Wednesday, December 17, 2008

पति की बादशाहत...

... पातशाह ने पादशाह का चोला पहना और बादशाह बन बैठा। तुर्की ज़बान को ये रास नहीं आया सो उसने कुछ काट-छांट करते हुए इसे पाशा और बाशा बना दिया...
ति और परमेश्वर में तो रिश्तेदारी है मगर पति और बादशाह में क्या रिश्तेदारी है ? दरअसल पति-परमेश्वर शब्दयुग्म में भावविलास है। यह मुहावरा है । मगर पति और बादशाह सहोदर हैं। एक ही मूल से जन्मे हैं। पति शब्द का मूल अर्थ है स्वामी, प्रभु, ईश्वर आदि। गौरतलब है ये सभी अर्थ संरक्षण, पालन की ओर इशारा कर रहे हैं। यूं पति और पत्नी दोनों ही खुद को कभी बादशाह-बेगम से कम नहीं समझते हैं और कभी गुलाम से भी बदतर समझने लगते हैं। मन की रुचि जैती जितै , तित तैती रुचि होय....

ति अर्थात विवाहिता स्त्री का संगी, भर्तार, शौहर, हसबैंड वगैरह वगैरह। पति शब्द बना है संस्कृत और इंडो-यूरोपीय भाषा परिवार की पा धातु से जिसमें रक्षा करना, पालन करना, बचाना, देखभाल करना जैसे भाव हैं। पा उपसर्ग लगने से परिपालक, परिपालन, प्रतिपालन आदि शब्द बने हैं जिनमें शासक, शासन, रक्षण जैसे भाव ही समाहित हैं। पति शब्द का अर्थ मालिक ,शासक, राजा ही होता है क्योंकि वह प्रजा को संरक्षण प्रदान करता है। कन्या जब तक अविवाहित है तब तक उसका संरक्षण पिता करता है। गौरतलब है कि पिता शब्द भी उसी पा धातु से बना है जिसमें संरक्षण और देखभाल का भाव है, जिससे पति शब्द जन्मा है मगर किसी कोश या संदर्भ में पिता शब्द की व्याख्या इस भाव से नहीं मिलती। अलबत्ता पा से ही बने पालक या पाल शब्द का अर्थ राजा, शासक, संरक्षक के साथ पिता भी मिलता है। विवाहिता के संगी को पति कहने के पीछे भाव यही है कि पिता के घर संरक्षित कन्या के सारे दायित्व अब उसने उठा लिये हैं। वही उसका पालक है। पति शब्द की व्याप्ति राष्ट्रपति, कुलपति, अधिपति जैसे शब्दों में उसके संरक्षणकर्ता होने का ही बोध कराती है।

1911 में जार्ज पंचम भारत आया था,तब के दस्तावेजों में उसे पादशाह ही लिखा गया है.

संस्कृत की पा धातु जस की तस ईरान की प्राचीन भाषा अवेस्ता में भी इसी संरक्षण के भाव के साथ मौजूद है। यही नहीं , अवेस्ता में पति शब्द का अर्थ भी संरक्षक ही है। पा का प्रसार यूरोपीय भाषाओं में भी मिलता है जैसे ग्रीक में पोमा यानी आवरण, पीमो यानी मार्गदर्शक लैटिन में पोती यानी ताकतवर, शक्तिशाली आदि। अवेस्ता से पुरानी फारसी में भी पति शब्द बरकरार रहा और शाह शब्द से जुड़ कर पातशाह > पादशाह होते हुए बादशाह में ढल गया। तुर्की में आटोमन शासकों द्वारा सम्मानित नागरिकों को दी जाने वाली प्रसिद्ध उपाधि रही है पाशा जिसका मतलब था अधिकार संम्पन्न, कुलीन। तुर्की में पाशा नाम धारी अनेक सेनाधिकारी या राज्यपाल हुए है। यह पाशा दरअसल पादशाह ही है जो पादशाह > पात्शाह > पाश्शा > होते हुए पाशा के संक्षिप्त रूप में ढल गया । भारत में भी पाशा उपनाम अनजाना नहीं है। पाशा का ही दूसरा रूप बाशा भी है। हैदराबाद की निज़ामशाही में बाशा उपाधियां दी जाती थीं। इसका अरबी रूप बासा है। भारत में आज भी प्रमुख शहरों में पत्थरों के खुत्बे दिख जाएंगे जो 1911 में जार्ज पंचम की भारतयात्रा की स्मृति में अंग्रेजी शासन और रजवाड़ों ने लगवाए थे। इन खुत्बों में जार्ज पंचम को पादशाह ही लिखा गया है। पंजाबी में भी पादशाह शब्द चलता है। सिख धर्म में ईश्वर को सच्चा पादशाह कहा गया है।

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9 कमेंट्स:

Dr. Chandra Kumar Jain said...

पति अर्थात विवाहिता स्त्री का संगी, भर्तार,
शौहर, हसबैंड वगैरह वगैरह।

अजित जी,
विवाह के कुछ वर्षों के बाद
पति कुछ-कुछ वगैरह-वगैरह
जैसे हो जाते हैं....है न ?
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ये पति वाला एपिसोड भी
पते की बातें कह रहा है.
आप तो हमारे सफ़र के
बाशा ही हैं भाई.... बाँट रहे हैं
शब्द-ज्ञान की गाढी कमाई....
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शुक्रिया
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुन्दर शब्द ज्ञान प्राप्त हो रहा है ! आपका बहुत बहुत आभार !

राम राम !

cmpershad said...

पति और पहलवान -- एक ही बात हुई
पत्नी और पहेली - एक ही बात हुई।
इसी तरह प धातु से कई शब्द निकलेंगे। बनाते ।

विवेक सिंह said...

बेचारे पति को खूब बादशाह बनाया आपने :)

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

वाह! शब्दों के पातशाह!

एस. बी. सिंह said...

आपको पढ़ कर बस वाह ! कहने को दिल करता है.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

पोप शब्द कैसे बना अजित भाई ? :)
और पालक पति को पालक खिलाई जाती है
ये भी सच है :)
...."प" शब्द की महिमा न्यारी !!

विष्णु बैरागी said...

आपकी पोस्‍ट से कुछ बातें याद आईं । लेकिन उससे पहले एक जिज्ञासा - पति के पर्याय के लिए 'भर्तार' उचित होगा या 'भरतार' ? 'भर्ता' से अनायास ही 'बैंगन-भर्ता' मानस में चला आया ।
'पादशाह' का उपयोग भारत में, मेरी जानकारी के अनुसार, 1911 में जार्ज पंचम के भारत आने से पहले भी होता रहा है । याद कीजिए - शिवाजी महाराज की 'हिन्‍दू पादशाही ।'
'पाशा' से याद आया, एक जादूगर हुआ करते थे - गोगीया पाशा जिनका तकिया कलाम 'गिलि, गिलि गो' 'उस समय' लोगों की जबान पर बस गया था ।

hem pandey said...

शब्दों के पोस्टमार्टम में आप माहिर हैं.

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