Saturday, January 31, 2009

धीरज, धर्म, मित्र अरु नारी...[सिक्का-16]

red line भक्ति के जरिये यदि प्रभु मिलें तो वह सर्वोच्च धन है। सांसारिक जीवन में स्त्रीधन, पुत्र धन, मानधन, पशुधन(गोधन) भूधन जैसी उपमाएं धन का महत्व ही बताती हैं।wealth
सु संस्कारों से बड़ी पूंजी कुछ नहीं। संस्कार शब्द का प्रयोग कई अर्थों में होता है मगर सार रूप में समझें तो चिंतन और कर्म के दायरे में मानवीय व्यवहार ही संस्कार होते हैं। किसी का आभार मानना भी सुसंस्कार है। यूं तो हम भारतीय किसी का शुक्रगुज़ार होना और प्रशंसा करना कम जानते हैं तो भी इसके लिए शब्दकोशों में धन्यवाद शब्द मिलता है। कभी कभी इसका प्रयोग भी कर लिया जाता है। निश्चित ही कृतज्ञता ज्ञापन पाने वाला सुखद अनुभव से धनी हो जाता है। विपन्न हो जाने के भय से ही शायद इसे न देने का कुसंस्कार पनप रहा है।

न्यवाद में देवनागरी के वर्ण की महिमा व्याप रही है। वर्ण में रखने वाला, धारण करने वाला जैसे भाव समाहित हैं। ब्रह्मा, कुबेर, भलाई, नेकी, संस्कार, धन-दौलत जैसे भाव भी इस वर्ण से जुड़े हुए हैं। इसी कड़ी में धन् धातु से बना है धन्य  जो बड़ा मांगलिक शब्द है। दौलतमंद, मालदार, भाग्यवान, ऐश्वर्यवान, उत्तम, श्रेष्ठ जैसे अर्थ इसमें निहित है। कृतज्ञता जताने, प्रशंसा-स्तुति के लिए धन्यवाद शब्द इसी मूल से जन्मा है।

न की महिमा न्यारी है। धन अर्थात दौलत, सम्पत्ति, रुपया-पैसा आदि। धन की श्रेणी में वह सब कुछ आ जाता है जो मनुश्य को प्रिय है संस्कार, रिश्ते, धर्म, काल-जिसमें आयु शामिल है आदि। तरुणी अथवा युवा स्त्री के लिए संस्कृत में धनी शब्द है। युवावस्था में आयु-कलश भरा हुआ नज़र आता है। बढ़ती उम्र में यह घड़ा जब रीतता जाता  है तब उम्र के बहीखाते पर नज़र पड़ती है और हम बौखला जाते हैं। अक्सर बढ़ापे में लोग खुद को लुटा-पिटा महसूस करते हैं, चाहे वे धनवान हों। रिश्ते के महत्व के तौर पर स्त्री के लिए उसका पति धणी है तो पति के लिए उसकी स्त्री। धन की देवी लक्ष्मी हैं और इसीलिए गृहस्वामिनी को भी लक्ष्मी का दर्जा ही दिया जाता है। मनुष्य का स्वभाव है कि वह प्राप्ति में, अर्जन में सुख पाता है। जो प्राप्त होता है, अर्जित होता है वही उसका धन है। भक्ति के जरिये यदि प्रभु मिलें तो वह सर्वोच्च धन है। सांसारिक जीवन में स्त्रीधन, पुत्र धन, मानधन, पशुधन (गोधन), भूधन जैसी उपमाएं धन को ही रेखांकित करती हैं। धन् से बने धनम् में ये तमाम अर्थ निहित हैं। अमीर, सम्पन्न व्यक्ति के लिए धनिक, धनवान, धनिन, धनेश जैसे शब्द बने हैं। सेठ के साथ धन्ना शब्द भी इसीलिए लगाया जाता है। आयुर्वेद के जन्मदाता का नाम धन्वन्तरि संभवतः आयु के महत्व को ही बताता है। समुद्रमंथन के अंत में आयु को निरपेक्ष बना देने वाले तत्व अर्थात अमृत से भरे कलश को लेकर उनका समुद्र से प्रकट होने वाला प्रसंग इस संदर्भ में महान प्रतीक है।

merrill-symbol-bull_7548 ... धन के भौतिक रुप को ही अन्तिम सत्य  समझना मूर्खता है...धन के कई रूप हैं। बल्कि जीवन स्वयं ही धन है…

मृत्यु के लिए निधन शब्द के मूल में भी धन शब्द ही है। आप्टे कोश में वरामिहिरकृत बृहत्संहिता के हवाले से कहा गया है-निवृतं धनं यस्मात् यानी धन का न रहना। समझा जा सकता है निर्धनता को मृत्यु से भी बदतर मानने के पीछे मनुष्य के पास प्राचीनकाल से ही कटु अनुभव रहे होंगे। गरीबी हो या अचानक पैदा हुआ अर्थाभाव, निर्धन होते ही मृत्यु का विकल्प चुनने की मनुष्य में सहज वृत्ति होती है। इसके मूल में है जीवन के अन्य विविध आयामों में धन की व्याख्या न करना या धन को सिर्फ भौतिक सम्पत्ति से ही तौलना। जीवन को भी धन की उपमा दी गई है। गोस्वामी तुलसीदास ने “धीरज,धर्म मित्र अरु नारी। आपदकाल परखिये चारी।।” जैसी उक्ति में धन के इन चार प्रकारों की आजमाइश की सलाह दी है जिनमें धैर्य और धर्म सबसे सबसे बड़ा धन हैं।   निर्धन से ही बना है मृत्यु का पर्याय निधन। शब्दकोश में निधन के उपसंहार, परिसमाप्ति,अंत जैसे अर्थ भी बताए गए हैं जो यही सिद्ध भी करते हैं।
र्म के नज़रिये से भी धन की व्याख्या है। शिक्षक के लिए उसके उसकी पोथियां, दौलतमंद के लिए उसकी बहियां, वीर के लिए उसका बल-आयुध और कार्मिकों के लिए सेवाधन ही सबसे बड़ी पूंजी है। दुनियाभर की संस्कृतियों में धनुष ही प्राचीनतम हथियार रहा है। धनुष भी धन् धातु से ही बना है। पुराने समय में प्रायः हर वर्ग के लोग धनुर्विद्या में पारंगत होना चाहते थे। रामेश्वरम् के पास धनुष्कोटि तीर्थ का नाम भी इससे ही जुड़ा है।

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25 कमेंट्स:

Udan Tashtari said...

हम भी धन्य हुए यह जानकर..आपका धन्यवाद.

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

ध से धन्यवाद , ध से धीरू ,ध से धनी [?] धीरे धीरे खुशी महसूस हो रही है ध की महिमा जान कर

विवेक सिंह said...

ये ध तो बहुत धाँसू निकला ! धीरू जी को बधाई !

sanjay vyas said...

धन के साथ धान्य का मेल भी मिलता है.
आभार,ज्ञान धन इस तरह लुटाने का.और इसके कम होने का खतरा भी नही:)

Dr. Chandra Kumar Jain said...

बिल्कुल सही कहा आपने
जीवन स्वयं धन है.....
और मुझे कहना है कि
वो धन्य हैं जो इस
जीवन-धन का ऋण चुकाते हैं !
========================
आभार
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

धीरज,धर्म मित्र अरु नारी। आपदकाल परखिये चारी।।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
बाबा जी का धन्यवाद
इस कोमन सेन्स ज्ञान के लिये और आपका भी :)
एक प्रश्न रह गया !
पुरुषोँ की परख कब और कैसे की जाये ?
उस पर भी प्रकाश डालियेगा --
स्नेह,
- लावण्या

purnima said...

बहुत खूबसूरत है आपका ब्लॉग...........

purnima said...

वसंत पंचमी की शुभकामनाएं

दिगम्बर नासवा said...

ध, धन, धान्य, धर्म, निर्धन की व्याख्या इतनी सुंदर न सोची जा सकती थी और न कहीं पढी जा सकती थी. आपने इतनी सुन्दरता और इतने रोचकता से इसको बांधा है की बयान करना सम्भव नही. प्रणाम है आपको

बसंत पंचमी की बहुत बहुत बधाई

Anil Pusadkar said...

धन्य हो जाते है हम आपको पढ कर्।

Gyan Dutt Pandey said...

घना धन बरस रहा है जी पोस्ट में।

विष्‍णु बैरागी said...

धन की धमक और धनी की धमकी। व्‍यावहारिक सचाई के अतिरिक्‍त और कोई अन्‍तर्सम्‍बन्‍ध है इनमें?

अभिषेक ओझा said...

धन धान्य की जानकारी से परिपूर्ण इस पोस्ट के लिए धन्यवाद !

Rajeev (राजीव) said...

धरा, धरती, धरणी की उत्पत्ति भी शायद इसी से हो? पर क्या धमक, धमकी पर भी यही व्याख्या लागू हो सकती है?

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