्थाओं का ज्वार कब और क्यों भावनाओं के तट से टकराता है, एक साथ कई शून्य कब मस्ति...1 week ago
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श्रीकांत आचार्य- आमार शाराटा दीन - बँगला गानों की शृंखला में, ये एक अत्यंत मधुर गीत आज, श्रीकांत आचार्य की आवाज़ में। मैंने इस गीत को पहली बार कुछ दिनों पहले ही, बंगाल से एक दोस्त के भेंट करन...1 week ago
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मुझे भी बहुत गुस्सा आता है उन पर .......................इसलिए.......क्या कोई मेरा सन्देश उन तक पहुँचायेगा ? ? ? .. - अरे कायर है ये आतंकी, खुद तो जीते नही है, दूसरो को भी नही जीने देते, तभी तो हमेशा अकेले मरने से डरते है, और मासूम लोगों का साथ चुनते हैं, अगर हिम्मत है -तो ...1 week ago
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कुछ जज्बात जंगली से! - *कुछ जज्बात जंगली से! चलिए आज आपको सच का सामना कराते हैं झूठ की स्टाइल में. मैं आज आप से एक शर्त लगाता हूं. आपने अब तक कम से कम एक हजार बार झूठ जरूर बोला ह...1 week ago
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कुछ पल - टाइम मशीन में - बड़े भाई से लम्बी बातचीत करने के बाद काफी देर तक छोटे भाई से भी फ़ोन पर बात होती है. यह दोनों भाई जम्मू में हमारे मकान मालिक के बेटे हैं. इन्टरनेट पर मेरे बच...1 week ago
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नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा तहसील में दलित समुदाय के साथ दबंग सवर्ण/गैर दलित जातियों द्वारा किए जा रहे अत्याचार और उत्पीड़न के मामलों की फैक्ट फाइंडिंग - *जिला - नरसिंहपुर (मध्य प्रदेष)तहसील - गाडरवाराप्रभावित क्षेत्र - गाडरवारा के आस-पास के गाॅवों के दलित (अहिरवार समुदाय)फैक्ट फाइंडिंग टीम द्वारा भ्रमण ...1 week ago
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उनकी गायकी रूहानी तसल्ली का पता देती है. - *ग़ज़ल के जो मुरीद रूहानी तसल्ली तलाशते हैं; उस्ताद मेहंदी हसन उनके लिये एक तीर्थ हैं.ख़ाँ साहब इस बात को शिद्दत से महसूस करते हैं कि क्लासिकल मूसीक़ी के आसरे...1 week ago
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पुराना इतिहास डराता है कि बच्चा बोरिया बिस्तर बाँधने का समय आ गया है ? - ब्लॉग्गिंग की उलझनों पर बहुत बड़े -बड़े ज्ञानी कह गए सो हमारी क्या बिसात? फिर भी मन में था जो वह ठेल ही दिए.....शायद यह अपनी ब्लॉग्गिंग यात्रा क...1 week ago
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रब ने बना दी जोड़ी - मुझसे ठीक १० साल छोटी है वो। कुछ चीजें अनोखी हुई उसके साथ...... जैसे कि ११वें महीने की ११ तारीख को ११ बज कर ११ मिनट पर जन्म हुआ उसका। २८ अगस्त को ज...1 week ago
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अब कितनी सनसनी होती है - रात के करीब साढ़े दस बजे थे। दफ्तर की छत पर खुले में बैठकर हम खाना खाने जा ही रहे थे। पहला कौर उठाया ही था कि संपादक जी का फोन आ गया। हर्ष, कोई गोलीबारी क...1 week ago
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आज है मुनव्वर राना और राजकुमार केसवानी का जन्मदिन. - *सबसे पहले तो इन दोनो सुख़नवर की लम्बी उम्र की कामना करें.मुनव्वर राना और राजकुमार केसवानी को अलग-अलग इलाक़े के इंसान हैं लेकिन दोनो में एक समानता है कि ये अ...1 week ago
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उदास रात में झींगुरों का करुण राग - झींगुर सन्नाटे को तोड़ते थे और बुनते भी थे. ये उसके भीतर के शोर की लय में विघ्न उत्पन्न किया करते थे. उनसे ऊब कम और चिढ़ अधिक हुआ करती थी. चिन-चिन की इस आवाज़ क...1 week ago
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Communication 360 - I got a call a few days ago asking me to judge an all India inter-college competition on Communication Design. Imagine my surprise and delight! I said YES...1 week ago
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और वह फिर जी उठा - हम कभी भी यह मानकर नहीं चल सकते कि हम अन्तिम सच जानते हैं। यहाँ तक कि विज्ञान भी यह दावा नहीं कर सकता। जिसे हम आज सच मानते हैं वह कल झूठ साबित हो सकता है। फि...1 week ago
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आच्छादित आकाश - सुबह से ही आकाश बादलों से घिरा था..... उसके मन की तरह कितने ही डगमगाते भावों से आच्छादित ...बालकनी से एकटक बाहर देखती हुयी.... बहुत देर तक कल कही गयी संजो...1 week ago
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तुम्हारी हंसी - दिन के कोलाहल में जब खो जाता है मेरा वजूद, धमनियों की धौंकनी हो जाती है पस्त समंदर सी, इच्छाओं का विराट आकाश सिमट जाता है पुराने बटुए में ...1 week ago
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आज कैसे कर रहे हैं देखो हम करम.... - बस उम्मीदों के साये मे जी रहे हम। आज अपना ही लहू पी रहे हैं हम। कौन हमको हमसे बचाएगा यहाँ आज, होठ सच के मिल यहाँ, सी रहे हैं हम। घुट घुट के निकल रहा आज अपना...1 week ago
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अंग्रेजी अपनी दिव्यता खो रही है - अंग्रेजी से मेरे परिवार की मुठभेड़ गुलाम भारत में शुरू हुई थी। दादा जी संस्कृत के अध्यापक थे। एक बार उनकी बनारस में रहने वाले गांव के ही एक सज्जन से कुछ झड...1 week ago
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//-जो बार-बार मिलता-बिछड़ता है , -मन रूक सा जाता है.. उसका बोलना पानी के बीच घुलता जाता है.-एक नया मौसम इस मौसम के विरुद्ध हो जाता है... - लगातार होती बेमौसमी बारिश से आँगन की दीवारों से प्लास्टर छोटे-बड़े टुकड़ों की शक्ल में झड रहा-था,जिस दीवार से सटकर दोपहर की हलकी अप्रत्याशित धूप में थोड़ी ...1 week ago
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शेक्सपियर ऐंड कम्पनी - इस जगह को देख कर सबसे पहले इच्छा होती है कुछ दिन यहाँ रहा जाय । सचमुच रहा जा सकता है अगर आप लेखक हैं और दुकान की मालकिन सिल्विया को आपकी शकल और आपकी लिखाई ...1 week ago
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राही मासूम रजा और आधा गाँव - - प्रो० जोहरा अफ़जल राही मासूम रजा एक ऐसे आधुनिक रचनाकार थे जिनकी रचनाओं का मुख्य विषय राजनीति है। चाहे वह उनका उपन्यास हो, कहानी हो, कविता हो अथवा निबन...1 week ago
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मौत की पुकार - अष्टांक गिरोह से मैण्ड्रेक की मुठभेड़ (वर्ष १९८५ से एक इन्द्रजाल कॉमिक्स) - रहस्य की तमाम पर्तों के बीच दबा हुआ एक गुमनाम सा अपराधी संगठन. सैकड़ों वर्षों से आमजन की जानकारी से सर्वथा परे रहकर गुप्त रूप से अपनी गतिविधियों को संचालित...1 week ago
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क्रिकेटर नंबर वन : मिताली राज - आईसीसी द्वारा घोषित ताजा वन डे क्रिकेट की बल्लेबाजी रैंकिंग में मिताली का नंबर वन होना कई मायने में अहम है। क्योंकि पुरूष वर्ग में यह उपलब्धि सिर्फ महेंद्र...1 week ago
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मत पूछै के ठाठ भायला - कविता - यह कविता शेखावाटी प्रसिद्ध कवि श्री महावीर जी जोशी ने लिखी है | महावीर जी जोशी झुंझुनू जिले के बसावता खुर्द गाँव के रहने वाले है, बहुत ही सम्मानित और वयोवृ...2 weeks ago
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तुम भी चलकर काँधा दे दो…मुन्नी बेगम - मुन्नी तुम भी चलकर काँधा दे दो अब ये ख़ुशी की बात नहीं जाती है बीमार की मय्यत शादी की बारात नहीं गायिका: मुन्नी बेगम2 weeks ago
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'एक सुहाना सफर' - १२ तारीख को बच्चों की परीक्षाएँ ख़तम हो गयी थीं..इसलिए १३ -१४ को कहीं बाहर जाने का कार्यक्रम बनाया जाना था. कहाँ जाएँ ..यह सोचते ही ध्यान आया डिब्बा का ....2 weeks ago
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पहले चोरी फिर सीनाजोरी - आजकल हमारे देश में अगर कुछ सौ करोड़ का घोटाला हो तो वह घटना समाचार के योग्य नहीं मानी जाती इसलिए जिनको सुर्खियों में आना है वे हजारों करोड़ के घोटाले से जुड़त...2 weeks ago
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एक घटना ..... - तेरी यादें ... बहुत दिन बीते जलावतन हुई जियीं की मरी ---कुछ पता नही | सिर्फ़ एक बार --एक घटना घटी ख्यालों की रात बड़ी गहरी थी और इतनी स्तब्ध थी कि पत्ता भी ह...2 weeks ago
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स्पेयरिंग फ्यू मोमेंट्स फार चेतन भगत - यूं तो पढ़ने को बहुत ज्यादा टाइम इन दिनों नहीं मिलता , फिर भी चेतन भगत की दो किताबें थीं जो मैं काफी समय से पढ़ना चाह रही थी तो इस बार दिल्ली जाना हुआ तो ...2 weeks ago
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भारतीय भाषाओं की कम्प्यूटिंग : लिप्यन्तरण - परसों तथा कल उठाए गए विषय पर अभी विचार विमर्श की प्रक्रिया चल ही रही है, इसी कारण मुझे तद्विषयक सम्बंधित जानकारी के लिए पुन: लिखना आवश्यक लग रहा है | कल ...2 weeks ago
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शिरीष मौर्य को लक्ष्मण प्रसाद मंडलोई सम्मान - *पृथ्वी पर एक जगह को मिला सम्मान* शिरीष कुमार मौर्य हिंदी कविता का एक युवा और सधा स्वर हैं। उनके कई संकलन प्रकाशित हैं। १९९४ में कथ्यरूप ने पहला कदम नाम...2 weeks ago
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बा'रा'त निकली है... तो दूर तलक जायेगी... - जिसने लाईफ में बारात अटैंड नहीं की है उसने कही बैठकर झक ही मारा है.. बारातो में झूमकर ठुमके लगाने का अपना ही एक अलग मज़ा है.. यु तो हर बारात में ही कुछ ना कु...2 weeks ago
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दुनिया या प्रेम में खुलती खिड़की - डाकिया आज भी उसे कायदे से नहीं जान पाया था भले ही इस महल्ले में वो पिछले कई सालों से रह रहा था। ये बात अलग थी कि आज डाकिया ख़ुद अपनी पहचान के संकट से गुज़र...2 weeks ago
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इकत्तीस साल - दो सौ पोस्ट - [image: Happy-Birthday] आज हमारा हैप्पी बड्डे है । पूरे ३१ साल के हो गये आज । जीवन यात्रा में जन्मदिन का महत्व एक मील के पत्थर जैसा है । मील के पत्थर तो अ...2 weeks ago
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नन्हें मुन्हें बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है ? - कल तक जिन गीतों को मेरे पिता गुनगुनाते थे उनके बाद उन गीतों को हमने भी गाया गुनगुनाया .... अब हमारे बाद आने वाली पीढ़ी भी उन्हें गुनगुना और गा रही है,जब ...2 weeks ago
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सरमस्तों की महफ़िल में गजानन मुक्तिबोध आया - ज़माने भर का कोई इस क़दर अपना न हो जाए कि अपनी ज़िंदगी ख़ुद आपको बेगाना हो जाए। सहर होगी ये शब बीतेगी और ऐसी सहर होगी कि बेहोशी हमारे होश का पैमाना हो जाए।...3 weeks ago
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मैं - हवा,घटा और तूफान मैं जंगल थी और खोई हुई पगडंडी भी गहन गाढ़ा कोई अहसास मिट्टी भी गले पत्तों में पनपता कोई अंकुर भी मैं वो लम्हा थी जहाँ सच के दाय...3 weeks ago
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डिजिटली बी पी एल होने की व्यथा - रात के एक बजे थे अचानक मोबाइल की एस एम् एस टोन गुहार लगाती है । एस एम् एस एक दोस्त का था जो दिल्ली में बैठा हुआ था । अभी थोडी देर पहले तक वो जिद कर रहा था...3 weeks ago
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कुछ चीजें कभी नहीं बदलती? - [दिमाग में चलने वाली रैंडम बाते हैं... अपने रिस्क पर पढें :)] ६.३० घंटे में शाम के चार बजे से सुबह के ५.३० बज जायेंगे. यूँ तो ऐसा पहली बार नहीं हुआ लेकिन...3 weeks ago
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तस्वीर तेरी दिल मेरा बहला न सकेगी .... "तलत" - बस तीन शेर "मीर" के ...... और एक पसंद का गीत "तलत" की आवाज़ में ...... *"हम ने भी नज़्र की है कि फिरिए चमन के गिर्द यारब ! चमन के छूटने तक बाल-ओ-पर ...3 weeks ago
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मैं चर्चाता हूँ...इसलिए मैं हूँ - अगर इंसान पहचान के कई टुकड़ों में साथ साथ जीता है पिता, मित्र, धर्म, जाति... तो भला ब्लॉगर की क्योंकर एकमुश्त पहचान होगी... वो भी अपने अलग अलग चिट्ठों...3 weeks ago
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लाल स्कार्फ - इस साल नवम्बर में सरदी जब पहाड़ को पार कर घर के आँगन तक पहुँचेगी चाय के लिए तुलसी के पत्ते लेने मैं बाहर आया करुँगी तब आना तुम खिड़की पे दे...3 weeks ago
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"फकत खामख्याली का कन्साइनमेंट " - औसत आदमी के लिए यह सोच लेने से बड़ा ढाढस ओर कुछ नहीं है के सचाई की हमेशा जीत होती है -कर्टसी नैतिक शिक्षा ....यारो ने कहा है के लोभ भी एक कंटाजीयस बी...3 weeks ago
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वसुधैव कुटुम्बकम? - दुनिया भर में फैले हुए प्रवासी भारतीय हिन्दुओं को यदि उन देशों के बहुसंख्यक लोग गोमांस खाने पर मजबूर करने लगे तो उन्हे कैसा लगेगा। यदि वो अपनी मरजी से ऐसा ...3 weeks ago
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Tom & Jerry- The real characters - If I ask a question in a public forum... Who are Tom & Jerry?? All hands will raise up and there would be a unanimous voice... Our most loved cartoon charac...3 weeks ago
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रिश्ते की खोज...! - मैंने तुम्हारे दुःख से अपने को जोड़ा और अकेला हो गया मैंने तुम्हारे सुख से अपने को जोड़ा और छोटा हो गया मैंने सुख-दुःख से परे अपने को तुमसे जोड़ा और अर्थहीन हो ...4 weeks ago
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व्यथा-कथा आधे आकाश की - पुलित्ज़र पुरस्कार जीतने वाले पहले विवाहित दम्पती निकोलस डी क्रिस्टोफ और शेरिल वुडन ने अफ़्रीका और एशिया की सघन यात्राओं के बाद लिखी इस किताब में बताया है...4 weeks ago
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चिट्ठाकारी संगोष्ठी में घूमता कैमरा - * उद्घाटन सत्र की झलकियाँ * [image: एकेडेमी में आपका स्वागत है]एकेडेमी में आपका स्वागत है... [image: लाइव टेस्टिंग-माइक टेस्टिंग]ला...4 weeks ago
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हिन्दी प्रकाशन की दिशा - *हिन्दी का पुस्तक प्रकाशन भी 'सेलेब्रिटीज' की ओर?* दिवाली के त्यौहार के लिए घर की सफाई करते समय मुझे अपने कुछ पुराने नोट्स मिले। कुछ कागजों पर मैंने आधा-अध...1 month ago
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काया-कल्प औषधि - *इन आलेखों में पूर्व विद्वानों द्वारा बताये गये ज्ञान को समेट कर आपके समक्ष सरल भाषा में प्रस्तुत करने का छोटासा प्रयत्न मात्र है .औषध प्रयोग से पूर्व किसी...1 month ago
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एक साल बाद नमस्कार - सभी पाठको को एक साल एक महीने बाद इस ब्लॉग पर मेरा नमस्कार ,एक साल एक महीने बाद इसलिए क्योकि आज से एक साल एक महीने पहले इस ब्लॉग का पासवर्ड खो जाने से मैंने...1 month ago
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पठाके फोड़ो - दीपोत्सव की ढेरों बधाई. आने वाला वर्ष आप सबके जीवन में समृद्धि एवं शांति लेकर आये.1 month ago
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फ्राइबर्ग की कुछ छवियां - फ्राइबर्ग एक छोटा सा शहर है। यह शिक्षा, पर्यावरण अध्ययन और शोध और वैकल्पिक जीवन-समाज की खोज के लिए जाना जाता है। आबादी मुश्किल से ढाई लाख की है लेकिन पार्...1 month ago
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चिरकुटई पर प्रीमियम - प्रस्तुत है जयराम 'आरोही' की बिलकुल नई कविता चिरकुटई पर प्रीमियम. आप कविता पढिये. .......................................................... चिरकुट ऐक्ट्...1 month ago
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ग़ैरज़रूरी बहसों में अटके हुये - ऐसे क्या कारण हैं कि हिन्दी कि फॅमिली बेकग्राउंड होते हुआ भी हिन्दी विषय मे कोई डिग्री नहीं हैं बहुतो से ब्लॉगर के पास ?? क्यूँ ?? क्षमा चाहूँगा, रचना… मे...2 months ago
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नेह निमंत्रण - बेटे के आंचल में आते ही हर भारतीय मां उसके सर पर सेहरा बंधने के सपने देखने लगती है। हम भी कोई अपवाद नहीं हैं। जैसे ही हमारे बेटे ने अपने पिता के जूतों, कपड़...2 months ago
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फेयरवेल - प्रताप दीक्षित अंततः रामसेवक अर्थात् आर.एस. वर्मा, सहायक सुपरवाइजर की पोस्टिंग मुख्यालय में ही हो गई। ग्रामीण इलाकों से लेकर कस्बों और अनेक नगरों में फैल...2 months ago
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मेरे मोहल्ले में रमज़ान - *इनायत विला में* *‘’रमजान’’** *के दिनों में इफ्तारी के समय मैं हर शाम इफ्तारी के लिये नबाब अंकल के यहाँ जाया करती थी । भले ही मैं रोजे नहीं रखती थी पर म...2 months ago
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आप सब मुझे मिस तो करेंगे ही.... करेंगें ना ?? - आजकल आपसे ज़्यादा मुलाकात नही हो पा रही है. रमजान चल रहे है और अगले हफ्ते ईद भी है. तो उसी की तैयारियाँ चल रही है. जैसे शॉपिंग वग़ैरह... ….और अब अगले क...2 months ago
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कैमरे की नज़र - पिछले दिनों आगरा फतेहपुर सीकरी जाने का मौका लगा। झटपट यात्रा की कुछ तस्वीरें [image: 29_08_2009-XTi_0927] [image: 29_08_2009-XTi_0933_resize][image: ...2 months ago
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अभिवादन! - ” नमस्ते!! कैसी हैं आप? ” जैसे ही मैने हिन्दी की उन वृद्ध अध्यापिका से कहा, वे खुश हो गयीं और मुझे अपने पास ही जगह देकर बैठने को कहा… मुस्कुरा कर उन्होने ...2 months ago
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कार्बन नैनोट्यूब से बनेगा आदर्श सौर सेल - प्रकाश ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए सिलिकॉन की अपेक्षा कार्बन नैनो-ट्यूब का प्रयोग … [[ This is a content summary only. Visit my websit...2 months ago
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छुटपुट चुटकुले - राज जी (ताऊ से)- शादी में दूल्हे के साथ बाराती क्यों जाते हैं? ताऊ - क्योंकि बड़े कहते हैं कि किसी की खुशी में जाओ या न जाओ पर मुसीबत में जरूर जाना चाहिए। ...2 months ago
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हादसे की शिकार जाने बचाने की मुहिम - सड़क पर आये दिन जाने कितने ही हादसे होते रहते हैं जिन्हें देखते हुए आगे बढ़ जाना समाज की आदत हैं लेकिन शरीफ भाई इस रीति के खिलाफहैं. कहीं भी दुर्घटना होती है...2 months ago
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चलो, मेरा लिखा मत पढ़ो, पर इसको तो न छोड़ो - जब कौल कर ही लिया है, तो मैं आज कुछ न लिखूँगा.. तो आप भी कुछ न पढ़ना । आपको ब्लागवाणी पर... आगे पढ़ें..2 months ago
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ज्ञानेश्वरी - ज्ञानेश्वरी महाराष्ट्र के संत कवि ज्ञानेश्वर द्वारा रची गई श्रीमदभगवतगीता की अद्वितीय टीका है। यह ग्रंथ ज्ञानेश्वर की सबसे महत्वपूर्ण कृति मानी जाती है। इस...3 months ago
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24वीं वर्षगाँठ पर .... - पहली सितम्बर की सुबह की लालिमा ... सन्ध्या की कालिमा में बदल गई.... लेकिन हाथ की कलम में कोई हरकत न हुई..... इस उमस के मौसम में ..........3 months ago
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क्या हल्ला बोलेंगे ये हल्ला करने वाले - आलोक तोमर - क्या हल्ला बोलेंगे ये हल्ला करने वाले आलोक तोमर भारत के सबसे सिद्व और प्रसिद्व संपादक और उससे भी आगे शास्त्रीय संगीत से ले कर क्रिकेट तक हुनर जानने वाले प्...3 months ago
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बदलाव तो शतरंज का खेल है, शह और मात - सामाजिक बदलाव, व्यवस्था परिवर्तन। सिस्टम बदलना होगा। बीस-पच्चीस साल पहले नौजवानों में यह बातें खूब होती थीं। अब भी होती हैं, लेकिन कम होती हैं। कितनी कम, न...3 months ago
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बिन रोली हल्दी के साथ परदेस में बंधी राखी.... - चार से पाँच माह बीत गए...लंबे समय से कम्प्यूटर से दूर पहले तो आँखों का ऑपरेशन...फिर बहन की शादी...इसके बाद परदेसी होना। मेरा ब्लॉग भी मेरी माँ की तरह तन्ह...3 months ago
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महबूबा ..महबूबा .. - यदि इस पोस्ट का टाइटल पढ़कर आपको फिल्म शोले की याद आ जाये तो इसमें मेरा कोई कसूर नहीं है, लेकिन मैं ना तो आज आपको फिल्म शोले का गाना सुना रहा और ना ही अपन...4 months ago
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मेरे वोट की इज्जत रखो, ये बेशर्मी छोडो - *आज अखबारों में पीडीपी नेता महबूबा की फोटो देखी उन्होने आसंदी का माइक उखाडकर स्पीकर पर फेंका, दूसरी तस्वीर राजस्थान की एक विधायक की है, जिसमें सदन में...4 months ago
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भोजपुरी वर्णमाला (देवनागरी लिपि) - कृपया ध्यान दें- भोजपुरी वर्णमाला विशेषकर हिंदी के समान ही है। स्वर एवं उसकी मात्रा– अ, आ (ा), इ (ि), ई (ी), उ (ु), ऊ (ू), ए (े), ऐ (ै), ओ (ो), औ (ौ), ...4 months ago
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बधाई दे आज इनका जन्म दिन हैं - आज घुघूती बासूती जी का जन्मदिन हैं । उनका चित्र उपलब्ध नहीं हैं पर हम शुभकामना तो दे ही सकते हैं । मेरी शुभकामनाए ।4 months ago
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नाम ही काफी हैं .. - कहते हैं नाम में क्या रखा हैं ,पर अगर किसीका नाम ही उसकी पहचान के लिए काफी हो तो?नही मैं न तो किसी दैवीय अवतार की बात कर रही हूँ नही किसी महान कलाकार की । ...4 months ago
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आर्यभट मस्ट बी प्राउड - काल का पहिया 1510 साल में पूरा घूम गया. बिहार में जहाँ तरेगना है, वहाँ तारों को तरेगन कहते हैं. मिसाल- 'अइसा झापड़ मारेंगे कि दिन में तरेगन लउकने लगेगा'. श...4 months ago
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पुराने ब्रिटिश साम्राज्य की बियर - पिछले दिनों मैने पुराने ब्रिटिश साम्राज्य की बियर के बारे में एक अच्छा लेख पढ़ा। यदि आप बियर पर मेरी पुरानी सभी पोस्ट पढ़ चुके हैं तो यह लेख खासकर आपको पसन्द...4 months ago
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मत लिखना.... - मत लिखना, इस निर्मम सदी का इतिहास। जिसने मशीनों में प्राण तराशे हैं, और जीवित इंसानों को पुतलों में तब्दील कर दिया है जिसने नदियों के उजले तन पर, विष कलश...4 months ago
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उड़ते हुए रूई के फाहे - हमारा घर बहुत छोटा था। सदस्य ज्यादा थे। घर के लोगों के हाथ-पैरों पर खरोंचों के निशान थे। हम जब भी घर में आते-जाते तो हमें घर में रखी टूटी आलमारी, कुर्सी, ...5 months ago
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उन्होंने पर्यावरण को बचा लिया - उन्हें यह भ्रम है कि पेड़ लगाए जाते हैं और मैं कोई पर्यावरण बचाओ आंदोलन चलाने वाला व्यक्ति हूं। अक्सर कहा जाता है "वृक्षारोपण कार्यक्रम" .... मुझे लगता है...6 months ago
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लोकतांत्रिक सामंतवाद : जय हो - सत्तर के शुरुआती दिनों मे विविधभारती की विज्ञापन सेवा जब मनोरंजन के क्षेत्र को एक नया आयाम दे रही थी। नए-नए विज्ञापन भी खासे आकर्षक बनाए जाते थे। उन दिनों ...6 months ago
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Facebook अब भारतीय भाषाओँ में - Facebook दुनिया की सबसे बड़ी सोशल नेटवर्क साईट. अभी भारत में भले ही ये Orkut से पीछे हो पर Corporate और Professional जगत में इसकी धूम है. Facebook अब हाल म...6 months ago
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दोहे रहीम के...बातें पते की. - रहिमन वे नर मर चुके, जो कहुं मांगन जाहिं। उनते पहिले वे मुए, जिन मुख निकसत नाहिं।। +++++++++++++++++++++++++++++ रहिमन यहि संसार में, सब सो मिलिए धाई। ना जा...7 months ago
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चीनी हिन्दी - आज के अख़बार में पढ़ा कि चीन में अब हर साल दो सौ विद्यार्थी हिन्दी भाषा में ग्रैजुएट हो जाते हैं। और उससे बडी बात यह कि उनके इस हिन्दी के ज्ञान के कारण उ...7 months ago
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टीआरपी के खेल में पीछे छूट रहा है इंडिया टीवी , स्टार न्यूज नंबर-2 , आजतक नंबर-1 - टीआरपी बटोरने के खेल में माहिर *इंडिया टीवी* लगातार चार हफ्ते से नंबर तीन पर है । *स्टार न्यूज* उसे पीछे छोड़कर नंबर दो की कुर्सी पर काबिज हो गया है । आजतक...8 months ago
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Google Venture : आपके सपनों को सच में बदलने के लिए - Google, हमेशा से कुछ नयी देनी वाली कंपनी है. यही चीज इसे अन्य कंपनियों से अलग बनती है. समय को पहचान कर कुछ हटके देना आपकी लोकप्रियता को बढाता है. Google न...8 months ago
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मैं स्वयं महिमावंत हूँ| - बाहर की महिमा छोड़ ;वहाँ क्या है ? इसलिए पर की महिमा और आकर्षण छोड़कर एक बार परम ब्रह्म प्रभु निज आत्मा की महिमा लाकर अपने ज्ञान उपयोग को वहाँ जोड़ दे तो त...9 months ago
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अनिग्मा [Enigma] - वो क्यों देखती है मुझे? उसे क्या चाहिए मुझसे? न रब्त कोई रखा मैंने उससे न ही उसने मुझसे फिर क्यों... Please visit my blog for further readings...10 months ago
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मेरे सपनों का भारत - (Latent Dissent के लिए उनके आमंत्रण पर आभार सहित ) हमारे देश के अनेक सूत्र वाक्यों में से एक है - 'चरैवैती-चरैवैती' अर्थात बढ़ते चलो ... बढ़ते चलो .. पिछ...11 months ago
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poem by some one - human being are member of awhole in ceartion of one essence and soul if one member is affilated with pain other member uneasy will reamin if you have no symp...11 months ago
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यूनिटी डार्लिंग ने आगे की आत्मकथा सुनाई ! - [image: uniti in pool] आज काफी व्यस्त समय के बाद हम वीक एंड पर यूनिवर्स के बीचों बीच चले जा रहे थे ! शायद इस आकाश गंगा में से हम पहले कभी नही गुजरे थे !...1 year ago
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एक अपराध-बोध से मुक्ति - गए दो दिनों से मैं बहुत हलका अनुभव कर रहा हूँ । एक अपराध-बोध से मुक्ति मिल गई है मुझे । तनिक अलंकारिक भाषा का उपयोग करुँ और शब्दाडम्बर रचूँ तो कह सकता हू...1 year ago
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गूगल का नया ब्राउजर - गूगल आज एक नया ब्राउजर लॉन्च करने वाला है। गूगल के ब्लॉग पर इसकी ख़बर यहाँ पढिये। गूगल के द्बारा लाया जाने वाला हर प्रोडक्ट कुछ ना कुछ बदलाव लाता ही है। अब...1 year ago
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डा० भीमराव अम्बेदकर - *अछूत* *वे कौन थे * *और अछूत कैसे बन गए?* ** ** ** ** प्रस्तावना *भाग एक : तुलनात्मक सर्वेक्षण* १. गैर-हिन्दुओं में छुआछूत २. हिन्दुओं में छुआछूत ...2 years ago
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निहारिका मे सितारों का जन्म - ब्रम्हाण्डीय नर्सरी जहाँ तारों का जन्म होता है एक धूल और गैसों का बादल होता है जिसे हम निहारीका (Nebula) कहते है। सभी तारों का जन्म निहारिका से होता है सि...2 years ago
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जबरिया चिठ्ठा चर्चा - किसी ने कहा नहीं चिठ्ठा चर्चा करने को पर नारद पर किसी वजह से रात से चिठ्ठे नहीं दिख पा रहे थे सो चिठ्ठा चर्चा में अनूप जी उनकी चर्चा नहीं कर पाए तो मैने सो...3 years ago
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मुहावरा अरबी के हौर शब्द से जन्मा है जिसके मायने हैं परस्पर वार्तालाप, संवाद।
लंबी ज़ुबान -इस बार जानते हैं ज़ुबान को जो देखते हैं कितनी लंबी है और कहां-कहा समायी है। ज़बान यूं तो मुँह में ही समायी रहती है मगर जब चलने लगती है तो मुहावरा बन जाती है । ज़बान चलाना के मायने हुए उद्दंडता के साथ बोलना। ज्यादा चलने से ज़बान पर लगाम हट जाती है और बदतमीज़ी समझी जाती है। इसी तरह जब ज़बान लंबी हो जाती है तो भी मुश्किल । ज़बान लंबी होना मुहावरे की मूल फारसी कहन है ज़बान दराज़ करदन यानी लंबी जीभ होना अर्थात उद्दंडतापूर्वक बोलना।
दांत खट्टे करना- किसी को मात देने, पराजित करने के अर्थ में अक्सर इस मुहावरे का प्रयोग होता है। दांत किरकिरे होना में भी यही भाव शामिल है। दांत टूटना या दांत तोड़ना भी निरस्त्र हो जाने के अर्थ में प्रयोग होता है। दांत खट्टे होना या दांत खट्टे होना मुहावरे की मूल फारसी कहन है -दंदां तुर्श करदन
अक्ल गुम होना- हिन्दी में बुद्धि भ्रष्ट होना, या दिमाग काम न करना आदि अर्थों में अक्ल गुम होना मुहावरा खूब चलता है। अक्ल का घास चरने जाना भी दिमाग सही ठिकाने न होने की वजह से होता है। इसे ही अक्ल का ठिकाने न होना भी कहा जाता है। और जब कोई चीज़ ठिकाने न हो तो ठिकाने लगा दी जाती है। जाहिर है ठिकाने लगाने की प्रक्रिया यादगार रहती है। बहरहाल अक्ल गुम होना फारसी मूल का मुहावरा है और अक्ल गुमशुदन के तौर पर इस्तेमाल होता है।
दांतों तले उंगली दबाना - इस मुहावरे का मतलब होता है आश्चर्यचकित होना। डॉ भोलानाथ तिवारी के मुताबिक इस मुहावरे की आमद हिन्दी में फारसी से हुई है फारसी में इसका रूप है- अंगुश्त ब दन्दां ।














10 कमेंट्स:
अच्छी सूफ़ियाना बातें पता चली, और मूल धातुओं के बारे में लेखन तो जबरदस्त है। बहुत कुछ सीखने को मिला।
अल्लाह ही अल्लाह.....
जानदार और शानदार चिट्ठी।
राहों में भटकते रहे लोग, मकाम की तलाश में
मकाम तक पहुंचने वाला, अब तक मिला नहीं
ज़बरदस्त पोस्ट
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पढ़िए: सबसे दूर स्थित सुपरनोवा खोजा गया
ये भी कमाल है भाई.
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डॉ.चन्द्रकुमार जैन
बहुत अच्छी जानकारी दी आपने।
वैसे विशनोई जाति के मुख्य धार्मिक स्थल जो नागौर के पास है उसे भी मुकाम ही कहते हैं मक्का की भांति।
अच्छी जानकारी दी आपने।
आभार!
अच्छी जानकारी दी आपने... बहुत कुछ सीखने को मिला...धन्यवाद
Nice Post.
Wishing "Happy Icecream Day"...See my new Post on "Icecrem Day" at "Pakhi ki duniya"
अगर आधे मकाम पर ही खरे उतर जाए तो फ़ना भी शान से ही होंगे
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