Tuesday, December 2, 2008

चम्पा, नीलोफर और नील कमल

फारसी के नीलोफ़र और संस्कृत के नीलोत्पल की समानता पर गौर करें। दक्षिण की नीलगिरि पर्वतमाला नीलाभ ऊंचाइयों की वजह से प्रसिद्ध है।
रंगों का संसार यूं तो सतरंगी होता है और सात रंग मिलकर हजारों किस्म के रंगों का निर्माण करते हैं। ऐसे में किसी एक को चुनना बेहद मुश्किल बात है। इसके बावजूद सर्वाधिक लोकप्रिय किन्हीं तीन रंगों की बात की जाए तो यकीनन नीला रंग भी उनमें से एक होगा। प्रकृति में भी हरे रंग की छटा के बाद अगर किसी अन्य रंग का प्राधान्य है तो वह नीला रंग ही है। यह बना है संस्कृत के नील से जिसका जन्म हुआ है नील् धातु से। भारतीय ध्वज में चाहे नीला रंग न हो मगर स्वतंत्रता संग्राम का नील से बहुत गहरा रिश्ता है।

नीला रंग चाहे जितना खुशनुमा हो मगर संस्कृत में नील का अर्थ नीले के साथ-साथ काला, सुरमई भी होता है इसीलिए संस्कृत में सुरमे को नीलांजनम् या नीलांजना भी कहा जाता है। संस्कृत में बादल को अभ्र कहा जाता है। यही अभ्र फारसी में अब्र हो जाता है। स्याह काले बादल को संस्कृत-हिन्दी में नीलाभ्र कहते हैं। यहां नीला का अर्थ काला ही है। काले नमक के लिए भी नीलकम् शब्द है। नीले रंग से तात्पर्य गहरे नीले रंग से ही है।

नील दरअसल एक पौधे से निकाली जाती है। प्राचीनकाल से ही नीले रंग के लिए नील के पौधे का इस्तेमाल होता रहा। संस्कृत में नील का पौधा नीलिका अथवा नीली कहलाता है। भारत में नील पूर्वी प्रदेशों में होती है खासतौर पर बिहार, बंगाल, उड़ीसा आदि राज्यों में। अरबी व्यापारी भारतीय नील खरीदते थे और यूरोपीय मुल्कों में बेचते थे। भारतीय मलमल और मसालों की तरह नील भी पश्चिमी देशों में मशहूर थी। अग्रेजों ने जब कोलकाता में कोठियां बनवाई तब ईस्ट इंडिया कंपनी मुख्यरूप से नील का व्यापार ही करती थी। अंग्रेजों को इसीलिए निलहे साहब कहा जाता था। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम नील का बड़ा महत्व है। बिहार के नेपाल से सटे चम्पारन जिले में नील की भरपूर खेती होती थी। इस स्थान का नाम चम्पक वृक्षों की बहुतायत की वजह से चम्पक+अरण्य=चम्पकारण्य पड़ा जो घिसते घिसते चम्पारन हो गया। चम्पक या चम्पा के वृक्ष में पीले रंग के सुगंधित फूल होते हैं जो केश श्रंगार के काम आते हैं। दिलचस्प बात यह कि प्राचीनकाल में चम्पा के पीले फूलों की वजह से प्रसिद्ध चम्पारन आधुनिक युग में नील के नीले फूलों की वजह से दुनियाभर में मशहूर हुआ। गांधीजी ने दक्षिण अफ्रीका से लौटने पर जब नील किसानों पर निलहे साहबों के अत्याचार की खबर सुनी तो उन्होने चम्पारन की यात्रा की और अग्रेजों के शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाई। यह मुहिम ही दरअसल गांधी के स्वतंत्रता संघर्ष के लिए मील का पत्थर बनीं।

नील को अंग्रेजी में इंडिगो कहते हैं। इसका संबंध सहज रूप से इंडिया यानी भारत से ही है। इंडिगो बना है ग्रीक भाषा के इंडिकोन और इंडिकोस से जिसका अर्थ था नील का पौधा। यह इंडिया से ही बना। इंडिया ग्रीक भाषा के इंडस से बना है । दरअसल सिन्धु नद का ग्रीक उच्चारण ही इंडस है।

... प्राचीनकाल से ही नीले रंग के लिए नील के पौधे का इस्तेमाल होता रहा। संस्कृत में नील का पौधा नीलिका अथवा नीली कहलाता है...

स्पेनी और डच ज़बानों में इंडिकोन हुआ इंडिगो । चूंकि अंग्रेजो से भी पहले कोलकाता में पुर्तगाली अपनी कोठियां बना चुके थे। डच भाषा से ही पुर्तगाली में इंडिगो शब्द गया और फिर अंग्रेजी में समा गया। संस्कृत नील ही फारसी–उर्दू में भी प्रचलित है।

हुमूल्य रत्नों में नीलम भी मशहूर है। उसे यह नाम नीली आभा की वजह से ही मिला है। नीलम को नीलमणि, नीलकांत या नीलरत्न भी कहते हैं। हरित आभा वाले नीलमणि के लिए फारसी में फ़ीरोज़ी शब्द है। बोलचाल में फ़ीरोज़ी रंग यानी नीला रंग ही समझा जाता है। नीलमणि को उर्दू में फीरोज़ा ही कहते हैं। उर्दू-फारसी में श्वेतकमल या कुमुदिनी के लिए नीलोफ़र शब्द है। यूं तो कुमुदिनी सफेद रंग की होती है मगर नीलोफर का अर्थ हुआ नीलकमल। संस्कृत में नीलोफर यानी नीलकमल के लिए नीलोत्पल शब्द है। यह बना है नील+उत्पल से । हालांकि संस्कृत के उत्पलम् शब्द में कमल के साथ साथ नीलकमल का भी भाव है। मगर नीलोत्पल शब्द से यह और स्पष्ट हो जाता है। फारसी के नीलोफ़र और संस्कृत के नीलोत्पल की समानता पर गौर करें।

क किस्म के रसायन को नीलाथोथा या नीला तूतिया कहा जाता है। रसायन विज्ञान में इसे कॉपर सल्फेट कहते हैं। नीलाथोथा दरअसल एक प्रकार का विष होता है। यह बना है नील+तुत्थः से। संस्कृत में तुत्थः का मतलब होता है पत्थर, खनिज, आंख का सुरमा , दवा आदि। गौर करें कि विष के सेवन से शरीर पहले नीला पड़ना शुरु होता है फिर काला होता है। नील शब्द में गहरा नीला और काला रंग समाहित हैं। शिव ने समुद्रमंथन के दौरान अपने कंठ से गरलपान अर्थात विषपान किया था इसी वजह से उन्हें नीलकंठ भी कहा जाता है। नील शब्द में समाहित गहरा नीला या काला का भाव नीलकंठ शब्द से एकदम साफ हो रहा है। शिव का एक नाम है नीलग्रीव।

क्षिण भारत में पश्चिमी घाट की शांत चोटियों पर खूबसूरत हिल स्टेशन स्थित है। वनाच्छादित श्रेणियां, अपनी नीली आभा के कारण कुछ क्षेत्रों में ब्लू-माउंटेन के रूप में जानी जाती हैं। इन दक्षिणी श्रेणियों पर स्थित उदगमंडलम(ऊटी), कोडाइकनाल और येरकाड खूबसूरत झीलों, पेड़-पौधों से युक्त रास्तों, जलप्रपातों, चट्टानी एवं शानदार दृश्यों से भरे हुए हैं। इन्हें नीलगिरि पर्वत भी कहा जाता है।

8 कमेंट्स:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

नील के बिना तो नेताजी की खादी भी उजली न दिखती।

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

जी हाँ यहाँ भी केंटकी प्रांत के परबत ब्लू रीज mountain कहलाते हैं - नील रंग ३ मूल रंगों में गिना जाता है - बहुत सारी जानकारियाँ समेटी आपने - & Blue Denim made from the Indigo plant color is America's national costume --

अनामदास said...

बहुत ही अच्छी पोस्ट, बहुत ज्ञानवर्धक, साधुवाद.

Gyan Dutt Pandey said...

नीला तो मेरा प्रिय रंग है। और याह पोस्ट भी प्रिय लगी।

अभिषेक ओझा said...

नीलिमा लड़कियों का एक नाम भी होता है ! :-)

anitakumar said...

किसी ने देखा नहीं लेकिन हमेशा भगवान की कल्पना नीले रंग में की जाती है, क्युं

Dr. Chandra Kumar Jain said...

यह भी अनूठा
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डॉ.चन्द्रकुमार जैन

Baljit Basi said...

मेरे ख्याल में नीलाथोथा में 'नीला' की व्याख्या इसके शरीर पर पड़ने वाले नीले रंग के प्रभाव से करना दूर की बात है. सीधी सादी बात है कि नीलाथोथा का रंग ही नीला होता है. इसे अंग्रेजी में vitriol कहा जाता है और यह शब्द vitrium से बना है जो एक ऐसा पौदा है जिसे नील की तरह नीला रंग बनाया जाता था.इसको woad भी कहा जाता है और यह मध्य एशिया और योरप में होता है. नील की ही तरह इस के रंग को भी 'इंडिगो' कहा जाता था. यूरप के कई देशों में भारतीय नील के कंपीटीशन से वोअड उद्योग को बचने के लिए कानून पास किये गए थे.

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