Sunday, April 12, 2009

वाट लगा दी, बत्ती बुझा दी…

fire_1  बीते कुछ वर्षों से मराठी का वाट लगना मुहावरा हिन्दी में काफी मशहूर हो चला है..
कि सी भी भाषा में अन्य भाषाओं के शब्दों का आना-जाना उसे समृद्ध करता है, उसकी खूबसूरती बढ़ाता है। हिन्दी में भारत की कई भाषाओं के शब्द हर रोज़ समाहित हो रहे हैं। सामाजिक समरसता जितनी बढ़ेगी, संस्कृतियों का मेल-जोल जितना तेज होगा, भाषा का विकास भी निरंतर होता रहेगा। हि्न्दी में पिछले कुछ वर्षों से एक मुहावरा तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है-वाट लगना जिसका मतलब होता है नुकसान हो जाना या काम बिगड़ जाना।
वाट लगना मुहावरे में वाट शब्द ही प्रमुख है। यह हिन्दी का शब्द नहीं है। आमतौर पर यह गुजराती और मराठी में ज्यादा प्रयुक्त होता है। नुकसान होने या नुकसान करने जैसे अर्थों में वाट लगना, वाट लगाना जैसे प्रयोग पहले मराठी से मुंबइया हिन्दी में आए फिर फिल्मों के जरिये अब हिन्दी क्षेत्रों में भी खूब इस्तेमाल हो रहे हैं। मराठी वाट बना है संस्कृत के वर्तिः (वर्तिः > वत्ती >  बत्ती >  बाती > वाट ) शब्द से जिसका अर्थ होता है दीपशिखा, अग्निशिखा।  इसके लिए वर्तिका शब्द भी है जो संस्कृत का है मगर साहित्यिक हिन्दी में इस्तेमाल किया जाता है जिसका मतलब भी दीये की लौ होता है। वर्तिः शब्द बना है वृत् धातु से जिसमें गोल, घेरा, घूमने, हिलने का भाव है। दीये की लौ पर गौर करें तो पाएंगे कि इसमें एक सातत्य, गति का भाव है। जलती हुई शिखा अपने चारों और एक आभा-वलय का निर्माण करती है।
हिन्दी में वर्तिः से बत्ती या बाती जैसे शब्दों का निर्माण होता है जो खूब इस्तेमाल होते हैं। मराठी में इसका रूप वाती/वात भी होता है। दीयाबाती का मतलब होता है शाम के समय उजाले का प्रबंध करना। आज भले ही बिजली के बल्बों से रोशनी होती है, मगर तब भी बत्ती जलाओ, बत्ती बुझाओ ही कहा जाता है। मोमबत्ती, अगरबत्ती, ऊदबत्ती जैसे शब्द भी इससे ही बने हैं। हालांकि वर्तिः शब्द के मूल में दीये की लौ न होकर जलनेवाले कपास-सूत्र प्रमुख है। गौर करें कि दीपक की बत्ती कपास से ही बनाई जाती है। कपास के फाहे को हथेलियों के बीच रख कर गोल-गोल लपेटने की क्रिया से ही बत्ती का निर्माण होता है। इसी चक्रगति क्रिया के लिए हिन्दी शब्द है बटना जो वर्तनीयं से ही बना है। जिसे बट कर बनाया जाए वही है वर्तिका या बत्ती। बत्ती में जलने का नहीं बल्कि गोलाई और घुमाव वाला भाव प्रमुख है। खड़िया की चाक को भी बत्ती कहा जाता है जिससे श्यामपट्ट पर लिखा जाता है। वर्तिः या वर्तिका से जहां हिन्दी में बत्ती, बाती शब्द का निर्माण हुआ वहीं मराठी में इससे वाट शब्द बना। बत्ती और वाट दोनों में ही जलने और नष्ट हो जाने का भाव प्रमुख है। अनादिकाल से मनुष्य को अग्नि के भीषण रूप का ज्ञान रहा है।

...हिन्दी में अगर बत्ती दी जाती है तो मराठी में वाट लगा दी जाती है…HouseFire_2

हिन्दी में नुकसान के अर्थ में बत्ती देना का वही अर्थ है जो हिन्दी में नुकसान के अर्थ में बत्ती देना का वही अर्थ है जो मराठी में वाट लगना का है।
सी अर्थ में उर्दू मुहावरा पलीता लगाना भी होता है। मद्दाह के उर्दू शब्दकोश के मुताबिक हिन्दी का पलीता शब्द उर्दू के फलीतः से आया है जिसका मतलब होता है चिराग की लौ। मद्दाह साहब के मुताबिक उर्दू का फलीतः दरअसल भ्रष्ट प्रयोग है और बरास्ता तुर्की इसने फारसी और अरबी में घुसपैठ की है। अपने मूल स्वरूप में यह अरबी का फतीलः शब्द है जिसका वर्णविपर्यय की क्रिया के चलते रूपपरिवर्तन हुआ और यह फलीतः बन गया। मगर जॉन प्लैट्स के हिन्दी-उर्दू-अंग्रेजी कोश के मुताबिक हिन्दी का पलीता शब्द संस्कृत के प्रदीप्त से बना है जिसका अर्थ होता है जलाया हुआ, सुलगाया हुआ। प्रदीप्त से पलित्त और फिर पलीता बना। मुझे लगता है उर्दू, फारसी और तुर्की में जो फलीता या पलीता है उसकी रिश्तेदारी अरबी के फतीलः से नहीं है। निश्चित ही प्रदीप्त के देशज रूप पलित्त के ही ये प्रतिरूप हैं।
नुकसान के ही अर्थ में फूंकना, घर फूंकना जैसे मुहावरे भी हिन्दी में बोले जाते हैं। हिन्दी का फूंक शब्द संस्कृत की फुत् या फूत् धातु से निकला है। यह ध्वनिअनुकरण के आधार पर बनी धातु है। मुंह से तेजी से श्वास छोड़ने पर यही ध्वनि होती है। इसका प्रयोग ‘कृ’ अर्थात करने के साथ होता है। इस तरह बनता है फुतकृ जिससे हिन्दी में फुत्कार शब्द बनता है। फूंक की रिश्तेदारी इससे ही है। आक्सीजन की मौजूदगी में ही आग जलती है। अधिक तेज आंच के लिए चिंगारी को फूंक मारी जाती है जिससे आग जोर पकड़ती है। भड़काने या उकसाने के लिए भी फूंक देना मुहावरे का प्रयोग किया जाता है।

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20 कमेंट्स:

नितिन | Nitin Vyas said...

बहुत दिनों से "वाट" का सफ़र जानने की उत्सुकता थी, आज आपने इसका अर्थ समझा कर बड़ी क‌ृपा की।

धन्यवाद!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

वडनेकर जी!
वाट लगाने के अर्थ से मैं अनजान था।
आज समझ में आया कि वाट लगाना क्या होता है।
आज तक तो मैं इसे वट्टा लगाना ही समझ रहा था।
शब्दों के सफर का मैं नियमित पाठक बन चुका हूँ।
सफर जारी रखें,
बधाई।

Himanshu Pandey said...

मैं तो इसे फ़िल्म इंडस्ट्री का बनाया हुआ निरर्थक शब्द समझता था ।

अजित वडनेरकर said...

@डॉ रूपचंद्र शास्त्री
नियमित पाठक बनने के लिए बहुत बहुत शुक्रिया डॉक्टसाब। बने रहें साथ, सफर यूं ही चलता रहेगा।
सादर
अजित

dhiru singh { धीरेन्द्र वीर सिंह } said...

वाट को मै भी फ़िल्मी शब्द समझता था . लेकिन उसका अर्थ जान कर लगा वाट फालतू नहीं है . सफ़र वर्तिका से होता हुआ बत्ती तक का ज्ञान वर्धक रहा . और पलीता तो लग ही गया चुनाव मे देखना है कितने घर फूकेंगे

Anil Pusadkar said...

वाह!ज्ञानवर्धक्।

समय चक्र said...

आपके ब्लॉग का सूक्ष्म अवलोकन किया .और आपके ब्लॉग को देखकर बहुत अच्छा लगा कि आप हिंदी भाषा के बारे में पाठको को सतत अच्छी जानकारी प्रदान कर रहे है . मेरी समझ से गाँवो में लोग कहा करते थे ये बात लगा दे. साँझा हो रही है .यही बात शब्द को बिगाड़कर वाट भी कहा जाता है .वाट और बत्ती पर बढ़िया जानकारी दी है आपने. आभार

Dr. Chandra Kumar Jain said...

मुहावरे पर एकाग्र...मुहावरे जैसी पोस्ट.
==============================
शुक्रिया
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

Gyan Dutt Pandey said...

वाह! वाट को तो मैं जेम्स वाट से जुड़ा मानता था!

आलोक सिंह said...

वाट ने तो दिमाग की बत्ती जला दी . वाट शब्द का प्रयोग अक्सर मित्र लोग करते थे पर इसका सही अर्थ आज ज्ञात हुआ .
शब्दों का सफ़र बहुत अमूल्य जानकारी प्रदान कर रहा है . हर शब्द का इतिहास पता चल रहा है . धन्यवाद

Alpana Verma said...

आप की पोस्ट दिमाग कों ' शब्द के अर्थ और उनकी खोज की दिशाओं में दूर दौड़ना सिखा रही हैं.
आप के इस विषय में किये जा रहे परिश्रम कों नमन .

sanjay vyas said...

बहुत समय से वाट लगना सुन रहे थे , आज विस्तृत रूप में अर्थ जान कर आगे आत्म विशवास से इसका अपने लेखन में इस्तेमाल भी करेंगे.

Anonymous said...

मुम्बैया फिल्मों में तो बहुत सुना है ये शब्द,,,, पर अर्थ आज मालूम हुआ.

धन्यवाद.

दिनेशराय द्विवेदी said...

भाई मैं तो वाट को विलायत से आया समझता था। पर यह तो अपना मराठी-गुजराती निकला। अब तक तो भेस बदल कर औरत आदमी ही देसी ही परदेसी लगा करते थे। अब शब्द भी लगने लगे।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

आपने तो इस शब्द के बारे में अनेक लोगों की धारणा की ही वाट लगा दी। :)

मुझे इस शब्द का ज्ञान ‘मुन्ना भाई’ के शब्दकोश से हुआ था। अर्थ तो जान गया था लेकिन उत्पत्ति के बारे में कभी सोच नहीं पाया था। अब सोचने की जरूरत नहीं रही। आपने जो बता दिया। शुक्रिया।

अनिल कान्त said...

ekdum mast jankari di hai

विष्णु बैरागी said...

निस्‍सन्‍देह उपयोगी जानकारी।
मालवा में रास्‍ते के लिए 'वाट' प्रयुक्‍त किया जाता है।

Abhishek Ojha said...

वाट पॉवर का एसआई यूनिट भी तो होता है... मुझे तो लगा की वाट कहीं वहां सभी तो नहीं जुड़ा !

http://naadiastrologystudycircle.blogspot.in/ said...

श्रीमान अजीत वडनेरकर जी,
आपके द्वारा बनाए गए ब्लॉग पर आज नज़र गई। बहुत अच्छा लगा पढकर। अनायास एक धागे पर मराठी के 'वाट लगाना या लगाना' इस बंबईया मुहावरे की भाषा व्युत्पत्ती के संदर्भ में बहुत अच्छी जानकारी मिली। मैं एक मराठी भाषिक व्यक्ती हूं। कभी कभी हिन्दी के कुछ लेख पढता हूं तथा लिखता भी हूं। आपने 'नाड़ी' शब्द अब तक अनेक बार उपयोग में लाया होगा। परंतु आज कल उसका एक अन्य अर्थ लोगों के सामने आ रहा है। आशा करता हूं आप उसे भी उजागर करें।

Unknown said...

सर क्या वट वृक्ष से भी इसका कोई नाता है???

नीचे दिया गया बक्सा प्रयोग करें हिन्दी में टाइप करने के लिए

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