
यह जानना दिलचस्प होगा कि न्याय की जिस देवी की आंखों पर हमेशा पट्टी बंधी होती है उस न्याय और नयनों का जन्म एक ही मूल से हुआ है। नी धातु से ही बने न्याय का मतलब नीति, नियम, कानून, इंसाफ आदि है। यही नहीं राजनीति , शास्त्र, सुशासन , सच्चाई और ईमानदारी जैसी बातें भी इसके अंतर्गत आती हैं। न्याय के अर्थ में उक्ति है ‘नियन्ति अनेन’ यानी वह प्रणाली अथवा तरीका जिससे उचित निर्णय की ओर जाया जा सके वही न्याय है।
नी धातु से बने नयः का मतलब प्रदर्शन करना ,बताना, निर्देशन करना भी है । नयः में उपसर्गों के लगने से कई नए शब्द बनें जैसे अभिनय । अभि उपसर्ग लग जाने से यहां अर्थ हुआ आंगिक चेष्टाओं का प्रदर्शन अथवा मनोभावों को नेत्रों या अन्य शारीरिक संकेतों से दिखाना। इसके बाद नायक , नायिका अथवा खलनायक शब्दों का जन्म हुआ।
नयः के साथ शासन, नीति, सिद्धांत, विचार जैसे अर्थों के चलते भी

आपकी चिट्ठियां
सफर की पिछली पांच कड़ियों बेगुन बैंगन महाराज, सरदारजी की शरारत, प्यारा कौन ? बैल, बालम या मलाई ?कै घर , कै परदेस और जवानी दीवानी से युवातुर्क तक पर सर्वश्री Udan Tashtari. दिनेशराय द्विवेदी. Dr. Chandra Kumar Jain. Ghost Buster. अरुण. मीनाक्षी .DR.ANURAG.
अभिषेक ओझा. Ashok Pande. Pratyaksha. arvind mishra. अजित वडनेरकर. Manish Kumar. Lavanyam - Antarman. डा० अमर कुमार. Smart Indian... E-Guru Maya. Kalp Kartik. Ashok Pande. Mired Mirage.श्रद्धा जैन. कुश एक खूबसूरत ख्याल.Nilotpal. PD. रंजू. ranju. बलबिन्दर. anitakumar. mohan. महेन. Arun.सजीव सारथी. Pramod Singh. महामंत्री-तस्लीम. दिलीप मंडल. SANJAY SHARMA.अभिषेक ओझा. मीनाक्षी. अभय तिवारी. Pramod Singh. दिनेशराय द्विवेदी. श्रद्धा जैन.हर्षवर्धन. Sanjeet Tripathi. मीनाक्षी. Dr. Chandra Kumar Jain. neelima sukhija arora. और डा० अमर कुमार की हौसला बढ़ानेवाली टिप्पणियां मिलीं। आप सबका सफर में बने रहने के लिए शुक्रिया।
@डॉ अमरकुमार
डॉक्टर साहेब , आपका सवाल वाजिब है और गलती मेरी है। दरअसल शब्द व्युत्पत्ति और भाषा के संदर्भ में हमेशा भाषा-परिवारों का उल्लेख आता है। भाषा वैज्ञानिकों ने भाषाओं के अध्ययन के लिए दुनियाभर की भाषाओं को कुछ परिवारों में बांटा है जिनमें से एक है इंडो-यूरोपियन लैंग्वेज फैमिली। इसे ही भारतीय यूरोपीय भाषा परिवार कहा जाता है। हिन्दी के विद्यार्थी इसके संक्षिप्त रूप "भारोपीय" शब्द से परिचित हैं । मगर यह सामान्य बात नहीं है और शब्दों का सफर विषय विशेष के लोगों के लिए नहीं बल्कि सामान्य पाठकों के ही लिए है सो गलती मेरी है। कोशिश करता हूं कि अगली किन्हीं कड़ियों में भाषा परिवारों के बारे में जानकारी दे सकूं। शुक्रिया। सफर में बने रहें।
ईतनी सटीक जानकारी देने के कारण ही ये मेरे पसंद के ब्लागों में से ऐक है, हिंदी या हिन्दी मुद्दे पर अटका था कि आपके ब्लाग ने उस पर जानकारी देकर ऐक बडी राहत दी। जानकारी के लिए धन्यवाद...जारी रखें।
ReplyDeleteएक महत्वपूर्ण शब्द विनायक छूट गया है। संभवत अधिक स्थान चाहेगा।
ReplyDeleteये भी बढिया रहा - धन्यवाद !
ReplyDeleteवाह नायिका से खलनायक, अधिनायक... विनायक तो सबके बैकग्राउण्ड में हैं ही।
ReplyDeleteनालायक भी आस-पास ही होगा!
Nayak ki nayaki se nayika ke nayanon tak... beech mein khalnayak ki upasthiti... waah!
ReplyDeleteसरसरी ही सही कई चीज़ें देख गया .आपकी काविशों और कोशिशों को देख तबियत खुश हो गयी .
ReplyDeleteपोस्ट जेहन नशीं होने की कुवत रखते हैं .दुआ यही है ,जोर-कलम और ज्यादा .कभी फ़ुर्सत मिले तो इस लिंक पर भी जाएँ और अपनी कीमती राय से नवाजें .www.shahroz-ka-rachna-sansaar.blogspot.com और www.hamzabaan.blogspot.com
जनाब आपका ब्लॉग है बहुत एतिहासिक .मुबारक हो .अल्लाह नज़र-बद से बचाए .आमीन.
दर्शन की एक परिभाषा है -
ReplyDeleteदृश्यते अनेन इति दर्शनम्.
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जानकारी अच्छी लगी.
डा.चन्द्रकुमार जैन
बहुत खूब ...पोस्ट के दो चित्र जिन्हे हमारे नयन देख रहे है और महसूस कर रहे है कि नायिका के सपनीले नयन जहाँ मन को सुकून देते है तो खलनायक के नकारात्मक भाव लिए नैन मन को विचलित कर रहे हैं...
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