शब्दों का सफर
Monday, April 3, 2023

‘नाबाद’ के बहाने ‘बाद’ की बातें

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रो जमर्रा की भाषा में ऐसे अनेक शब्दों का समावेश रहता है जिनका अक्सर अन्य भाषाओं में अलग तरीके से इस्तेमाल होता है। ऐसे शब्दों के साथ उपसर...
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Friday, May 3, 2019

इंतज़ामअली और इंतज़ामुद्दीन

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हि न्दी में इन दिनों ये दो नए मुहावरे भी चल पड़े हैं। अगर अभी आप तक नहीं पहुँचे हैं तो जल्दी ही पहुँच जाएँगे। चीज़ों को संवारने, तरतीब ...
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Tuesday, June 27, 2017

‘मिट्टी’ से ‘मिट्टी’ तक ज़िंदगी का सफ़र

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मौ त जैसी अनिवार्य सचाई के लिए विश्व की अनेक भाषाओं में एक जैसे शब्द हैं। इनका विकासक्रम भी एक जैसा है और अर्थछायाओं में भी ग़ज़ब की ...
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Tuesday, May 23, 2017

सबै भूमि गोपाल की अर्थात चार पैरों में सारी दुनिया समायी

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श ब्दों का सफ़र के दौरान बीते वर्षों में अनेक भाषायी सन्दर्भों से गुज़रते हुए दिलचस्प तथ्य प्रकट हुआ है जिसे आप सबसे साझा करना चाहूँग...
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Saturday, May 13, 2017

घर का मालिक यानी पति

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दु नियाभर की भाषाओं में शब्द निर्माण व अर्थस्थापना की प्रक्रिया एक सी है। विवाहिता स्त्री के जोड़ीदार के लिए अनेक भाषाओं के शब्दों में अ...
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Friday, May 5, 2017

'फते' और 'फलास'

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उ क्त दोनों ही शब्द किसी ज़माने की राजभाषाओं के शब्द है पर देसी रंग कुछ इस अंदाज़ में चढ़ा कि अब चाहें तो इन्हें मालवी का कह लें या ...
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Saturday, February 4, 2017

चुभने-चुभाने की बातें

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क्षुब्ध, विक्षोभ जैसे शब्दों का बुनियादी अर्थ है विदीर्ण,असन्तोष आदि। क भी काँटे ‘चुभ’ जाते हैं कभी बातें चुभती हैं। चुभ / चुभना / च...
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Friday, February 3, 2017

सहेली, बरास्ता हेठी और अवहेलना

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शा न में गुस्ताख़ी के सन्दर्भ में हन्दी में ‘हेठी’ खूब प्रचलित है जिसमें अवमानना, अपमान या मानहानी का भाव है। इसी तरह तत्सम शब्दाव...
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Thursday, December 8, 2016

गुडगाँव पर ‘द्रोण’ कैमरा

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अ च्छा ख़ासा द्रोण था, घिस-घिस कर दोना रह गया। गुरु कितना ही गुरुतर रहा हो, भाषा के अखाड़े में ऐसी रगड़-घिसाई हुई कि जब हिनहिनाकर ख...
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Wednesday, December 7, 2016

हे गणमान्य !! हे गण्यमान्य !!!

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‘ग णमान्य’ और ‘गण्यमान्य’ को लेकर हिन्दी में बड़ा झमेला है। हिन्दी में शब्दकोशों को अद्यतन न करने की वृत्ति पुरानी है। सामाजिक बद...
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Saturday, October 22, 2016

महिषासुर के कितने ठिकाने !!!

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प्रा चीन भारतीय समाज में वृक्षों, जन्तुओं, नदियों की पहचान पर नामवाची संज्ञाएँ बनती रही हैं। चाहे व्यक्तिनाम हो, समूह नाम हो या स...
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Wednesday, September 21, 2016

जलकुक्कड़ और तन्दूरी-चिकन

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पि छली पोस्ट में हमने वामियों के सन्दर्भ में ‘जलकुक्कड़’ का प्रयोग किया जिस पर सफ़र के साथी प्रदीप पाराशर ने जिज्ञासा दिखाई। ‘जलकुक...
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Tuesday, September 20, 2016

बालों की दवाई, शिकाकाई, कहाँ से आई...

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सा बुन जैसी चीज़ का कभी प्राचीन भारत में चलन था या नहीं, इस पर हम अलग पोस्ट लिख चुके हैं। हाँ, त्वचा और बालों की देखभाल के देसी तरीक...
Friday, September 16, 2016

हनक यानी उन्माद

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उ त्तर प्रदेश और बिहार में 'हनक' शब्द बहुत प्रचलित है। मध्यप्रदेश में इसका बर्ताव नहीं के बराबर है। बाकी बिहार के अरवल से हरियाणा...
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अजित वडनेरकर
भोपाल, मध्यप्रदेश, India
बीते 30 वर्षों से पत्रकारिता। प्रिंट व टीवी दोनों माध्यमों में कार्य।
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