Friday, February 26, 2010

फोकट के फुग्गे में फूंक भरना

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मु फ्त या व्यर्थ के अर्थ में फोकट phokat शब्द हिन्दी के सर्वाधिक इस्तेमाल होने वाले शब्दों में शुमार है। मुफ्तखोर, ठलुआ के अर्थ में इससे फोकटिया अथवा फोकट्या जैसी संज्ञाएं भी बनी हैं। संस्कृत में एक अनुकरणात्मक धातु है फू या फु जिसमें फूंक मारने का भाव है। होठों को गोल कर तेजी से हवा को बाहर निकालने की क्रिया के दौरान फू ध्वनि उत्पन्न होती है। इसीलिए इस क्रिया के लिए फू या फु धातु निश्चित की गई। फु के साथ त् प्रत्यय भी लगता है इस तरह यह फुत् का रूप लेता है। क्रियारूप के लिए इसके साथ कृ जुड़ता है। फूंक को संस्कृत में फुत्कार कहते हैं। इसके अन्य रूप हैं फुत्कृतम् या फुत्कृति जिसमें फूंक मारना, सांप की फुफकार, हवा की सायं सायं, भांय भांय आदि भाव हैं। फू से ही बने हैं फूंक phoonk, फूंकना जैसे शब्द। हवा भरने  की नली को हिन्दी मे फुंकनी कहते हैं।

गौर करें फूंक मारने के उद्धेश्य पर। आमतौर पर किसी महीन कण को हटाने के लिए फूंक मारी जाती है। किसी गर्म चीज़ या पेय को ठंडा करने के लिए फूंक मारी जाती है। शरीर के किसी हिस्से में जख्म लगने से होने वाली जलन या दर्द की तीव्रता को भी फूंक मार कर कम करने का प्रयास किया जाता है। जाहिर है फूंक के जरिये ताप या महीन कण अस्तित्वहीन हो जाते हैं या उनका लोप हो जाता है। स्पष्ट है कि फूंक में भरने या शून्य करने का भाव है। गुब्बारे में फूंक है तो वह फूला हुआ है। फूंक निकल जाने पर वह पिचक जाता है यानी उसका विस्तार शून्य हो जाता है। फूलना, फुलाना  शब्दों के मूल में भी फू धातु ही है। ध्यान दें फूंक निकलना मुहावरे पर जिसका अर्थ है निस्तेज होना, मौत होना, जान निकल जाना। गुब्बारे में फूंक मारकर हवा भरी जाती है जिससे वह फूल जाता है। गुब्बारे से हवा iphone-wallpaper-balloons निकलने की क्रिया से ही फूंक निकलना मुहावरा बना है बाद में इसमें मृत्यु के अर्थ में शरीर की प्राण-वायु निकलने का भाव समा गया। वैसे कुछ कोशों के मुताबिक फोकट शब्द हिन्दी में मराठी के फुकट का रूपांतर है पर यह भ्रान्ति है। फोकट शब्द का प्रयोग तुलसी साहित्य में खूब हुआ है। प्रो. शैलेष ज़ैदी के मुताबिक तुलसी साहित्य में प्रयुक्त फोकट शब्द दरअसल अरबी के फ़क़त का रूपान्तर है। फ़क़त भिक्षापात्र को कहते हैं और इस तरह फ़क़त के ज़रिये फोकट में मुफ़्त का भाव आ गया।

फू से ही बना है हिन्दी का फोक phok शब्द जिसमें व्यर्थता, निस्सारता का भाव है जो फुत्कृतम् से ही बना है। फुत्कृतम् > फुक्क्कटम > फुक्कम > फुक्कअ > फुक्का > फोका यह क्रम रहा है। फूंक देने, मिटा देने, खत्म कर देने के अर्थ में फोका शब्द का प्रयोग होता है। याद रहे कि फूंक अथवा प्राण निकल जाने पर कुछ भी बाकी नहीं रह जाता। फूंक शब्द में ताम-झाम, बल, शक्ति का भाव छुपा हुआ है। निर्धन, गरीब और जिसकी जेब हमेशा खाली रहती हो उसे फुक्का कहा जाता है। गुजराती में इसका रूप है फोका, मराठी में है फुकट, सिन्धी में है फोकुट। फुत्कृतम का एक अन्य रूप हुआ फुत्कृतम् > फुक्कटम > फोक्कटअ > फोकट या फुकट (मराठी) का अर्थ हुआ व्यर्थ, निरअर्थक आदि। बाद में इसमें मुफ्त जैसे भाव भी जुड़ गए।

क अन्य शब्द है फुकरा जिसका प्रयोग बीते कुछ सालों में बढ़ा है। फुकरा यानी फालतू, निठल्ला, आवारा।  मालवी में निठल्लों, निकम्मों, निखट्टुओं के लिए फोकटिया शब्द भी प्रचलित है जो अक्सर फोकट्या सुनाई पड़ता है । फोकट्या यानी जिसके पास फोकट का वक्त बहुत है। फुकरे भी इसी फोकट्या की कड़ी का शब्द है। फोकटिया के फोक में व्यर्थता, निस्सारता का भाव है । 
इसी तरह जिसके पास कुछ न हो, खास-तौर पर जिसकी जेब हमेशा खाली रहती हो उसे फुक्का या फुक्की कहते हैं फुक्का फुक्की का अर्थ चाहे खाली हो या रिक्त स्थान अथवा  ऐसा व्यक्ति जिसके लिए ठन ठन गोपाल उक्ति कही जाती है किन्तु वर्णक्रम का अगला वर्ण लगते ही इसका अर्थ बदल जाता है। फुक्का का एक और रूप हुआ फुग्गा phugga मगर इसका अर्थ हुआ गुब्बारा gubbaraa अर्थात जिसे फूंका गया हो। फुलाना का एक रूप फुगाना भी होता है जिसका अर्थ है हवा भरना। मराठी में फुलाने को फुगवणे और  मालवी में फुगाना कहते हैं।  फुग्गा का विलोम हुआ फुक्का यानी जिसके पास कुछ न हो। फकीर। हालांकि फकीर या फाका जैसे शब्द फू से नहीं उपजे हैं। फकीर सेमिटिक भाषा परिवार का शब्द है। फूंक से जुड़े कई मुहावरे हिन्दी में प्रचलित हैं। फूंक मार कर उड़ाना मुहावरे का अर्थ है सरलता से अलग करना या किसी काम को आसान समझना। फूंक देना या फूंक भरना का अर्थ होता है किसी को ताकत प्रदान करना, किसी को ऊपर चढ़ाना। फूंक देना का दूसरा अर्थ है सब कुछ नष्ट कर देना अर्थात स्वाहा कर देना। फूंक फूंक कर पैर रखना का मतलब है बहुत सावधानी से चलना। फोकट का यानी मुफ्त का, बिना परिश्रम का।
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17 कमेंट्स:

अविनाश वाचस्पति said...

बिल्‍कुल सटीक कह रहे हैं अजित भाई
यहां ब्‍लॉगरों को संगठित करने की बात चली
तो फोकट के फुग्‍गे में फूंक मारने वाले सक्रिय हो गए
और हमें फूंक फूंक कर कदम रखने को विवश होना पड़ा
हो सकता है कहीं चलना ही न छोड़ दें हम।

Kaviraaj said...

बहुत अच्छा । सुदर प्रयास है। जारी रखिये ।

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http://Kitabghar.tk

ghughutibasuti said...

बहुत सुन्दर सफर रहा यह भी।
घुघूती बासूती

दिनेशराय द्विवेदी said...

यहाँ तो रोज ही लोग फूँक मार मार कर फुलाने के चक्कर में रहते हैं। कहते हैं आप तो कुछ भी कर सकते हैं। चाहें जो कर सकते हैं। जब मुकदमे की तारीख पडती है पाँच महिने की तो गुब्बारा पंचर हो जाता है। अब और भरो हवा, फूट गया न गुब्बारा!

Udan Tashtari said...

जी, प्रभु...फूंक मार मार कर पढ़ा और आनन्द उठाया!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

"फूँक फूँक कर पैर रखना"
सुन्दर और सटीक व्याख्या!
होली की शुभकामनाएँ!

उम्मतें said...

अजित भाई
सब सोहबत का असर है जो फूंक का व्यक्तित्व बहुआयामी होता जाता है ज़रा गौर फरमाइये - सांप / बलून / सुई / फूंकनी / क़दमों की सोहबत में फूंक कैसे कैसे कैसे रंग बदलती है कभी धमकाती है / निष्प्राण करती है / परवान चढ़ाती है / सतर्कता को ध्वनित करती है वगैरह ...! उसपे तुर्रा ये कि फकीरों की सोहबत में ' जो घर फूंके आपणा ' की तर्ज पर माया मोह की निस्सारता बखान करने के साथ ही साथ आशीष / कल्याण / शुभता / आध्यात्मिक संरक्षण को भी अभिव्यक्त करती है और जब इसे पैसे की सोहबत नहीं मिलती तो .....?



( एक बात और ..ये मत समझियेगा कि होली है सो फुला रहा हूँ मेरे हिसाब से ...पाठक चिंतन पर उतारू हो जाये ... पोस्ट की सार्थकता और विचारोत्तेजक लेखन करने वाले की निशानी है ! शुभकामनायें )

डॉ टी एस दराल said...

फूंक फूंक कर ही पढ़ा जी । आनंद आ गया ।
आपको और आपके परिवार को होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनायें।

Mansoor ali Hashmi said...

फाल्गुन में फुग्गे से फौव्वारे उडाती हुई पोस्ट, पसंद आई, होली मुबारक - आपको एवम सभी ब्लोगर्स व् पाठक बंधूओं और बन्धीनीओ ! को.......

होली का रंग भर दिये फुग्गा फुलायके,
चोली पे हो गुलाल तो फूंको* संभाल के,
फेंको अबीर भी तो नज़र को बचायके,
मस्ती में आ गए हो तो ठुमका लगायके.

*महीन कणों को फूंक से उड़ाने की समझाइश आपने ही दी है.

नोट: १-फुग्गा और भी फूलना चाहता था, लेकिन फूटने के डर से रोक दिया. अब देखे इसकी हवा कोन निकालता है- बासीजी या अली साहब !
२- सोच थोड़ी होलीमय होगयी है, क्षमा याचना सहीत .

डॉ. मनोज मिश्र said...

होली की शुभकामनाएँ!

Chandan Kumar Jha said...

फोकट में आज बहुत हीं अच्छी जानकारी मिली ।

निर्मला कपिला said...

बस फूँक मार मार कर पढ रहे हैं कहीं कुछ रह न जाये पढने से । आपको व परिवार को होली की शुभकामनायें

उम्मतें said...

@मंसूर अली साहब (सोच थोड़ी होलीमय होगयी है,क्षमा याचना सहीत )

हुज़ूर 'सोच' पर तो आपका हक़ है ही , रही 'क्षमा याचना' वो अजित जी की , बाक़ी में से 'होली' लेकर 'मय' बासी जी के लिए छोड़ दी है :)

Asha Joglekar said...

फूंक और फोकट और फुग्गा भी । वाह, अच्छे अच्छों की फूंक निकल गई होगी ।

Baljit Basi said...

फूं फूं करना(भूं भूं करना भी) का पंजाबी में मतलब होता है फोकी शान दिखाना. ऐसे आदमी को 'फुकरा' या 'फूकी' भी कहते हैं. 'फूं फां' का मतलब फोकी शान. 'फूक लेना' या 'फूक में आना' का मतलब आपनी परशंसा करना.
फूकनी को पंजाबी में 'भूकना' बोलते हैं. प्याज के शिखर को 'भूक' बोलते हैं.
'फोका पानी' का मतलब सादा पानी अर्थात बिना मीठे वगैरा के.
'फोकट' शब्द भी पंजाबी में है जिस का मतलब चीज़ जिस से तत्व निकाल दिया गया हो. बेसुआद चीज 'फुक्ली' होती है.
इसबगोल की 'फक्क' होती है. 'रंग फक्क होना' का मतलब घबराहट या डर से मूंह का रंग उड़ जाना. 'फक्का न रहना' का मतलब ठन ठन गोपाल होना.

Mansoor ali Hashmi said...

@अली साहब,
डर तो ये था की आप फुग्गे में सुई चुभो देंगे, आप ने तो और फुला दिया ! और ये बासीजी को भंग के मौसम में क्या पेश कर दिया, वैसे तो वो आज की महफ़िल में तशरीफ ही नहीं लाये.

ताऊ रामपुरिया said...

आपको होली पर्व की घणी रामराम.

रामराम

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