Sunday, December 4, 2011

आखिर क्या है ये ‘सौहार्द्र’ ?

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ब्दों की गहराई तक गए बिना उसे इस्तेमाल की बढ़ती प्रवृत्ति के दौर में हिन्दी पत्रकारिता भला इस बुराई से कैसे बची रह सकती है। आए दिन सद्भाव के संदर्भों में सौहार्द्र शब्द का प्रयोग हम पत्र-पत्रिकाओं और टीवी चैनलों पर देखते-सुनते हैं। अब यह जानने-समझने की ज़रूरत नहीं रह गई है कि सौहार्द्र या सौहार्द्रता शब्द ग़लत है, इसका सही उच्चारण और वर्तनी है सौहार्द जिसका रिश्ता हार्दिकता से जुड़ता है। सौहार्द्र में ‘आर्द्रता’ का जो स्पर्श है उससे सौहार्द में निहित भाव प्रकट नहीं होता। सौहार्द्र जैसा कोई शब्द किसी कोश में नहीं मिलेगा, मगर यह शब्द चल पड़ा है। भाषा खुद अपना रास्ता चुनती है, मगर सौहार्द का सौहार्द्र हो जाना भाखा बहता नीर वाला उदाहरण नहीं है, क्योंकि सौहार्द्र की तुलना में सौहार्द उच्चारण कहीं सहज और आसान है। यह विशुद्ध भाषा के प्रति असावधानी और अगंभीर नज़रिये का परिणाम है।
सौहार्द में जो हार्दिकता का भाव है वह हृदय से आ रही है। हृदय भारोपीय भाषा परिवार का शब्द है इसकी व्युत्पत्ति संस्कृत की हृ धातु से हुई है जिसमें मुग्ध करना, आकृष्ट करना, लेना, अधीन करना, वशीभूत करना जैसे भाव हैं। इससे ही बना है हृद जिसका अर्थ है मन या दिल। हृ में समाविष्ट तमाम भाव मन से जुड़े हैं। हृदयम् शब्द भी इससे ही बना है। हृदयम की व्याप्ति द्रविड़ भाषा परिवार में भी हुई है और वहाँ इसका रूप है इरुतयम् irtayam. हिन्दी के हार्दिक शब्द का अर्थ होता है दिल से, मन से हृदय से जिसका रिश्ता है इसी मूल से बने हार्दम् से जिसमें स्नेह, प्रेम, कृपा, अभिप्राय जेसे भाव शामिल हैं। बोलचाल में हृदय से बने देसी रूप भी चलन में हैं जैसे हिया, हिरदय, हिय आदि। इसके अलावा सहृदय, हार्दिक आदि। हृद में सु उपसर्ग लगने से बनता है सुहृद अर्थात अच्छे हृदय से या अच्छे हृदयवाला। आपटे कोश के मुताबिक सुहृद में अण् प्रत्यय लगने से बना है सौहार्दः या सौहार्दम् जिसका अर्थ है हृदय की सरलता, स्नेह, सद्भाव या मैत्रीभाव। यही है सौहार्द का मूल जिसे हम सौहार्द्र पढ़ने के अभ्यस्त हो चुके हैं। हृद की व्याप्ति यूरोप की कई भाषाओं में है। अंग्रेजी के हार्ट heart का हृद से गहरा रिश्ता है। हार्दिकता के हार्द और अंग्रेजी के हार्ट की तुलना कर ध्वनिसाम्य और अर्थसाम्य पर विचार करें।
हृदय के लिए भाषा वैज्ञानिकों ने मूल इंडो-यूरोपीय धातु कर्द kerd  तलाश की है जिसका आधार ग्रीक का कार्दिया kardia,

love_ljssqwvk... दिल पर दर्ज़ इबारतें जब काग़ज़ पर उतरती हैं तो साहित्य रचा जाता है।  लिथुआनी का रिकॉर्दारी शब्द ही अंग्रेजी के रिकॉर्ड के मूल में है। ...

लैटिन का कोर cor, लिथुआनी का सिर्डिस sirdis या रूसी का सर्डेस serdce शामिल है। इसी तरह जर्मन में हर्ज़ herz, पुरानी स्पैनी में हार्ता hearta और पुरानी इंग्लिश में होर्टे heorte होता हुआ यह अंग्रेजी में हार्ट heart हो गया। लैटिन का कोर शब्द बड़ा महत्वपूर्ण है। गौरतलब है कि इंडो-यूरोपीय परिवार की भाषाओं में और ध्वनियों में भी रूपान्तर होता है। हृद की तरह ही लैटिन कोर की मूल धातु कॉर्द cord है। इस कोर्द से ही बना है अंग्रेजी का कोर core जिसका अर्थ है किसी वस्तु का आंतरिक हिस्सा, भीतरी भाग, केंद्र आदि। हृदय की शरीर में केंद्रीय स्थिति है और यह शरीर के भीतर होता है। इस अर्थ में कोर यानी हृदय। कोर शब्द से हिन्दी वाले भी परिचित हैं और कोर कमेटी या कोर ग्रुप जैसे शब्द खूब लिखे-बोले जाते हैं। इससे ही बना है cordial जिसे अंग्रेजी उच्चारण में कॉर्जल और हिन्दी में कॉर्डियल कहा जाता है। इसमें ठीक वही भाव है जो हार्दिकता या सौहार्द में है। लिथुआनी में इसी कॉर्द में उपसर्ग और प्रत्यय लगने से बनता है रिकॉर्दारी recordari जिसमें किसी तथ्य को दिल में जगह देने, मन में बिठाने का भाव  है। बाद में इसकी अर्थवत्ता का विस्तार हुआ और दर्ज करना, याद रखना, किसी रजिस्टर में इन्द्राज करना जैसे अर्थ भी विकसित हुए। अंग्रेजी का रिकॉर्ड इसी से निकला है। रिकॉर्ड शब्द अंग्रेजी से हिन्दी मे आए उन सैकड़ों शब्दों में शुमार है जिनका इस्तेमाल सुबह से रात तक आम हिन्दी भाषी खूब करता है। दिल पर दर्ज़ इबारतें जब काग़ज़ पर उतरती हैं तो साहित्य रचा जाता है। कॉन्कर्ड, डिस्कॉर्ड जैसे कितने ही शब्दों के साथ इस सिलसिले में दिल की बीमारी के लिए सुने जानेवाले चिकित्सा विज्ञान के पारिभाषिक शब्दों को भी याद किया जा सकता है।
अगली कड़ी में दिलो-दिमाग़ की बातें

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3 कमेंट्स:

चंदन कुमार मिश्र said...

चलिए। सौहार्द का इस्तेमाल और शुद्ध शब्द सीखने को मिला।

घनश्याम मौर्य said...

बहुत बढि़या अजित जी। इसी पर एक और उदाहरण याद आ गया 'सुस्‍वागतम्' शब्‍द का। स्‍वागत शब्‍द 'सु' उपसर्ग और 'आगत' से मिलकर बना है। उस पर दोबारा एक और 'सु' उपसर्ग किस भाषा व्‍याकरण के तहत लाद दिया जाता है पता नहीं, पर 'सुस्‍वागतम्' शब्‍द आपको निमंत्रण पत्रों से लेकर बन्‍दरवारों और फूलों से सजे फाटकों वगैरह सब जगह लिखा मिल जायेगा।

rajeshdutt said...

बहुत अच्छा लगा

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