Thursday, January 15, 2009

मिस्री पेपर और बाइबल [पर्चा-2]

चीन में निर्मित काग़ज़ और पपायरस में तकनीकी फर्क इतना ही था कि मिस्री काग़ज़ को मनचाहा आकार नहीं दिया जा सकता था जबकि चीनी काग़ज़ को हर आकार में बनाया जा सकता था
दु निया भर में पेपर शब्द इस्तेमाल होता है। इसका मूल अर्थ काग़ज़ है मगर हिन्दी में पेपर paper शब्द दो खास अर्थों में इस्तेमाल होता है। ज्यादातर लोग पेपर का इस्तेमाल अखबार (न्यूजपेपर) के लिए करते हैं। पेपर का दूसरा सबसे ज्यादा प्रयोग प्रश्न-पत्र के अर्थ में होता है। इसके अलावा औसत हिन्दुस्तानी सामान्य अर्थ में पेपर के लिए काग़ज़ लिखना या बोलना पसंद करता है। पेपर के विकल्प के रूप में पर्चा, पत्र (समाचार पत्र, चिट्ठी-पत्री ) जैसे शब्द भी खूब बोले जाते हैं। पेपर शब्द का अखबार के रूप में इस्तेमाल तो बीती कुछ सदियों से होने लगा है मगर ईसाइयों के प्रमुख धर्मग्रंथ बाइबल के मूल में भी यही पेपर शब्द झांक रहा है।

पेपर शब्द हिन्दी में अंग्रेजी से आया है। अग्रेजी में इसकी व्युत्पत्ति फ्रैंच भाषा के शब्द पैपियर से मानी जाती है जो मूल रूप से लैटिन के पपायरस से जन्मा माना जाता है जो ग्रीक भाषा के पपायरोस(papyros) से पैदा हुआ है। भाषा विज्ञानियों का मानना है कि मूल रूप से पपायरोस इजिप्शियन अर्थात मिस्री भाषा का शब्द है और सेमेटिक भाषा परिवार से ताल्लुक रखता है न कि यूरोपीय भाषा परिवार से। ग्रीक पपायरोस का मतलब ऐसी वनस्पति से है जिससे काग़ज़ बनता है। नील नदी के कछारों में उगने वाली यह वनस्पति बहुउपयोगी मानी जाती है। काग़ज़ बनाने के अलावा इसका ओषधीय प्रयोग भी होता था।

पायरोस के जन्म सूत्र भाषा विज्ञानियों ने सेमेटिक भाषा परिवार की मिस्री भाषा में तलाशे है। ज्यादातर लोग समझते हैं कि इजिप्ट यानी मिस्र में अरबी बोली जाती है। सुविधा के लिए इसे इजिप्शियन-अरेबिक ज़रूर कहा जाता है मगर यह सेमेटिक परिवार की एक अलग भाषा है। यहूदी भाषा विज्ञानी अव्राहम स्थैल और अर्नेस्ट क्लैन पपायरस शब्द को मिस्री मूल का ही मानते हैं। उनके मुताबिक इसकी व्युत्पत्ति पै-प-इयर(pa-p-yeor) अर्थात नील नदी से संबंधित या नील नदी का। गौरतलब है कि मिस्री और हिब्रू में नील नदी के लिए इयर( yeor) नाम है। पा का अभिप्राय वनस्पति से भी है। जाहिर है पै-प-इयर(pa-p-yeor) यानी पैपियर ही ग्रीक भाषा का पपायरोस हुआ जिसका अर्थ भी एक किस्म की मिस्री वनस्पति से बना काग़ज़ था।

तिहास प्रसिद्ध फिनीशियाई व्यापारियों द्वार ईसा से पांच हजार वर्ष पूर्व स्थापित प्रसिद्ध बंदरगाह शहर बिब्लस (अरबी नाम जबेल जो मूल फिनीशी गभेल का रूपांतर हो सकता है) को यह नाम इसी वजह से मिला था क्योंकि इसी बंदरगाह पर भारी मात्रा में मिस्र से पपायरोस लाया जाता था और उसका अन्य स्थानों को लदान होता था। बिब्लस को यहीं पर एक और भी अर्थ मिला पपायरोस अर्थात काग़ज़ बनानेवाली वनस्पति की भीतरी परत । बिब्लस का एक अन्य अर्थ हुआ पुस्तक। गौरतलब है कि कुछ लोगों का मानना है कि बिब्लस ग्रीक उच्चारण है और मूल फिनीशी शब्द गभेल का बिगड़ा रूप भी हो सकता है। ग्रीक में बाइबल की व्युत्पत्ति का आधार यही बिब्लस है जिसका मतलब होता है पुस्तक। बरसों बाद ईसा मसीह के प्रवित्र संदेशों को जब ग्रंथ की शक्ल मिलने लगी तो उसे ग्रीक भीषा के

फिनीशियों द्वारा बसाए पांच हजार साल पुराने बंदरगाह [ऊपर] को बिब्लस नाम मिला एक मिस्री वनस्पति से जिसे पपायरस कहा जाता था और जिसकी आंतरिक परत से ईसापूर्व करीब पांच हजार साल पहले से काग़ज़ बनाया जाता था [दाएं]

बिब्लस के आधार पर बिब्लिआ, और फिर बिब्लिका कहा गया जिसने बाद में बाइबल का रूप लिया। गौरतलब है कि ग्रंथ सूची या संदर्भ सूची के लिए बिब्लियोग्राफी शब्द भी इसी मूल से जन्मा है।

पेपर के अर्थ में हिन्दी- उर्दू में पर्चा शब्द प्रचलित है। पेपर की ही तरह पर्चा भी अखबार और प्रश्नपत्र के अर्थ में प्रयोग होता है। अखबार के लिए पर्चा शब्द हिन्दी में किसी ब्रिटिश राज के दौरान ज्यादा प्रचलित था। अब पर्चा का प्रयोग इश्तेहारी पर्चे के तौर पर ही होता है जिसे पैम्फलेट कहते हैं। पर्चा parcha का छोटा रूप पर्ची होता है। पर्चा शब्द बना है फारसी के पर्चः से जिसका मतलब हुआ काग़ज़ का छोटा पुर्जा, किसी के हाथ भेजी जाने वाली चिट्ठी(दस्ती ख़त), अख़बार, प्रश्न पत्र या रपट आदि। इस पर्चे में फारसी का ‘पर’ झांक रहा है। पर यानी पंख। यह इंडो-ईरानी भाषा परिवार का शब्द है। संस्कृत में वर्ण अपने में उच्चता का भाव समेटे है। उड़ान का ऊंचाई से ही रिश्ता है। परम, परमात्मा जैसे शब्दों से यह जाहिर हो रहा है। पर में भी यही उच्चता लक्षित हो रही है। संस्कृत की पत् धातु का अभिप्राय है उड़ना, फहराना, उड़ान आदि। द्रविड़ परिवार की कोत भाषा में पर्न या पर्नद का मतलब भी उड़ना ही है। द्रविड़ और फारसी में एक जैसा रूपांतर यह भी स्थापित करता है कि किसी ज़माने में द्रविड़ भाषाओं का प्रसार सुदूर उत्तर पश्चिम तक था।

पर्चः का रिश्ता पर्चम से भी जुड़ रहा है जिसका अर्थ है झंडा, झंडे का कपड़ा। पर्चम किसी भी राष्ट्र, समाज या संगठन का सर्वोच्च प्रतीक होता है। पताका का अर्थ भी ध्वज ही होता है। पर्चम parcham और पताका एक ही मूल के हैं और दोनों का संबंध उड़ान से, लहराने से, फहराने से है। गौरतलब है कि फारसी में पार्चः का अर्थ भी कपड़ा ही होता है। पत्ते के लिए संस्कृत में पत्रम् शब्द है। पत्र में उड़ने का भाव भी है और गिरने का भी। डाल से टूटने के बाद पत्ता पहले उड़ता है फिर गिरता है। प्राचीन भारत में वृक्षों की छाल पर लिखा जाता था जैसे भोजपत्र और ताड़पत्र। मूलतः इनकी छाल इतनी महीन होती है कि यह पत्र की श्रेणी में ही गिनी जाती है इसीलिए यह लिखावट के लिए भी अनुकूल होती है। यह भी दिलचस्प है कि भारत मे वृक्षों की बाहरी छाल पर लिखने के सफल प्रयोग हुए वहीं धुर पश्चिम स्थित मिस्र में पपायरस की भीतरी परतों को जोड़ कर काग़ज़ के टुकड़े बनाए जाते रहे।

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14 कमेंट्स:

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

शब्द की उत्पत्ति और हर भाषा मे उनका प्रयोग आपके द्वारा पता चल ही रहा है . आपका यह सार्थक प्रयास किसी बिगबैंग से कम नही .
पेपर के सफर मे आपके साथ .

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

पेपर शब्द का मूल जान कर अच्छा लगा। आप का यह उद्योग लगातार वसुधैव कुटुंबकम का स्मरण कराता है।

शिरीष कुमार मौर्य said...

शब्दों का ये सफ़र अब एक विराट मिथकीय संसार में जाने लगा है। अब यह अधिक रोमांचक और वैश्विक हो चला है - आपको बधाई भाई !

Amit said...

बहुत अच्छी जानकारी दी सर आपने.....

विष्णु बैरागी said...

पेपर के बारे में आपने बहुत ही अच्‍छी जानकारियां दी हैं।

Dev said...

आपको लोहडी और मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ....

विवेक सिंह said...

नए फोटू में धाँसू लग रहे हैं सर जी !

आपका कुछ पता नहीं कहाँ से कहाँ जोड देते हैं . आँखें फटी मुँह खुला रह जाता है !

कल को पता चले 'वडनेरकर' शब्द 'अजित' का ही बिग़डा हुआ रूप है तो कोई आश्चर्य नहीं :)

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर और ज्ञानवर्धक जानकारी.

रामराम.

विनय said...

बहुत बढ़िया

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आप भारतीय हैं तो अपने ब्लॉग पर तिरंगा लगाना अवश्य पसंद करेगे, जाने कैसे?
तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

अभिषेक ओझा said...

नील नदी के किनारे वाली मिस्री वनस्पति से पेपर तो इतिहास की किताब में पढ़ी थी. बाकी सब तो हमेशा की तरह नया ही है अपने लिए.

Gyan Dutt Pandey said...

पेपर से कागज कैसे रूपान्तरित हुआ?

Dr. Chandra Kumar Jain said...

ये एपिसोड तो और भी
उम्दा है...अनोखी जानकारी
के लिए आभार...बार-बार !
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डॉ.चन्द्रकुमार जैन

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

मकर सँक्रात गुजरा है -तिल गुड खायेँ -
ठँड से भी बचाव और मिठास भी ..
और ऐसी ज्ञानवर्धक पोस्ट लिख रहीये

अजित वडनेरकर said...

@ज्ञानदत्त पांडेय
पेपर और कागज़ में जन्म का कोई रिश्ता नहीं ज्ञानदा अलबत्ता स्वाद का ज़रूर है। काग़ज़ चीनी मूल का है और पेपर मिस्री मूल का। तो जाहिर है इसमें चीनी और मिस्री की मिठास होगी। अपन ने कभी काग़ज़ खाकर नहीं देखा। जिन्हें बचपन में इसे खाने की आदत रही होगी वे बता सकते हैं। वैसे काग़ज़ के चीनी मूल की कथा पिछली कड़ी में बताई जा चुकी है।

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