Tuesday, December 28, 2010

जिन्न का जनाज़ा और जीनियस

abook-002_thumb1_thumb6दिल्ली के प्रगति मैदान में शनिवार से पुस्तक मेला शुरू हो चुका है। सफ़र के जो पाठक इस मौके पर वहाँ जाने की सोच रहे हैं, वे कृपया राजकमल प्रकाशन के स्टाल पर ज़रूर जाएं और शब्दों का सफ़र के प्रकाशित क़िताबी रूप को भी ज़रूर देखें। हो सके तो ख़रीदें भी।
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भूत वह नहीं है जो आमतौर पर समझा जाता है। हिन्दी में भूत का आम अर्थ है प्रेत, पिशाच, मृतात्मा, अतृप्त आत्मा, पारलौकिक शक्ति आदि। हिन्दी मे एक अन्य शब्द भी चलता है जिन्न जिसका अर्थ भी भूत-प्रेत, पिशाच या अदृष्य आत्मा होता है। ऐसा माना जाता है कि सत्कर्म करनेवाले मनुष्य को मृत्यु के उपरान्त मोक्ष प्राप्त हो जाता है मगर पापी मनुष्य की आत्मा मायाजाल से मुक्त नहीं हो पाती और संसार चक्र में ही भटकती रहती है जिन्हें मोटे तौर पर भूत, पिशाच, प्रेत या जिन्न कहा जाता है। जिन्न मूल रूप से सेमिटिक भाषा परिवार का शब्द है और बरास्ता अरब-फ़ारसी यह हिन्दी में दाखिल हुआ। जिन्न बना है j-n-n या g-n-h से जिसमें छिपना, ढकना, गुप्त, अदृष्य होने जैसे भाव है। इसके साथ ही इसमें आवरण या खाल का भाव भी है। इस धातु से कई सेमिटिक परिवार की भाषाओं में बहुत से शब्द बने हैं। गौरतलब है कि सेमिटिक परिवार में मूलरूप से वर्ण में बदलता है। फ़ारसी-उर्दू-हिन्दी में जिसे हम जमाल उच्चारते हैं वह दरअसल अरबी में गमाल है सो जिन्न के बारे में बात करते हुए हम इसके j-n-n या g-n-h दोनों रूपों को ध्यान में रखें। j-n-n या g-n-h हालाँकि सेमिटिक धातु है मगर कहीं न कहीं इसका रिश्ता भारोपीय भाषा परिवार से भी जुड़ता है।
नाज़ा हिन्दी का जाना-पहचाना और खूब इस्तेमाल होने वाला लफ़्ज़ है। मूल रूप में यह जनाजः है। विसर्ग का रूपान्तर अक्सर की मात्रा में होता है अतः हिन्दी उर्दू में यह जनाजा हो जाता है। इसका एक अन्य रूप जिनाजः भी है जिससे इसकी जिन्न से रिश्तेदारी प्रकट होती है। गौर करें j-n-n धातु में निहित भावों पर जिसमें ढकने, अदृष्य होने या आवरण का भाव है। जनाज़ा का अर्थ होता है कफ़न में लिपटा शव या कपड़े में लिपटी लाश। उस ताबूत को भी जनाज़ा कहते हैं जिसमें रखकर शव को दफ़नाने ले जाया जाता है। आवरण का भाव यहाँ स्पष्ट हो रहा है। अक्सर हिन्दी क्षेत्रों में जनाज़ा का अर्थ शवयात्रा से लगाया जाता है। जनाज़ा निकलना यानी शवयात्रा। दरहक़ीक़त इसमें शव को कब्रस्तान ले जाने का भाव है यानी कफ़न या ताबूत में बंद शव को दफ़न करने के लिए ले जाने की क्रिया। इसी तरह j-n-n से बने जिन्न के पीछे जो धार्मिक भाव है उसके अनुसार जिन्न वह प्राणी है जिसका जन्म अग्नि से होता है और जो अदृष्य है। अरबी पौराणिक कथाओं के अनुसार यह देवदूतों या शैतानों से निचले क्रम की आत्माएं होती हैं जो आग या हवा से जन्म लेती हैं और इन्सानी रूप ले सकती हैं। इसके बावजूद ये हैं अलौकिक ही और इन्हें मूलतः मनुष्य की शरीर से निकली अनिष्टकारी शक्ति या आत्मा के रूप में ही देखा जाता है। अदृष्य होने के भाव पर गौर करें। वैसे आत्मा के शरीर रूपी आवरण में ढके होने से भी इसके धातु आधार की पुष्टि होती है। अरबी में इसके जिन्न, जिन्नी या जिन रूप भी प्रचलित हैं। जिन का बहुवचन जिन्न या जिन्नात होता है। भूत-प्रेतों से सम्बन्धित के लिए जिन्नाती शब्द है और जिन्नी का अर्थ है भूत-प्रेतों को वश में रखनेवाला। जनाज़ा शब्द कई भाषाओं में है जैसे इंडोनेशियाई में यह जेनाज़ाह है तो स्वाहिली में जेनेजा, तुर्की में सेनेज़े है। जिन्न अब अंग्रेजी में भी जिनी के रूप में है।
रब समाज में जिन्नों को प्रेरक आत्माओं के तौर पर भी देखा जाता है और माना जाता है कि कवि-कलाकारों से अपूर्व कार्य कराने में जिन्नी ताक़तों का हाथ होता है। अलिफ़लैला की कथाओं के जरिए जिन्नों को अरबी लोककथाओं का हिस्सा बनने का मौका मिला और फ़ारस से लेकर अरब और सीरिया तक के लोकसाहित्य में जिन्न विशिष्ट पात्रों के रूप में रूबरू
Genius... अवतारी पुरुष का रिश्ता लोक और परलोक दोनों से होता है इसलिए उसमें असामान्य शक्तियाँ भी प्राप्त होती हैं जिन्हें दैवीय शक्ति कहते हैं। किसी समस्या का निदान दरअसल कठिनाई से आवरण का हटना ही है। बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा से समाज को संकटों से उबारते रहे हैं। इनकी बुद्धि से हल हुए कार्यों को लोग चमत्कार समझते थे। ...
होते हैं। अलादीन के पास जो चिराग़ था, अगर उसमें जिन्न बंद न होता तो दुनिया आनेवाली पीढ़ियों में जिन्न एक गै़बी दुनिया के एक दिलचस्प क़िरदार के तौर पर इतना मक़बूल हरगिज़ न हुआ होता।  हिन्दी में भूत चढ़ना का अर्थ भूताविष्ट होना होता है। इसमें बुरी आत्मा से ग्रस्त होना भी शामिल है और अतिमानवीय ऊर्जा से किसी काम में जुटना भी है। भूत की तरह काम करना का अर्थ ही सामान्य व्यक्ति से ज्यादा काम करनेवाला होता है। निश्चित ही कलाकार की कला ही उसे सामान्य से अलग करती है। अगर विशिष्ट कर्म को जिन्नों या भूतों की देन मान लिया गया तो आश्चर्य क्या? यूँ भी मनुष्य की इच्छा अतिमानवीय कार्य करने की रही है और इसी वजह से वह तंत्र मंत्र के जरिए भूत-पिशाच सिद्धि के जतन करता है। क़िस्से कहानियों में प्रतापी सम्राटों नें अतींद्रिय शक्तियों के लिए शिव की सिद्धियाँ प्राप्त की थीं। शिव को भूतनाथ इसीलिए कहते हैं क्योंकि वे स्थूल और सूक्ष्म जगत के स्वामी है। मनुष्य स्थूल जगत का जीव है जबकि आत्माएँ सूक्ष्म जगत के जीव हैं।
अंग्रेजी का एक शब्द है जीनियस जिसका अर्थ है किसी कार्य में प्रवीण, अत्यधिक प्रतिभावान, कुशाग्र, तीक्ष्ण बुद्धिवाला वगैरह। इस जीनियस का रिश्ता भी जिन्न से जुड़ता है। अंग्रजी का जीनियस मूलतः भारोपीय भाषा परिवार का शब्द है और लैटिन के genius से बना है जिसमें एक ऐसी अलौकिक आत्मा का भाव है जो सर्वव्यापी, सर्वज्ञ है। इसमें संरक्षक, ईश्वर, विधाता आदि का भाव है। इसी अर्थ में कालांतर में ईश्वरीय गुणों से युक्त व्यक्ति को अवतारी पुरुष कहा जाने लगा। अवतारी पुरुष का रिश्ता लोक और परलोक दोनों से होता है इसलिए उसमें असामान्य शक्तियाँ भी प्राप्त होती हैं जिन्हें दैवीय शक्ति कहते हैं। किसी समस्या का निदान दरअसल कठिनाई से आवरण का हटना ही है। बुद्धिमान व्यक्ति हमेशा से समाज को संकटों से उबारते रहे हैं। इनकी बुद्धि से हल हुए कार्यों को लोग चमत्कार समझते थे। आमतौर पर हवा से कुछ पैदा करना ही सबसे बड़ा चमत्कार रहा है। इसे ही ग़ैबी या दैवी ताक़त कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल किन्हीं कलाबाजोयों के ज़रिए चतुर लोग बाद में करने लगे। ज्ञान, बुद्धि और बल के जरिए ही व्यक्ति किसी समूह में नेतृत्व प्राप्त करता है। जीनियस की अर्थवत्ता पहले इसी रूप में थी। बाद में सर्वज्ञ अथवा कुशाग्र के रूप में इसके मायने सिमट गए।
भारोपीय मूल धातु gen से बना है जीनियस जिसमें पैदा करने, होने, उत्पन्न करने का भाव है। जीनियस में यही पैदा करने का भाव पहले था। एक ऐसा व्यक्ति जो नैसर्गिक प्रतिभा का धनी हो। यानी जो किसी भी समस्या का हल ढूंढ निकाले। इस gen का रिश्ता ही संस्कृत धातु जन् से जुड़ता है। जिन्न में जिस तरह अदृष्य होने का भाव प्रमुख है, वही बात कुछ अलग ढंग से शून्य से कुछ उत्पन्न करने में, पैदा होने में, जन्म लेने में नज़र आती है। देवनागरी के वर्ण में उत्पन्न, वंशज, अवतीर्ण या पैदा होने का भाव है। संस्कृत की जन् धातु में पैदा होना, उत्पन्न होना, उगना, उठना, फूटना, होना, बनना, निर्माण-सृजन ( जन्म के संबंध में ), रचा जाना, परिणत होना जैसे अर्थ छुपे हैं। जन् से ही बना है जीव अर्थात प्राणी। जीव वह है जिसका जन्म हुआ है। जन् धातु रूप का ही रूपांतर अवेस्ता में ज़ात होता है। हिन्दी का जन, जनता जैसे शब्द भी इसी कड़ी में आते हैं। अंग्रेजी के जेनरेशन, जेनरेटर, जेनरिक जैसे शब्दों समेत यूरोपीय भाषाओं की शब्दावली को इस धातु ने समृद्ध किया है। हिन्दी का जीवन और फारसी का ज़िंदगी इसी शृंखला में हैं। अरबी-फारसी में महिला के लिए एक अन्य शब्द है ज़न जिसकी रिश्तेदारी इंडो-ईरानी भाषा परिवार के जन् शब्द से है जिसमें जन्म देने का भाव है। ज़नानी या ज़नान जैसे रूप भी प्रचलित हैं। संस्कृत में उत्पन्न करने, उत्पादन करने के अर्थ में जन् धातु है। इससे बना है जनिः, जनिका, जनी जैसे शब्द जिनका मतलब होता है स्त्री, माता, पत्नी। जिससे हिन्दी-उर्दू के जन्म, जननि, जान, जन्तु जैसे अनेक शब्द बने हैं। जन् में उगने, उत्पन्न होने के भाव पर ध्यान दें तो स्पष्ट होता है कि उगना या उत्पन्न होना अपने आप में किसी छाया, पृष्ठभूमि या आंतरिकता से बाहर आना है।  
अगली कड़ी-मजनूँ की औलाद और दीवाना 
-जारी
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10 कमेंट्स:

एस.एम.मासूम said...

एक अचछा लेख , भाई जिन्न और आत्मा या भूत प्रेत मैं फर्क है.सामाजिक सरोकार से जुड़ के सार्थक ब्लोगिंग किसे कहते

JAGDISH BALI said...

Informative one.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

अजित भाई, हिन्दी, संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं में भूत शब्द के अनेक अर्थ हैं। एक भूत तो आपने बता ही दिया है। एक भूत पदार्थ को इंगित करता है जिस से भौतिक शब्द बना है। एक भूत का अर्थ गुजरा हुआ है। यदि वह समय है तो भूत काल हो गया। भूत हो जाने का अर्थ ही यह है कि कोई वस्तु या प्राणी था जो अब नहीं है।
पंचतत्वों को महाभूत कहा गया है। मुझे लगता है भूत शब्द को ले कर एक पोस्ट कम से कम और होनी चाहिए।

अजित वडनेरकर said...

दिनेशभाई,
भूत पर विस्तार से विचार अगली कड़ी में है। सफर जारी है।

प्रवीण पाण्डेय said...

जिन्न व जीनियस में कोई तो अन्तर होना चाहिये।

अजित वडनेरकर said...

अन्तर तो बड़ा है प्रवीण भाई,
हमने तो सिर्फ रिश्तेदारी बताई है:)

Dr. Chandra Kumar Jain said...

आभार.... साथ ही 'शब्दों का सफ़र' के
पुस्तकाकार प्रकाशन के लिए हार्दिक बधाई.
=================================
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

Baljit Basi said...

'जीनियस का रिश्ता भी जिन्न से जुड़ता है।' जिन्न को आप ने अरबी मूल j-n-n से जोड़ा है जब कि जीनियस को भारोपी मूल gen से, यह तालमेल कैसे बैठा, आप ने स्पष्ट नहीं कीया. दरअसल जब अलफ्लैल्ला का अनुवाद फ्रेंच में हुआ तो अनुवादकों ने अरबी जिन्न को ध्वनि और अर्थ के लिहाज से लातीन génie के सामान पाया, इस लिए इसका अनुवाद génie के रूप में कीया. अंगरेजी ने फ्रेंच से लेकर इसको आगे genie बनाया. génie आगे genius से व्युत्पति हुआ था .इस तरह अरबी jinn और अंगरेजी genie की एकरूपता संयोगी है.

अजित वडनेरकर said...

धन्यवाद बलजीत भाई,
आपने सही शब्द लिखा है, संयोगी।
मेरा आशय सिर्फ संयोगी रिश्ते से ही था जिसे मैं स्पष्ट नहीं कर सका।
ध्यान दिलाने का शुक्रिया।

अभय तिवारी said...

सही है.. बस जिन्न का सम्बन्ध जिन्न [जीम, नून, नून] धातु से है.. न कि जिनह [जीम, नून, हे] धातु से..

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