शब्दों का सफर
Sunday, May 18, 2025

आलपिन का सफरनामा #शब्दकौतुक

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चुभाने-जोड़ने की चीज़ें ▪ हिंदी में गाँव से शहर तक और बच्चों से बूढ़ों तक समान भाव से बोला जाने वाला शब्द है 'आलपिन' जो यूरोप के सु...
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Wednesday, October 23, 2024

दिवाली भी शुभ है और दीवाली भी शुभ हो

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चक्कर छोटी 'इ', बड़ी 'ई' का क्षेत्रीय प्रभाव हर साल की तरह इस बार भी मित्रों ने दीवाली/दिवाली की वर्तनी के बारे में राय जानन...
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Monday, October 7, 2024

‘आमतौर पर’ ख़ास चर्चा

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उम्मा, उम्मत, अवाम से आम तक ऐसा कुछ, जो ख़ास न हो बोलचाल की भाषा में मुहावरों से रवानी आ जाती है। भाषा ख़ूबसूरत लगने लगती है। दिलचस्प मानी प...
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Monday, April 3, 2023

‘नाबाद’ के बहाने ‘बाद’ की बातें

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रो जमर्रा की भाषा में ऐसे अनेक शब्दों का समावेश रहता है जिनका अक्सर अन्य भाषाओं में अलग तरीके से इस्तेमाल होता है। ऐसे शब्दों के साथ उपसर...
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Friday, May 3, 2019

इंतज़ामअली और इंतज़ामुद्दीन

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हि न्दी में इन दिनों ये दो नए मुहावरे भी चल पड़े हैं। अगर अभी आप तक नहीं पहुँचे हैं तो जल्दी ही पहुँच जाएँगे। चीज़ों को संवारने, तरतीब ...
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Tuesday, June 27, 2017

‘मिट्टी’ से ‘मिट्टी’ तक ज़िंदगी का सफ़र

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मौ त जैसी अनिवार्य सचाई के लिए विश्व की अनेक भाषाओं में एक जैसे शब्द हैं। इनका विकासक्रम भी एक जैसा है और अर्थछायाओं में भी ग़ज़ब की ...
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Tuesday, May 23, 2017

सबै भूमि गोपाल की अर्थात चार पैरों में सारी दुनिया समायी

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श ब्दों का सफ़र के दौरान बीते वर्षों में अनेक भाषायी सन्दर्भों से गुज़रते हुए दिलचस्प तथ्य प्रकट हुआ है जिसे आप सबसे साझा करना चाहूँग...
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Saturday, May 13, 2017

घर का मालिक यानी पति

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दु नियाभर की भाषाओं में शब्द निर्माण व अर्थस्थापना की प्रक्रिया एक सी है। विवाहिता स्त्री के जोड़ीदार के लिए अनेक भाषाओं के शब्दों में अ...
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Friday, May 5, 2017

'फते' और 'फलास'

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उ क्त दोनों ही शब्द किसी ज़माने की राजभाषाओं के शब्द है पर देसी रंग कुछ इस अंदाज़ में चढ़ा कि अब चाहें तो इन्हें मालवी का कह लें या ...
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Saturday, February 4, 2017

चुभने-चुभाने की बातें

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क्षुब्ध, विक्षोभ जैसे शब्दों का बुनियादी अर्थ है विदीर्ण,असन्तोष आदि। क भी काँटे ‘चुभ’ जाते हैं कभी बातें चुभती हैं। चुभ / चुभना / च...
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Friday, February 3, 2017

सहेली, बरास्ता हेठी और अवहेलना

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शा न में गुस्ताख़ी के सन्दर्भ में हन्दी में ‘हेठी’ खूब प्रचलित है जिसमें अवमानना, अपमान या मानहानी का भाव है। इसी तरह तत्सम शब्दाव...
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अजित वडनेरकर
भोपाल, मध्यप्रदेश, India
बीते 30 वर्षों से पत्रकारिता। प्रिंट व टीवी दोनों माध्यमों में कार्य।
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