Saturday, March 7, 2009

वो लश्कर बरबाद हो, ये लश्कर आबाद रहे…

view.phpलश्कर का आबादी के तौर पर अस्तित्व शुरू से रहा है मगर एक धर्म विशेष के तथा कथित रक्षकों का समूह जिसका मकसद दहशत फैलाना है किसी भी तरह से लश्कर के प्राचीन मायनों से मेल नहीं खाता है।  
श्कर शब्द आतंक का पर्याय बना हुआ है। नई पीढ़ी के लिए इस लफ्ज के मायने है एक आतंकवादी संगठन जिसका नाम है लश्करे तैयबा  lashkar e toiba. इस शब्द का लगातार संचार माध्यमों के जरिये एक ही संदर्भ में बार-बार जिक्र होते रहने से इसने अपना असली अर्थ खो दिया है। यह एक लगभग वर्जित शब्द बन गया है। इसके उल्लेख मात्र से दिमाग में नकारात्मक प्रतिक्रियाएं उभरने लगती हैं। जबकि आज भी यह शब्द हमारे आसपास अनेक रूपों में मौजूद है।
विभिन्न जातियों में लश्करी उपनाम पाए जाते हैं। ग्वालियर का एक उपनगर लश्कर lashkar मशहूर है। इस देश की साझी संस्कृति की सबसे रंगीन पहचान उर्दू का एक नाम लश्करी भी है। पर इन सबको पीछे धकेल कर दहशत का लश्कर हावी हो गया है। लश्कर अरबी-फारसी के जरिये हिन्दी-उर्दू में दाखिल हुआ। शब्दकोशों के अनुसार लश्कर का अर्थ होता है सेना, वाहिनी या फौज। फारसी-अरबी में इसका अभिप्राय फौजी जमावड़े से ही है। उर्दू में आकर लश्कर का अर्थ हुआ फौजी पड़ाव। दरअसल छावनी या पड़ाव के तौर लश्कर अधूरा शब्द है, इसका शुद्ध रूप है लश्करगाह अर्थात जहां सेना के डेरे लगते हों। ग्वालियर के लश्कर उपनगर का नाम इसीलिए पड़ा क्योंकि वहां फौजी पड़ाव था।
श्कर यानी फौज के कार्मिकों को लश्करी कहा जाता था। लश्करी यानी सैन्यकर्मी। जरूरी नहीं कि लश्करी फौजी, सैनिक या लड़ाका ही हो। वह फौज का कोई भी कार्मिक हो सकता था। तोपची से लेकर रसद व्यवस्था देखनेवाला व्यक्ति लश्करी हो सकता था। लश्करी lashkari का एक अन्य अर्थ होता है सैना संबधी। मराठी में फौजी शासन अथवा मार्शल लॉ के लिए लश्करी कायदा शब्द खूब प्रचलित है। लश्कर अरबी शब्द अल-अस्कर al askar का बिगड़ा हुआ रूप है। अरबी में अस्कर का मतलब होता है रक्षक, लडाका अथवा इनका समूह। बाद में सिपाहियों के संगठित जमावड़े के तौर पर अस्करी को सेना या फौज का अर्थ भी मिल गया। अल-अस्कर जब फारस में दाखिल हुआ तो इसकी विभिन्न ज़बानों में अलग अलग उच्चारणों से होते हुए लश्कर में बदल गया।
स्कर सेमेटिक भाषा परिवार का बहुत प्राचीन शब्द है जिसमें समूह के भाव की प्रधानता है। इसका प्रमाण है मिस्र का प्राचीन शहर अल अस्कर जो नवीं सदी के आसपास अब्बासियों के शासनकाल में मिस्र की राजधानी थी जिसका मतलब ही था खेमों का शहर। उर्दू-फारसी के शब्दकोशो में भी अस्कर का अर्थ फौज के अलावा एक नगर भी दिया हुआ है। askariदरअसल अस्कर शब्द मूलतः अरबी का भी नहीं है बल्कि हिब्रू शब्द सिचर/सिखर से बना है। बाइबल में वर्णित गोस्पेल के मुताबिक समारिया क्षेत्र में सिखर sychar नाम का एक कस्बा था। सिचर का ही अपभ्रंश रूप इस्ख़र ischar प्रसिद्ध हुआ। यह वर्णविपर्यय का उदाहरण है। जैसे स्कूल का इस्कूल। विद्वानों का मानना है कि यही अस्कर का प्रारम्भिक रूप था। बाइबल में इस्खर का उल्लेख एक कस्बे के रूप में हुआ। हिब्रू को अरबी से प्राचीन भाषा माना जाता है।  हिब्रू अरबी के बीच की कड़ी है आरमेइक जिसमें इस्खर का उल्लेख बस्ती, आबादी या घिरे हुए स्थान के तौर पर हुआ जिसने अरबी में अस्कर बन कर समूह, संगठन या फौज के रूप में स्वतंत्र अर्थवत्ता पा ली। अरबी में अल एक ज़रूरी उपसर्ग है। अस्कर के साथ इसके जुड़ने से बना अल-अस्कर जो बरास्ता फारसी लश्कर के रूप में हिन्दी में घुल-मिल गया। आज वणिक, ब्राह्मण और राजपूतों में लश्करी उपनामधारी अनेक परिवार हैं। यह ठीक वैसे ही हुआ जैसे सुमेरियाई शब्द कला ने कलां के रूप में अरबी, फारसी, तुर्की और हिन्दी में बड़ी आबादी के तौर पर अपनी जगह बनाई। फौजी ठिकाने के तौर पर किला शब्द भी इससे ही जन्मा। लश्कर का आबादी के तौर पर अस्तित्व शुरू से रहा है मगर एक धर्म विशेष के तथाकथित रक्षकों का समूह जिसका मकसद दहशत फैलाना है किसी भी तरह से लश्कर के प्राचीन मायनों से मेल नहीं खाता है।

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16 कमेंट्स:

हिमांशु । Himanshu said...

"लश्कर का आबादी के तौर पर अस्तित्व शुरू से रहा है मगर एक धर्म विशेष के तथाकथित रक्षकों का समूह जिसका मकसद दहशत फैलाना है किसी भी तरह से लश्कर के प्राचीन मायनों से मेल नहीं खाता है।"

इस उम्दा आलेख के बाद तो यही लगता है.
धन्यवाद.

आशीष said...

लश्कर का अर्थ जानकर आंख फटी की फटी रह गई

Dr. Chandra Kumar Jain said...

वाह! लश्कर के मूल अर्थ में
कैसा वैभव है !
लेकिन लश्करी पर हावी लश्कर
अस्कर के अर्थ पर भी अक्सर
सवालिया निशान लगाता रहा है.
आपकी यह पोस्ट
अर्थ साधकों के साथ-साथ
अनर्थवादियों तक भी पहुँचना चाहिए.
==============================
आभार अजित जी
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

सौमित्र बुधकर said...

अच्छा है.. लश्कर के अर्थ को तो मैं मोटा-मोटी समझ रहा था, पर उत्पत्ति जानने के लिए जाहिर तौर पर आपकी पोस्ट का ही इंतज़ार था। शुक्रिया।
वैसे एक बात, शायद बचकानी लगे, पर मन में आई है, तो पूछेंगे ज़रूर। ये समझना चाहता था कि "अस्कर", और "ऑस्कर" में भी कोई संबंध है क्या??? दूसरा शब्द तो काफी इस्तेमाल होता है आजकल, और अब तो भारतीयों ने भी झंडा गाड़ दिया है। ज़रूर बताइयेगा।

सौमित्र

मुनीश ( munish ) said...

Dear Ajit bhai,
In Panjabi "Lashkaraa" stands for SHINE . May be because of shining armours and swords of ancient armies.

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

राजस्थान में जब राजा यात्रा पर होता था तो कहा जाता है कि लाव-लश्कर साथ चलता था। लश्कर तो समझ आ गया। इस के संगी लाव का पता ठिकाना भी तो लगे?

अनिल कान्त : said...

लश्कर के मूल अर्थ जानकार अचरज हुआ ...शुक्रिया

अंशुमाली रस्तोगी said...

क्या गजब जानकारी दी है, शुक्रिया।

अजित वडनेरकर said...

@दिनेशराय द्विवेदी
लाव-लश्कर बहुप्रचलित शब्द है और हिन्दी में खूब इस्तेमाल होता है। इस शब्द ने मुहावरे का रुतबा हासिल कर लिया है जिसका मतलब होता है किसी कार्य से जुड़े तमाम साजो-सामान सहित। लश्कर का अर्थ चूंकि फौज है और फौज के साथ पूरा ताम-झाम, लवाजिमा भी चलता है। मुमकिन है लाव लश्कर में लवाजिमा भी झांक रहा हो। वैसे ज्ञान मंडल कोश के अनुसार लाव का अर्थ तोपची या तोप में लौ लगानेवाला होता है। यानी तोपों समेत कूच को मुस्तैद फौज। कोई भी फौज बगैर तोपखाने के पूर्ण नहीं होती। सो, इसका मुहावरे मे भी यही अर्थ निकलता है कि समूचे साजो-सामान के साथ क्रिया के लिए तैयार या तत्पर।

विनय said...

हाँ जी साहब, कैसे हैं, काफ़ी दिन से व्यस्त था, आज पूरे मन सभी लेख पढ़ रहा हूँ!

neeshoo said...

बढ़िया जानकारी हमें भी न पता था ।

ताऊ रामपुरिया said...

अनमोल जानकारी है जी.

रामराम.

Kishore Choudhary said...

आपके किसी लेख पर कुछ लिखना बड़ा कठिन कार्य होता है इसलिए सिर्फ इतना पूछ रहा हूँ कि प्रोफाईल में जो आपके साथ दिख रहे क्या वे छोटे वडनेरकर सरकार हैं ?

रंजन said...

लश्कर का कबाड़ा कर डाला तौयबा ने.. :)

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

लश्कर तो चाहीये मगर,
"तौबा "( तैयबा ) कराये ऐसा नहीँ
- लावण्या

bhootnath( भूतनाथ) said...

ये ब्लॉग,जिसका नाम शब्दों का सफ़र है,इसे मैं एक अद्भुत ब्लॉग मानता हूँ.....मैंने इसे मेल से सबस्क्राईब किया हुआ है.....बेशक मैं इसपर आज तक कोई टिप्पणी नहीं दे पाया हूँ....उसका कारण महज इतना ही है कि शब्दों की खोज के पीछे उनके गहन अर्थ हैं.....उसे समझ पाना ही अत्यंत कठिन कार्य है....और अपनी मौलिकता के साथ तटस्थ रहते हुए उनका अर्थ पकड़ना और उनका मूल्याकन करना तो जैसे असंभव प्रायः......!! और इस नाते अपनी टिप्पणियों को मैं एकदम बौना समझता हूँ....सुन्दर....बहुत अच्छे....बहुत बढिया आदि भर कहना मेरी फितरत में नहीं है.....सच इस कार्य के आगे हमारा योगदान तो हिंदी जगत में बिलकुल बौना ही तो है.....इस ब्लॉग के मालिक को मेरा सैल्यूट.....इस रस का आस्वादन करते हुए मैं कभी नहीं अघाया......और ना ही कभी अघाऊंगा......भाईजी को बहुत....बहुत....बहुत आभार.....साधुवाद....प्रेम......और सलाम.......!!

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