शब्दों का सफर
Wednesday, December 7, 2011

हप्-हप् खाना या हड़पना ?

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कि सी की वस्तु को जबर्दस्ती हथिया लेना, दूसरे की सम्पत्ति को जबर्दस्ती अपने स्वामित्व में लाने, चतुराई या बलप्रयोग से किसी अन्य के स्वाम...
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Monday, December 5, 2011

दिलो-दिमाग़ की बातें

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पिछली कड़ी - आखिर क्या है सौहार्द्र? फ़ा रसी ने कुछ ऐसे नायाब शब्द हिन्दी को दिए हैं कि जिनके बिना दिल की बात ज़ुबाँ पर आनी मुश्किल हो...
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Sunday, December 4, 2011

आखिर क्या है ये ‘सौहार्द्र’ ?

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श ब्दों की गहराई तक गए बिना उसे इस्तेमाल की बढ़ती प्रवृत्ति के दौर में हिन्दी पत्रकारिता भला इस बुराई से कैसे बची रह सकती है। आए दिन सद्...
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Saturday, December 3, 2011

भेद की दीवारें, दीवारों के भेद

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प रिनिष्ठित हो या बोलचाल की हिन्दी, दो कमरों को विभाजित करने वाली रचना के लिए आपको कितने शब्द याद आते हैं? किसी कक्ष को चारों और से स...
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Friday, December 2, 2011

उपन्यास की नवलकथा…

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हि न्दी में अंग्रेजी के नॉवेल novel के लिए कोई पर्यायी शब्द नहीं है। उपन्यास शब्द इस अर्थ में बीते क़रीब डेढ़ सौ साल से हिन्दी में है म...
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Wednesday, November 30, 2011

हिन्दी में सिमट गई ‘वारदात’

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का मयाब घुसपैठिया कौन है? ज़ाहिर है जो मनचाही जगह में प्रवेश भी कर जाए और किसी को कानोकान ख़बर न हो। साथ ही उसका कुछ नुक़सान भी न हो। मग...
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Monday, November 28, 2011

नीमहकीम और नीमपागल

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  इ स बार एक मराठी शब्द से सफ़र की शुरुआत। मराठी में आधा के अर्थ में निम्म, निम्मा, निम, निमा, निम्या जैसे शब्द बोलचाल की भाषा में सनाई पड...
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Sunday, November 27, 2011

खेती भी वर्ज़िश है

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प्रा चीन समाज में कृषि-कर्म ही मूलतः श्रम का पर्याय था। यूँ काम के दायरे में बहुत सी क्रियाएँ आती हैं, मगर वह श्रम जो मूलतः रोज़ी रोटी स...
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Thursday, November 24, 2011

फ़ानूस की फ़ंतासी

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वि देशी भाषाओं से भारतीय भाषाओं में समाए शब्दों में ‘फ़ानूस’ और ‘फंतासी’ का शुमार भी होता है। फ़ानूस यानी छत से लटकता विशाल कंदील जिसम...
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Monday, November 21, 2011

शून्य में समृद्धि है…

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शू न्य की एक हक़ीकत तो क़रीब क़रीब हर पढ़ेलिखे व्यक्ति पर उजागर है कि अंकगणित की दुनिया के इस हीरो, जिसे अंग्रेजी में ज़ीरो कहा जाता ह...
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Saturday, November 12, 2011

अश्लील में ‘श्री’ की तलाश

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हि न्दी में किन्हीं विशिष्ट भावों को व्यक्त करने के लिए ‘अश्लील’ का प्रयोग होता है। ‘अश्लील’ का कोई ठोस पर्याय भी हिन्दी में नहीं है। ...
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अजित वडनेरकर
भोपाल, मध्यप्रदेश, India
बीते 30 वर्षों से पत्रकारिता। प्रिंट व टीवी दोनों माध्यमों में कार्य।
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