Saturday, December 3, 2011

भेद की दीवारें, दीवारों के भेद

wal

रिनिष्ठित हो या बोलचाल की हिन्दी, दो कमरों को विभाजित करने वाली रचना के लिए आपको कितने शब्द याद आते हैं? किसी कक्ष को चारों और से सुरक्षित बनाने वाली वह रचना जिस पर छत टिकी होती है उसे तत्काल आप क्या कहेंगे? यक़ीनन दीवार ही इस आशय को अभिव्यक्त करने वाला वह शब्द है जो लगभग सभी के दिमाग़ में कौंधता है। बोली भाषा में भीत शब्द चल सकता है, मगर ज़रूरी नहीं कि हर हिन्दी भाषी इसका इस्तेमाल करना चाहे। दीवार रोजमर्रा की बोली में सर्वाधिक इस्तेमाल होने वाले शब्दों में शुमार है। दीवार शब्द में मुहावरेदार अर्थवत्ता है। एक तरफ़ जहाँ इसमें विभाजन, अलगाव या दुराव वाला भाव है तो दूसरी और सुरक्षा और मज़बूती प्रदान करने का भाव भी खास है। “हम दोनों के बीच वह दीवार बन गया” में जहाँ अलगाव और विभाजनकर्ता का भाव है वहीं, “ उन दिनों वे दीवार की तरह मज़बूती से हर मुश्किल के सामने खड़े नज़र आए” इस वाक्य में सकारात्मक है।
दीवार इंडो-यूरोपीय भाषा परिवार की इंडो-ईरानी शाखा का शब्द है और भारतीय भाषाओं में इसकी आमद फ़ारसी से हुई है। यह अवेस्ता के एक सामासिक पद से बना है देगा-वरा [dega-vara]। पकोर्नी द्वारा खोजी गई प्रोटो भारोपीय धातुओं में dheigh ( -धिघ, मोनियर विलियम्स) से बना है अवेस्ता का देगा जिसका अर्थ है मिट्टी, काया अथवा लेपन। इसके अन्य रूप हैं दिज़, देज़, दाएज़ा जिनका अर्थ है किला या दीवार। संस्कृत की दिह् धातु का अर्थ भी लीपना, सानना, पोतना होता है। दिह् से ही बना है देह शब्द जिसका अर्थ काया, शरीर होता है मगर इसका मूलार्थ है आवरण। गौर करें दिह् में निहित लेपन के अर्थ पर। किसी वस्तु पर लेपन उसे सुरक्षित बनाने के लिए ही किया जाता है। देह एक तरह से शरीर के भीतरी अंगों का सुरक्षा कवच है। मोनियर विलियम्स के कोश के अनुसार देह का अर्थ है आवरण, लेपन, मिट्टी, ढांचा, साँचा, गूँथना, ढालना आदि। दार्शनिक अर्थों में देह को मिट्टी से निर्मित भी कहा जाता है और इसे किले की उपमा भी दी जाती है। गौरतलब है कि अंग्रेजी का डो dough भी इसी धिघ् dheigh से बना है जो इसके पोस्ट जर्मनिक रूप daigaz से तैयार हुआ। अंग्रेजी का लेडी शब्द भी हिन्दी में खूब प्रयोग होता है, जो इसी मूल का है। कबीर ने मनुष्य को माटी का पुतला यूँ ही नहीं कहा। देह, दिह्, दिज़् शब्दों के भावार्थों पर जाएँ तो माटी के पुतले के निर्माण की सारी क्रियाएँ स्पष्ट होती है यानी मिट्टी को पीटना, सानना, राँधना, गूँथना, साँचा बनाना और फिर पुतला बनाना।
वेस्ता का दिज़ शब्द इसी मूल का है और जिसका अर्थ किला ही होता है। कुल मिला कर दिघ्, दिह्, दिज़, देगा, दाएज़ा में परिधि, कोट, किला और सुरक्षित स्थान का भाव विकसित होता चला गया। इस दाएज़ा से पूर्व जब अवेस्ता का उपसर्ग पइरी लगता है तो बनता है पइरी-दाएज़ा। गौरतलब है कि भारोपीय भाषा परिवार में पर per / peri जैसी धातुएँ उपसर्ग की तरह प्रयुक्त होती हैं। इसमें चारों ओर, आस-पास, इर्दगिर्द, घेरा जैसे भाव हैं। संस्कृत का परि उपसर्ग इसी से व्युत्पन्न है जिससे बने दर्जनों शब्द हम रोज़ इस्तेमाल करते हैं जैसे परिवार, परिवहन, परिचर, परिधान आदि। इसका ही अवेस्ता रूप पइरी होता है। दाएज़ा से जुड़ कर बने पइरीदाएज़ा (pairidaeza) में ऐसे स्थान का आशय है जिसके चारों ओर सुरक्षित परकोटा है। इसका अर्थ हुआ सुरम्य वाटिका, आरामग़ाह। एटिमऑनलाइन के मुताबिक ग्रीक में इसका रूप हुआ paradeisos, लैटिन में यह पैराडिसस हुआ तो पुरानी फ्रैंच में यह पैरादिस और अंग्रेजी में इसका रूप पैराडाइज़ हुआ। इन तमाम रूपान्तरों में स्वर्ग, बहिश्त, वैकुण्ठ, जन्नत, ईडेनगार्डन जैसे अर्थ स्थिर हुए। बाद में अवेस्ता के पइरीदाएज़ा का बरास्ता पहलवी होते हुए फ़ारसी रूप बना फ़िर्दौस (हिन्दी में फ़िरदौस) अर्थवत्ता कायम रही। फ़ारसी के प्रसिद्ध कवि फ़िर्दौसी के नाम का अर्थ फ़िर्दौस नाम की जगह का बाशिंदा ही होता है। बाद में अरबी में भी यह फ़िर्दौस पहुँचा।
फिर से लौटते हैं अवेस्ता के देगा-वरा पर। प्रोटो इंडो यूरोपीय भाषा परिवार की धातु वर् wer में घुमाना, दोहरा करना, लपेटना जैसे भाव हैं। इससे मिलती जुलती संस्कृत धातु है वृ जिसमें और साफ नजर आ रहे हैं जिसका अर्थ है घेरना, लपेटना, ढकना, छुपाना और गुप्त रखना। इससे बने वर्त या वर्तते में वही भाव हैं जो प्राचीन भारोपीय धातु वर् wer में हैं। गोल, चक्राकार के लिए हिन्दी संस्कृत का वृत्त शब्द भी इसी मूल से बना है। गोलाई दरअसल घुमाने, लपेटने की क्रिया का ही विस्तार है। वृत्त, वृत्ताकार जैसे शब्द इसी मूल से बने हैं। छुपाने और गुप्त रखने के भाव पर गौर करें। किसी केन्द्र के इर्दगिर्द डाला हुआ घेरा, केन्द्र को सुरक्षित करता है, उसे छुपाता है, गुप्त रखता है। अर्थात वर् धातु में सुरक्षा का भाव भी प्रमुख है। इस तरह देगा-वरा का फ़ारसी रूप दीवार तैयार होता है जिसके हिन्दी में दीवाल, दिवार जैसे रूप बने। मराठी में इसे दिवाल, दिवार या दिवाळ लिखा जाता है। दिवाळ-शिकन्दर मराठी का सामासिक पद है जिसका आशय है सिकन्दर द्वारा बनाई गई मज़बूत दीवार।
दीवार के अर्थ में हिन्दी में अल्प प्रचलित किन्तु लोक बोलियों में खूब चलने वाला दूसरा शब्द है भीत जो बना है संस्कृत के भित्ति से। भित्ति में भी मूल रूप से विभाजित करने का भाव है। यह बना है संस्कृत धातु भिद् से जिसमें दरार, बाँटना, फाड़ना, विभाजित करने जैसे भाव हैं। कोई भी दीवार दरअसल किसी स्थान को दो हिस्सों में बाँटती है। एक समूचे मकान की दीवारें विभिन्न प्रकोष्ठों का निर्माण करती हैं। भित्ति से मराठी में भिन्त शब्द बनता है। प्राचीनकाल में विशाल चट्टानों पर चित्र बनाए जाते थे जिन्हें शैल-चित्र कहते हैं क्योंकि आदि मानव का निवास स्थान शैलाश्रयों में ही होता था। बाद में जब मनुष्य नें मकान बनाना सीख लिया तो उसकी दीवारें ही कैनवास बनीं। ऐसे चित्रों को भित्ति-चित्र कहा जाता है। भेद, भेदन, भेदना जैसे शब्द भी भिद् से तैयार हुए हैं। रहस्य के अर्थ में जो भेद है उसमें दरअसल आन्तरिक हिस्से में स्थित किसी महत्वपूर्ण बात का संकते है जो उजागर नहीं है। ज़ाहिर है इस बात को रहस्य की तरह माना गया, इसलिए भेद का एक अर्थ गुप्त या रहस्य की बात भी है। भेद को उजागर करने के लिए उस स्थान पर भेदने की क्रिया ज़रूरी है, तभी वह गुप्त बात सामने आएगी। भेदिया शब्द भी इसी धातु से तैयार हुआ है जिसका अर्थ है जासूस, भेदने वाला। कई बार प्रकार, अन्तर, फर्क आदि के अर्थ में भी भेद शब्द का प्रयोग होता है। बात वही विभाजन की है। किसी चीज़ के जितने विभाजन होंगे, उसे ही भेद कहेंगे जैसे नायिका-भेद यानी नायिकाओं के प्रकार। फूट डालने के अर्थ मे भेद ड़ालना मुहावरा भी प्रचलित है। “दीवारों के भी कान होते” हैं जैसी कहावत में दीवारों के पीछे छुपने वाले और वहाँ बसने वाले भेदों का ही तो संकेत मिलता है। -जारी
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4 कमेंट्स:

चंदन कुमार मिश्र said...

यह यात्रा भी ठीक रही…

प्रवीण पाण्डेय said...

अस्तित्व समेटती दीवारें।

बलजीत बासी said...

बहुत बढ़िया है अजित भाई. पंजाबी में दीवार के लिए आम शब्द 'कंध' है जो
स्कंध से विकसित हुआ. मुझे हैरानी हुई कि हिंदी में यह शब्द इस अर्थ में
नहीं है. अगर है तो बताना, मेरे ज्ञान में वृद्धि होगी. भित्ति-चित्र*
तो अंग्रेज़ी mural का अनुवाद ही किया लगता है, या ऐसा शब्द पहले से मौजूद
है? पंजाबी में इसे कंध-चित्र कहते हैं .

विष्णु बैरागी said...

आपने तो जानकारियों की मजबूत दीवार चुन दी। धन्‍यवाद अजित भाई।

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