Thursday, February 28, 2008

चटाई से सोफे पर बिराजी कतार...

र घर की बैठक में सबसे जरूरी समझी जाने वाली चीज अगर कोई है तो शायद सोफा । हिन्दी में बोला-समझा जाने वाला एक बेहद आम अंग्रेजी शबद। इतना आम कि अंग्रेजी-हिन्दी के सबसे मशहूर शब्दकोश के रचनाकार फादर कामिल बुल्के ने इसमें सोफा (sofa) शब्द को जगह तो दी है मगर इसके अर्थ के स्थान पर देवनागरी में सिर्फ सोफा लिख कर काम चला लिया
है । जाहिर है किसी वैकल्पिक शब्द को लिखने की आवश्यकता उन्होंने नहीं समझी। जबकि ज्ञानमंडल हिन्दी शब्दकोश में इसका अर्थ बताया गया है - गद्देदार पुश्त और बिस्तरे वाला आसन जिस पर बैठा या लेटा जा सके । हिन्दी में बेशक सोफा लफ्ज अंग्रेजी से आया मगर अंग्रेजी मे भी ये विदेशी जबान से गया। स्पेनिश भाषा से अंग्रेजी में गए सोफा लफ्ज की स्पेन में आमद अरबी से हुई। मोटे अंदाज के मुताबिक करीब डेढ़ हजार साल पहले जब अरब आक्रमणकारियों ने भूमध्यसागरीय इलाके मे धावे मारने शुरू किए और सन् 700 से 1200 ईस्वी के दरम्यान स्पेन पर कब्जा जमा लिया तब अरबों के साथ ही यूरोप में एक नए एशियाई मूल के शब्द ने प्रवेश किया।

( इस पड़ाव का ज्यादा आनंद लेने के लिए देखें शब्दों के सफर की ये कड़ियां- सफेदपोश नहीं , उजले होते हैं सूफी और सफर में सूफ़ी , कभी ज़मीनी तो कभी रूहानी)

सोफा शबद अरबी जबान के सूफा (suffa)या सफ्फा (saffa) लफ्ज से बना है जिसका मतलब होता है पंक्ति या मनुश्यों की कतार। इसका एक और मतलब भी है जिसके मायने होते हैं लंबी चटाई। मगर इसे ये अर्थ मिला हिब्रू भाषा के सिप्पा(sippa) से। मूल रूप से ये शब्द आया आरमेइक ज़बान(सीरिया, इराक आदि क्षेत्रों की पुरानी भाषा) के सिप्पेटा(sippeta) से। जाहिर है पुराने जमाने से ही मेहमाननवाजी का महत्वपूर्ण तरीका आगंतुक को चटाई या दरी पर बैठाना होता था। धीरे धीरे मेजबान की हैसियत और मेहमान के ओहदे के मुताबिक आतिथ्य के तौर तरीके, बैठक की व्यवस्थाओं में बदलाव आया और सिप्पेटा नाम की लंबी चटाई ने डेढ़ फुट ऊंचे एक ऐसे आरामदेह आसन ने ले ली जिसे सारी दुनिया अब सोफा कहती है।

आपकी चिट्ठी-

सफर के पिछले तीन पड़ावों पर क्रमशः आभा, पद्मनाभ मिश्र, दिनेशराय द्विवेदी, प्रमोदसिंह, ज्ञानदत्त पाण्डेय, आशा जोगलेकर, मीनाक्षी, तरुण, संजय, आशीष, चंद्रभूषण, अनिताकुमार, जोशिम-मनीष,ममता और बालकिशन, लावण्या, अनूप शुक्ल और रवीन्द्र प्रभात की कुल बत्तीस टिप्पणियां मिली। आप सबका आभारी हूं।

@आभा-
आप पहली बार ब्लाग पर नज़र आईं , अच्छा लगा। आपको सफर पढ़ना अच्छा लगता है जानकर खुशी हुई मगर मुझे अपने बारे में कोई मुगालता नहीं है। पंडितों के किये काम पर ही आगे बढ़ रहा हूं। अलबत्ता मेरा मूल उद्धेश्य यही है कि विषय की दुरूहता से हटकर सामान्यजन के लिए पठनीय सामग्री तैयार करू। बस, इसी कोशिश का नाम है शब्दों का सफर ।
@
बालकिशन-
हुजूर, ब्लाग पर अब क्या कापीराइट की बातें करें ? जीवनभर दूसरों से ही लिया है। जो है ,वो सबसे शेयर कर रहे हैं। आप इस सामग्री का क्या उपयोग करना चाहते हैं, नहीं जानता , मगर इतनी सदाशयता की उम्मीद ज़रूर करता हूं कि मेरे नाम और शब्दों के सफर का हवाला ज़रूर देंगे। वैसे , शब्दों का सफर आप सब पुस्तकाकार भी देखें, ऐसे प्रयास चल रहे हैं।
@
चंद्रभूषण-
हवा के बारे में उपयोगी जानकारी के लिए धन्यवाद चंदूभाई। सफर के आप जैसे हमराही भी हैं ये सोचकर सीना फूल जाता है। हवा के सेमेटिक संदर्भों पर मैं लिखने वाला था मगर एक तो पोस्ट लंबी हो रही थी , दूसर, बजट के चक्कर में आजकल कुछ ज्यादा ही व्यस्तता है। इसीलिए किसी अन्य पड़ाव के लिए उसे मुल्तवी कर दिया। इस धातु से जुड़े कुछ और दिलचस्प शब्द कतार में हैं।

12 कमेंट्स:

रजनी भार्गव said...

सोफ़ा श्ब्द की उत्त्पति काफ़ी रोचक है। हमेशा की तरह
एक दिलचिस्प सफ़र।

सुजाता said...

बहुत शुक्रिया !
वर्ना अब तक हम सोफा को अंग्रेज़ी का ही समझते रहते :-)

Udan Tashtari said...

अरे, सोफा को सारी जिन्दगी अंग्रेजी शब्द मानते रहे!! आपने ज्ञानचक्षु खोल दिये..बहुत आभार. अति रोचक जानकारी, जारी रखें.

anuradha srivastav said...

वाकई कई शब्दों की व्युतपत्ति को लेकर संशय था जो कि आपके द्वारा दी गई जानकारी से दूर हो रहा है।धन्यवाद.........

anitakumar said...

अजीत भाई हमेशा की तरह आज की क्लास भी रोचक है, ये पिद्दी सा आराम्दायक सोफ़ा जिसे हम रोज तोड़ते रह्ते है अपने नाम में इतना लंबा सफ़र छुपाए बैठा है पता ही नहीं था। अब आप की पुस्तक का भी इंतजार है, मेरी प्रति अभी से बुक कर दिजिए…।:)

सागर नाहर said...

सोफा की तरह दराज, अल्मारी, मेज, दवात जैसे कई सब्द शायद हिन्दी के नहीं है और कई अंग्रेजी के भी नहीं पर हम दोनों भाषाओं में धड़ल्ले से इन भाषाओं में उन शब्दों का प्रयोग करते हैं।
सब्दों के सफर का यह पड़ाव काफी रोचक रहा। मजा आ रहा है नित नये शब्दों के बारे में जानना!
अनिताजी की कॉपी बुक हो गई हो तो दूसरी प्रति मेरी भी बुक कर लें, आपके हस्ताक्षरों सहित।
:)

mamta said...

आज की जानकारी यानी सोफा तो और भी रोचक लगी । शुक्रिया।

Sanjeet Tripathi said...

रोचक रहा सोफे का यह सफर॰॰॰॰॰

भई एक प्रति हमारे लिए आरक्षित रहेगी न

Dr. Chandra Kumar Jain said...

DARASAL, AAP SHADON KE SAFAR KO GYAN KEE NAI DAGAR BANA RAHE HAIN.YAH MANAVATA KE PRATI HAMARE SHABDA SANSAAR KE ASEEM ANUGHAH KA ADBHUT PRATISAMVEDAN HAI.
BAVZOOD ISKE
AAPKEE VINAMRATA SACHMUCH SHLAGHNEEYA HAI.
MAIN IS SAFAR KA SAHYATREE ,AAPKE BHAGEERATH AVDAAN KE LIYE APNEE AKSHAR SHUBHKAMANA VYAKTA KARTA HUN.MUDRIT SANSKARAN KEE PRATIKSHA RAHEGEE.

पल्‍लव क. बुधकर said...

सोफा शब्‍द के बारे में जानकारी बहुत रोचक है। ऐसे कई शब्‍द हैं जो हिन्‍दी में इतने घुलमिल गए हैं कि पता ही नहीं लगता कि यह किसी और भाषा से आए हैं।
एक जिज्ञासा है - एक शब्‍द है 'कतर', जैसे 'पर कतरना'। मतलब हुआ काटना, अब अंग्रेज़ी में काटने के संदर्भ में ही उपयोग होता है 'कटर'। मराठी में कैंची को कतरनी/कतरणी बोलते हैं।
यह कतर-कटर-काट-कतरनी सब एक ही परिवार के लगते हैं।
सफ़र के किसी पड़ाव में इस काटपीट पर रोशनी डालिएगा।

Lavanyam - Antarman said...

बढिया जानकारी देते हैँ आप अजित भाई !
मेरी प्रति भी हस्ताक्षर सहित
अग्रिम बुकीँग खाते मेँ रख लेँ !
एक अनुरोध :
शक्तिपीठ -- पर कुछ बतायेँ
-- लावण्या

मीनाक्षी said...

रोचक जानकारी ... लेकिन हमने मजलिस ए फिरंगी और मज़लिस सुना है...शायद अरब के देशज शब्द हों.. इस पर हो सके तो बताइए..

नीचे दिया गया बक्सा प्रयोग करें हिन्दी में टाइप करने के लिए

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