Tuesday, July 14, 2026

जहाज़ किसका, रानी किसकी ?


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सद्गुरु सबद जहाज है, कोई-कोई पावे भेद।
बूंद-समंदर इक भया, किसका करूं निखेद॥
▪️विशाल आकार की नौका अथवा जलयान के लिए हिन्दी में जहाज़ जैसा कोई अन्य शब्द उतना प्रचलित नहीं है। पानी पर तैरते किसी विशालकाय वाहक की कल्पना आते ही सबसे पहले जहाज़ शब्द ही दिमाग़ में कौंधता है। फिर कौंधता है जहाज का पंछी साथ ही याद आती है गुरु के लिए जहाज की कल्पना। जहाज शब्द मूलतः अरबी का है और इससे बने जहाजी, जहाजरानी जैसे शब्द भी हिन्दी में प्रचलित हैं। नौवहन की तुलना में अरबी-फ़ारसी का युग्मपद जहाजरानी हमारे यहाँ ज़्यादा प्रचलित है। Ministry of Shipping के लिए नौवहन मन्त्रालय की तुलना में जहाजरानी मन्त्रालय ज़्यादा बरता जाता है। शब्दों का सफ़र में जानते हैं जहाज़ की कुंडली।
जहाज़ की रानी
▪️एक मित्र का प्रश्न था कि जहाज के साथ जो ‘रानी’ जुड़ा है, उसका आशय क्या सचमुच क्वीन से है ! जवाब है नहीं। विस्तार में जाने से पहले इसके पूर्वपद यानी जहाज़ पर थोड़ा रुकते हैं फिर उत्तरपद ‘रानी’ की बात करेंगे। अरबी समेत दुनिया की अनेक भाषों में जहाज़ جہاز का अर्थ विशाल परिवहन नौका है। यह बना है अरबी त्रिवर्णी क्रिया जहाज़ा यानी जीम-हा-ज़ा (ج ه ز) جَهَاز से। अनेक अनेक सन्दर्भों को टटोलने पर जो बात पकड़ में आती है वह यह कि जहाज का मूलार्थ वाहन नहीं था। यह आशय इसमें धीरे धीरे समाता गया। ज़ान प्लैट्स और उनके पूर्ववर्ती कोशकारों ने जहाज के अनेक आशय बताए हैं जैसे असबाब, साज़ोसामान, लदान, वहन, ढुलाई आदि। रज्की के अरबी व्युत्पत्ति कोश में जहाज़ा का अर्थ है सामान और प्रबन्ध।
कारोबारी दुनिया से आमद
▪️दुनियाभर की सर्वाधिक समृद्ध भाषाएँ वहीं हैं जिन्हें बरतने वाले वाचिक समुदाय व्यापार-मार्गों पर बसते थे। व्यापारिक गतिविधियाँ सिर्फ़ जिंसो की आपूर्ति का ज़रिया नहीं थी बल्कि इनकी वजह से बोली-भाषाएं भी आज तक समृद्ध होती आई हैं। अरबी भी संसार की सबसे प्राचीन भाषाओं में एक है। रेगिस्तान में बसने वाले बद्दुओं के बीच संवाद का ज़रिया रही यह ज़बान दो दर्जन से ज्यादा देशों में बोली जाती है और दुनिया की ज्यादातर भाषाओं में अरबी की कुछ न कुछ छाप ज़रूर पड़ी है। वजह है अरबी लोगों का सौदागरी और जहाज़रानी में बढ़ा-चढ़ा होना। कहीं यह न मान लिया जाए कि असबाब, साज़ोसामान, लदान, वहन, ढुलाई वगैरह जैसे आशयों से विकसित होते हुए जहाजा से ही अगर जहाज़ बनना था तो क्या अरबी में नाव के लिए कोई शब्द नहीं था! बात यह है कि अरबी में नौका के लिए अनेक शब्द है मसलन मरकब, दो, सफ़ीना, सुनबाक, ज़ौराक आदि अनेक शब्द पोत, नाव आदि के अर्थ में मौजूद है।
दुनिया जहान की चीज़े
▪️बहरहाल, पुराने दौर की अरबी में जहाज़ा में वे तमाम आशय शामिल रहे होंगे जिन्हें रोज़मर्रा की छोटी-बड़ी ज़रूरियात का साज़ो-सामान समझा जा सकता होगा। वे तमाम चीज़ें जिनका व्यापार होता है। यही नहीं, चीज़-बस्त से लेकर मशीनी उपकरण तक इसमें शामिल हैं। किसी वस्तु के अंग, उपांग, अवयव, अंश, भाग, हिस्सा आदि भी इसमें शामिल हैं। मसलन नववधु के लिए उबटन, गन्ध, इत्र, फुलेल, सुरमा, अंजन, कजरा, महावर, मेहँदी, वस्त्र, गहना, जूड़ा, गजरा जैसी चीज़े अत्यन्त आवश्यक हैं, सो जहाज़ा में इसका भी आशय है। इसे जहेज़ कहा जाता है। मसलन ऊँट की ज़ीन (लकड़ी की काठी) और उसका दूसरा साज़ो-सामान भी जहाज़ा कहलाता है। यही नहीं, अन्तिम संस्कार से जुड़ी बातें जैसे ग़ुस्ल, तख़्ता, लिफ़ाफ़ा, कमीज़, सिनाबंद, शिगाफ़, जनाज़ा आदि जहाज़ा के दायरे में थीं।
लदान, सप्लाई, आपूर्ति,
▪️तो मूल बात जो उभर रही है, वह है लदान की। माल-असबाब, साज़ो-सामान, लदान, सप्लाई, आपूर्ति, रसद आदि। आमतौर पर व्यापारिक सामान, किसी न किसी किस्म की आपूर्ति या दीगर लवाजिमा को ही कहते हैं और अरबी सहरा से चले सामान से लदे ऊँटों के काफ़िले के साथ पूरे ताम-झाम या लवाजिमे को जहाज़ा कहा जाता रहा होगा। लवाजमा का प्रयोग आमतौर पर किसी मुहिम, यात्रा या किसी अन्य प्रयोजन से की जाने वाली तैयारी के सन्दर्भ में होता है। लवाजमा में समूहवाची व्यंजना है। पुराने ज़माने के काफ़िलों और कारवाँ के साथ तो लवाजमा चलता ही था। जहाज़ा से जुड़ी ये सभी बातें बाद में सामान से लदे पोत, कई नावों को बांध कर बनाए गए बेड़े के रूप में जहाज़ के रूप में रूढ़ हुई होंगी।
नाविक, खिवैया, मल्लाह
▪️जहाज का अर्थ जलयान रूढ़ हो जाने के बाद इससे अन्य शब्द और मुहावरे भी बने जैसे जहाज़ी जिसका अर्थ सामुद्रिक, जहाज़ सम्बन्धी, दरियाई अथवा नौवहन सम्बन्धी होता है। इसके अलावा जहाज़ी उस कार्मिक को भी कहते हैं जो किसी न किसी तौर पर उसके परिचालन या अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ा है जैसे sailor नाविक, खिवैया, मल्लाह, नौसेनिक आदि। हालाँकि जहाज़ी उर्दू की ज़मीन पर बना शब्द हो सकता है क्योंकि मूल अरबी शब्द है जाहिज़। इसी कड़ी में आता है जहाज़राँ या जहाज़रान। अरबी के जहाज़ में फ़ारसी का रान प्रत्यय बनने से जहाज़रान यानी जहाज़ चलाने वाला के आशय वाला एक नया शब्द उसी तरह बना जैसे जहाज़ी बना।
जहाज़रान और जहाज़रानी
▪️अब करते हैं जहाज़रानी के दूसरे सर्ग यानी रानी पर चर्चा। फ़ारसी में कर्ता के आशय वाले कुछ प्रत्यय हिन्दी में भी प्रचलित हैं जैसे गर (कारीगर, जादूगर, बाजीगर आदि), दार (पहरेदार, खरीददार आदि)। इसी तरह एक सर्ग है राँ अथवा रान। भाषाविदों के अनुसार राँ/रान का रिश्ता फ़ारसी क्रिया रफ़्तन से है। भाषाविदों का अनुमान है कि यह अवेस्ताई ह्रप या हर्प से बनी है जिसका रिश्ता संस्कृत की सृप/सर्प् से है। संस्कृत में सर्पति यानी धीरे धीरे बढ़ना, फ़िसलना, रेंगना आदि। भारत-ईरानी भाषा समूह में स और ह में बदलाव की वृत्ति है। सर्प से हर्प रूप सहज ही मिलता है और इसीलिए ज़ेंद में हर्प / हृप जैसे रूपों की बात प्लैट्स और उनके पूर्ववर्ती भाषाविद करते हैं। ज़ेंद में हर्प / हृप के अगले रूपों में ह का भी लोप हो जाता है और अल्पप्राण ‘प’, महाप्राण ‘फ़’ हो जाता है। इस तरह हर्फ का विकास पहलवी में रफ़्तन हो जाता है। वैसे सर्पति की तलना हर्पति से की जा सकती है।
रौ, रवा, रवानी, रवानगी
▪️बहरहाल, रफ़्तन में जाना, प्रस्थान, गति जैसे भाव है। यही नहीं, इसमें धीरे-धीरे (रफ़्ता-रफ़्ता) का आशय भी है। रफ़्तन का कारणवाची रूप रॉन्दन है। इससे ही विकसित होता है ‘राँ’ या ‘रान’ जिसमें संचालन, प्रबन्धन, व्यवस्थापन जैसे आशय हैं। फ़ारसी ‘रौ’, ‘रवा’, ‘रवानी’ या ‘रवानीगी’ जैसे गतिवाची शब्द भी इसी कड़ी से जुड़े हैं। रौ में बहना, रवानी आना, रवा होना जैसे वाक्य-प्रयोग हिन्दी में खूब चलते हैं जिनमें बात गति या चलन की है। इसीलिए जब किसी संज्ञा के साथ रानी प्रत्यय जुड़ता है तो कर्ता का भाव पैदा हो जाता है जैसे कामरान, हुक्मरान (हुक्मराँ) आदि। हुक्मरान का अर्थ होता है आदेश देने वाला यानी शासक। इससे बनता है हुक्मरानी यानी शासन करना। इसी तर्ज़ पर जहाज़रान (जहाज़राँ) का अर्थ होगा जहाज़ चलाने वाला। इससे बने जहाज़रानी का अर्थ होगा जहाज़ चलाना, संचालन करना, जल-परिवहन, नौवहन आदि।
अभी और बाकी है। दिलचस्प विवरण पढ़ें आगे...


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