Tuesday, June 19, 2012

थप्पड़ की रसीद या रसद की ?

Receipts

पा वती या ‘बिल’ के लिए एक आम शब्द है ‘रसीद’ । यह फारसी का है मगर हिन्दी में ‘पावती’ शब्द बहुत कम इस्तेमाल होता है और ‘रसीद’ ज्यादा । हालाँकि रसीद में पावती का भाव अधिक है । पावती यानी प्राप्ति अर्थात जिसे पा लिया जाए । पावती का बिल के अर्थ में भाव है भुगतान मिलने की सूचना । यह सूचना बिल की शक्ल में आपको सौंपी जाती है । मूलतः रसीद इंडो-ईरानी भाषा परिवार का शब्द है और इसकी व्याप्ति भारोपीय भाषा परिवार की कई भाषाओं में देखी जा सकती है । रसीद में मूलतः पहुँचने या प्राप्त होने की क्रिया निहित है । ‘रसीद’ बना है फ़ारसी की क्रिया ‘रसीदन’ से जिसमें पाने, पहुँचने का भाव है । गए बिना कहीं भी कैसे पहुँचा जा सकता है? पहुँचना और पाना गतिवाचक क्रियाएँ हैं और रसीदन में गति का भाव ही खास है ।
विभिन्न संदर्भों को देखने से पता चलता है कि ‘रसीद’ शब्द में बुनियादी तौर पर वैदिक ध्वनि ‘ऋ’ ( जो एक शब्द भी है ) की महिमा नज़र आती है । देवनागरी का ‘ऋ’ अक्षर दरअसल संस्कृत भाषा का एक मूल शब्द भी है जिसका अर्थ है जाना, पाना । जाहिर है किसी मार्ग पर चलकर कुछ पाने का भाव इसमें समाहित है । ‘ऋ’ की महिमा से कई इंडो यूरोपीय भाषाओं जैसे हिन्दी, उर्दू, फारसी अंग्रेजी, जर्मन वगैरह में दर्जनों ऐसे शब्दों का निर्माण हुआ जिन्हें बोलचाल की भाषा में रोजाना इस्तेमाल किया जाता है । हिन्दी का ‘रीति’ या ‘रीत’ शब्द इससे ही निकला है । ‘ऋ’ का जाना और पाना अर्थ इसके ऋत् यानी रीति रूप में और भी साफ हो जाता है अर्थात् उचित राह जाना और सही रीति से कुछ पाना । हिन्दी संस्कृत का जाना-पहचाना ऋषि शब्द देखें तो भी इस की महिमा साफ समझ में आती है । ‘ऋ’ से बनी एक धातु है ‘ऋष्’ जिसका मतलब है जाना-पहुँचाना । इसी से बना है ऋषि जिसका शाब्दिक अर्थ तो हुआ ज्ञानी, महात्मा, मुनि इत्यादि मगर मूलार्थ है सही राह पर ले जाने वाला । फारसी के ‘रशद’ या ‘रुश्द’ जैसे शब्द जिसका अर्थ है सन्मार्ग, दीक्षा और गुरू की सीख । शब्दकोशों में इन्हें अरबी का बताया गया है, मगर ख्याता भाषाविज्ञानी और आलोचक डॉ रामविलास शर्मा के मुताबिक ये फ़ारसी से अरबी में गए हैं और का विकास ही हैं । इसी से बना ‘रशीद’ जिसके मायने हैं राह दिखानेवाला । ‘राशिद’ भी इससे ही बना है जिसके मायने हैं ज्ञान पानेवाला । यही नही ‘मुर्शिद’ यानी गुरू में भी इसी ‘ऋ’ की महिमा है ।
‘पावती’ के अर्थ में ‘रसीद’ शब्द में इसी ‘ऋष्’ की अर्थछाया नज़र आती है । जॉन प्लैट्स के कोश में फ़ारसी के ‘रस’ का विकास क्रमशः पहलवी रश और ज़ेंद के राश से हुआ है । ये शब्द वैदिक धातु ‘ऋष्’ के समतुल्य हैं । ईरान के भाषाविज्ञानी और खगोलशास्त्रज्ञ मोहम्मद हैदरी मल्येरी लिखते हैं कि फ़ारसी के प्राच्य रूपों में यह ‘रसा’ है जो वैदिक शब्द ‘अर’ से आया है जिसमें चक्रगति, परिक्रमा, भ्रमण जैसे भाव हैं । मोनियर विलियम्स के अनुसार यह ‘अर’ भी ‘ऋ’ से ही आ रहा है । हिन्दी में ‘आरी’ उस दाँतेदार यन्त्र को कहते हैं जिससे कठोर सतह को काटा जाता है । आमतौर पर इससे लकड़ी ही काटी जाती है। ‘आरी’ में यही ‘अर’ है । रहँट के मूल में भी अर है जो अरघट्ट से आ रहा है । इसे समझने के लिए किसी गरारी लगे यंत्र के चक्कों में बनें दाँतों पर गौर करें । संस्कृत में इसके लिए ही ‘अर’ शब्द है जिसके मूल में ‘ऋ’ धातु है । ‘ऋ’ में मूलतः गति का भाव है। जाना, पाना, घूमना, भ्रमण करना, परिधि पर चक्कर लगाना आदि । गरारी के दाँतों में फँसी शृंखला घूमते हुए यन्त्र के चक्के लगातार घूमते रहते हैं । सी ‘रस’ से ‘रसाई’ शब्द भी बना है जिसमें पहुँच का ही भाव है जैसे “ग़ालिब तक अपनी रसाई कहाँ ?” उर्दू का ‘रसाँ’ शब्द प्रत्यय की तरह इस्तेमाल होता है जैसे ‘चिट्ठीरसाँ’ यानी पत्रवाहक या पत्र पहुँचाने वाला । पावती के अर्थ में रसीद में रुक्का, टिकट, सील भी है जिसमें लगने, चस्पा होने, जड़ने, चिपकने, मिलने की निशानी का भाव है । इसी भाव को अभिव्यक्ति मिलती है जब किसी के गाल पर ‘थप्पड़ रसीद’ किया जाता है । गाल पर हथेली के निशान दरअसल पावती ही है जो साबित करती है कि सामने वाले को उसके किए की सज़ा मिल चुकी है ।
फ़ारसी के ‘रसीद’ और अंग्रेजी के ‘रिसीट’ शब्दों में ग़ज़ब का ध्वनिसाम्य और अर्थसाम्य है मगर इन दोनों के जन्मसूत्र अलग-अलग हैं । अंग्रेजी के ‘रिसीट’ ( receipt ) में भी बुनियादी तौर पर पाने , प्राप्त करने का आशय है इसका आधार रिसीव है जो बना है लैटिन के रेसपिअर recipere से । इसका अर्थ है लेना, पाना । लैटिन के रेसपिअर में री + सिपेअर हैं । री अर्थात पुनः, फिर और सिपेअर यानी प्राप्त करना । इस तरह लैटिन के रेसपिअर का भूतकालिक रूप होता है रिसेप्टा recepta जिसमें प्राप्त हो चुकने का भाव है । इसके एंग्लो-फ्रैंच रूप से का लोप होकर receite बना । अंग्रेजी की वर्तनी में की मौजूदगी बनी रही मगर उच्चारण फ्रैंच प्रभावित रहा अर्थात रिसीट हुआ । आज हिन्दी में अंग्रेजी का रिसीट और फ़ारसी का रसीद दोनों शब्द बेहद प्रचलित हैं । गौरतलब है कि मरीज़ का मुआयना करने के बाद डॉक्टर जो पर्चा ( प्रेस्क्रिप्शन ) लिखते हैं उस पर “Rx” चिह्न दर्ज़ करते हैं जिसका भाव यही रहता है कि मरीज़ को देख कर उसके लिए उपचार-विधि लिखी जा चुकी है । यह जो नुस्खा है , यही डॉक्टर द्वारा मरीज़ को दी गई प्राप्ति है । यह  मूलतः  recipe का संक्षेपीकरण है । कहने की ज़रूरत नहीं कि पाक-विधि के लिए आज हिन्दी में ज्यादातर प्रयुक्त रेसपी शब्द भी यही है जिसमें नुस्खा या विधि का भाव है । 
फ़ारसी की रसीदन क्रिया से ही निकला है एक और जाना-पहचाना शब्द जिसका इस्तेमाल फौजी शब्दावली में ज्यादा होता है , वह है ‘रसद’ । फौजी राशन या कच्ची खाद्य सामग्री जो सैनिकों में बराबर बाँटी जाती है । आमतौर पर फौज के लाव-लश्कर में रसद सबसे महत्वपूर्ण सामग्री होती है । ‘रसद’ में पाने का भाव यहाँ भी स्पष्ट है । आहार वह है जिसे उदरस्थ किया जाए मगर रसद वह कच्ची सामग्री है जिससे आहार तैयार किया जाता है । रसद में नून, तेल, लकड़ी सब कुछ शामिल है । जॉन प्लैट्स के कोश में रसद के गल्ला, राशन, खाद्यान्न, आपूर्ति, राशन-भत्ता, हिस्सा, कोटा, अंश, प्राप्त, आयात, राजस्व, खाद्य भण्डार जैसे अर्थ शामिल हैं ।

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7 कमेंट्स:

यादें....ashok saluja . said...

लाभदायक जानकारी ...... की पावती पायें!
आभार!

आशा जोगळेकर said...

ऋ से कितने शब्दों की उपज । पावती मराठी में खूब प्रयोग होता है ।
हर लेख एक शोधपत्र ।

सुज्ञ said...

जिस 'ऋ' शब्द-पूर्वज को हम भूलते जा रहे है वह तो अधिसंख्य शब्दों का जनक है. 'अर' शब्द की अर्थवत्ता नें मेरे कईं संशयों का समाधान कर दिया. आभार इस आलेख के लिए

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

बहुत सारी जानाकारियाँ देने वाला आलेख।
आश्चर्य कि रसीद और रिसीप्ट दोनों एक दूसरे के उलट हैं लेकिन पर्याय के रूप में प्रयुक्त हो रहे हैं।

प्रवीण पाण्डेय said...

यह रसीद भी हमारी ही निकली, वाह..

अजय कुमार झा said...

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