| ये सफर आपको कैसा लगा ? पसंद आया हो तो यहां क्लिक करें |
Monday, January 30, 2012
सजने-सँवरने की बातें (गहना-1)
Thursday, January 26, 2012
दीवानेख़ास और आमख़ास
पिछली कड़ी-आम आदमी, बाज़ारू आदमी-1
| ये सफर आपको कैसा लगा ? पसंद आया हो तो यहां क्लिक करें |
प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
10
कमेंट्स
पर
10:26 PM
लेबल:
government,
shelter,
नामपुराण,
राजनीति,
संस्कृति,
स्थान
इस संदेश के लिए लिंक
Wednesday, January 25, 2012
आम आदमी, बाज़ारू आदमी-1
... “अम्मु” का अर्थ है राष्ट्र या अवाम । दिलचस्प बात यह कि सेमिटिक भाषा परिवार की कई भाषाओं में “अम्मु” शब्द का वर्ण विपर्यय होकर माँ के आशय वाले शब्द बने हैं ...उक्त तमाम सन्दर्भों से गुज़रते हुए अरबी के “आम्” शब्द में सार्वत्रिक, सर्वसाधारण, सामान्य की अर्थवत्ता स्थापित हुई।
| ये सफर आपको कैसा लगा ? पसंद आया हो तो यहां क्लिक करें |
Saturday, January 21, 2012
रैली, रेवड़ और रेड़ मारना
रेड़ मारना- हिन्दी का एक आम मुहावरा है रेड़ मारना । रेड़ मारना का सामान्य अर्थ है किसी व्यवस्था या वस्तु को बिगाड़ देना, उसका बिगड़ जाना। किसी चीज़ को सही ढंग से प्रयोग नहीं करना। किसी व्यवस्था में अनावश्यक छेड़छाड़ करते हुए उसके मूल स्वरूप को बिगाड़ देना जैसी बातें रेड़ मारना, रेड़ करना या रेड़ पीटना जैसे मुहावरों में व्यक्त होती है। रेल के रेड़ रूप के सन्दर्भ में इसमें निहित धकियाने का भाव रेड़ मारना मुहावरे में गौरतलब है। भाव यही है कि किसी चीज़ के मूल स्वभाव के विपरीत उसके साथ की जाने वाली जोर-जबर्दस्ती या छेड़छाड़ ही रेड़ मारना है। भीड़ के मूल चरित्र यानी अस्तव्यस्तता, अव्यवस्था की नुमाइंदगी करने वाला रेड़ शब्द उसी रेल शब्द से निकला है जिससे भीड़ के अर्थ में रेला शब्द जन्मा है।
| ये सफर आपको कैसा लगा ? पसंद आया हो तो यहां क्लिक करें |
प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
7
कमेंट्स
पर
11:49 PM
लेबल:
animals birds,
government,
nature,
राजनीति,
व्यवहार
इस संदेश के लिए लिंक
Friday, January 20, 2012
ग़नी और माले-ग़नीमत
... जिसके हाथ माल लगा वह पहले तो घनीम अर्थात विजेता कहलाया। पराजितों की निगाह में वह लुटेरा, डाकू, दस्यु था। आगे घनीम का एक और रूपान्तर हुआ जिसमें शक्तिशाली, समृद्ध, मालदार, ताक़तवर, दौलतमंद जैसे वज़नदार अर्थों की स्थापना के साथ अरबी, फ़ारसी, उर्दू और हिन्दी में ग़नी जैसा रौबदाब वाला शब्द भी अस्त्तित्व में आ गया।
साफ नज़र आता है। उर्दू –हिन्दी का एक आम शब्द है “माल” जो मूल रूप से सेमेटिक भाषा परिवार का है। माल का अर्थ होता है सम्पत्ति। व्यापक तौर पर धन-दौलत, सामान, भंडार, कीमती सामग्री, वस्तुएं आदि भी आती हैं। यह बना है “माल” अर्थात mwl से जिसका अर्थ होता है पशुओं का रेवड़। खासतौर पर जो दुधारू पशु पालतू हों| ये सफर आपको कैसा लगा ? पसंद आया हो तो यहां क्लिक करें |
प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
5
कमेंट्स
पर
1:00 AM
लेबल:
animals birds,
government,
इस्लाम islam,
पद उपाधि,
भाषा,
संस्कृति,
सम्बोधन
इस संदेश के लिए लिंक
Tuesday, January 17, 2012
महारत और महारथ
| ये सफर आपको कैसा लगा ? पसंद आया हो तो यहां क्लिक करें |
Monday, January 9, 2012
येड़ा… बेंडा…एड्डु…इड्डु
| ये सफर आपको कैसा लगा ? पसंद आया हो तो यहां क्लिक करें |
Friday, January 6, 2012
सब बराबर हैं…
... बराबरी में दिल को दिल से जोड़ने के बहाने समानता का सन्देश महत्वपूर्ण है...
| ये सफर आपको कैसा लगा ? पसंद आया हो तो यहां क्लिक करें |
Tuesday, January 3, 2012
बजरिया में बाजारू बातें
| ये सफर आपको कैसा लगा ? पसंद आया हो तो यहां क्लिक करें |
प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
3
कमेंट्स
पर
9:47 PM
लेबल:
business money,
shelter,
आश्रय,
माप तौल,
स्थान
इस संदेश के लिए लिंक
Sunday, January 1, 2012
दुकाँ से दुकान तक
सम्बन्धित शब्द- नीलाम, विपणन, पण्य, क्रय-विक्रय, गल्ला, हाट,
| ये सफर आपको कैसा लगा ? पसंद आया हो तो यहां क्लिक करें |
प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
2
कमेंट्स
पर
11:32 PM
लेबल:
business money,
government,
उपकरण,
तकनीक,
निर्माण,
माप तौल,
व्यवहार
इस संदेश के लिए लिंक











































