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Monday, December 6, 2010
क़िबला की क़ाबिलियत और क़बीला
Thursday, December 2, 2010
दूर की कौड़ी या कौड़ी की इज्ज़त…
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प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
10
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3:02 AM
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रहन-सहन
Sunday, November 28, 2010
तपेदिक की दिक्क़त
... दिक् में एक अन्य भाव भी निहित है। गौर करना चाहिए इसके सूक्ष्म और महीन जैसे अर्थों पर। सूक्ष्मता और महीनता में नकारात्मक भाव नहीं हैं बल्कि इसका अर्थ एक किस्म का परिष्कार भी है।...
तपेदिक दरअसल फ़ारसी के तप और अरबी के दिक् से मिल कर बना है। तप ऐ दिक् > तपे दिक > तपेदिक। गौरतलब है कि संस्कृत मे जो तप का अर्थ ज्वाला, चमक, रश्मि, गरमी होता है। मूल आशय सूर्य की रोशनी और उसकी ऊर्जा से है। तप से ही बना ताप जिसका अर्थ है तपना, जलना। बरास्ता अवेस्ता, तप फ़ारसी में भी इसी रूप और अर्थ में दाखिल हुआ। तप का एक अर्थ बुखार भी हुआ क्योंकि बुखार में भी शरीर तपता है। मराठी, हिन्दी सहित ज्यादातर बोलियों में बुखार आने के लिए तपना, ताप आना भी कहा जाता है। चमक के अर्थ में फ़ारसी का ताब, तैश में आने के लिए ताव और रोटी सेंकने के लिए मोटे पेंदे वाली तश्तरी के लिए तवा जैसा शब्द इसी तप् से आ रहा है। किसी मनोरथ की पूर्ती के लिए की जानेवाली साधना को तप कहते हैं क्योंकि इस प्रक्रिया में शरीर कृशकाय हो जाता है। यही साधना तपस्या है और इसे करनेवाला तपस्वी। ऐसे बुखार के लिए, जिसकी वजह से मनुष्य कृशकाय हो जाता हो, तपेदिक शब्द एकदम तार्किक है।| ये सफर आपको कैसा लगा ? पसंद आया हो तो यहां क्लिक करें |
Wednesday, November 24, 2010
हाथों की कुशलता यानी दक्षता
अगली कड़ी-दक्षिणापथ की प्रदक्षिणा
-जारी
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Thursday, November 18, 2010
शौर्यप्रतीक है सिंह
पिछली कड़िया-1.सिंह का सिंहावलोकन 2. शेर के सींग या शेरसिंग?
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Sunday, November 14, 2010
शेर के सींग या शेरसिंग?
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प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
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6:04 AM
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Friday, November 12, 2010
सिंह का सिंहावलोकन
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प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
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Thursday, November 11, 2010
गुटके का गुटकना
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प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
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Monday, November 8, 2010
उर्वशी, किसके ‘उर’ बसी
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Thursday, November 4, 2010
तालियां, जोरदार तालियां-दीपावली की शुभकामनाएं
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प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
10
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2:07 AM
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इधर उधर,
उत्सव
Monday, November 1, 2010
सावधानी हटी, दुर्घटना घटी
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