Friday, December 23, 2011

...लेकिन अपना अपना दामन

पिछली कड़ियाँ-1.दम्पती यानी घर के मालिक 2.घरबारी होना, गिरस्तिन बननाOLYMPUS DIGITAL CAMERA

न्धन को लोग नकारात्मक भाव से लेते हैं जबकि इसमें सकारात्मकता है। बन्धन में हमेशा सुरक्षा और जुड़ाव का भाव होता है। वैवाहिक स्थिति के सन्दर्भ में भी विवाह-बन्धन शब्द का जो प्रयोग है वह एक सूत्र में बन्धने के साथ सह-जीवन का अनुबन्ध भी होता है। दाम्पत्य में एक दूसरे के अधीन होने का जो भाव है वह इसीलिए है। “दाम्पत्य” बना है संस्कृत के दम से जिसका अर्थ है घर, आश्रय, निवास आदि। दम में बांधने का, रोकने का, थामने का, अधीन करने का भाव भी है। ज़ाहिर है ये सारे गुण जिस चीज़ में होते हैं उसे घर भी कहते हैं और बन्धन भी। घर भी बन्धन है, परिवार भी बन्धन है। हर वह व्यवस्था बन्धन है जिसके न रहने से हम बिखरने लगते हैं। बन्धन में सुरक्षा है, भरोसा है, विश्रान्ति है और आनंद है। “दम” की कड़ी में ही इंडो-ईरानी परिवार का एक अन्य शब्द भी है “दामन”। फ़ारसी से हिन्दी में आए कुछ विशिष्ट शब्दों में “दामन” भी एक है। दामन का प्रयोग बोलचाल की हिन्दी में भी होता है और साहित्यिक हिन्दी में भी, खासतौर पर शायरी में खूब होता है। दम से जुड़े सभी बन्धनकारी, आश्रयसूचक भावों का समावेश दामन में है। “फूल खिले हैं, गुलशन गुलशन। लेकिन अपना अपना दामन।।” जिगर मुरादाबादी के इस मशहूर शेर का भाव यही है कि खुदा की बनाई यह दुनिया गुणों की खान है। इसमें से कितना कुछ अपनी झोली में भर पाते हैं, यह देखने की बात है।
दामन का अर्थ होता है साड़ी का पल्ला, पल्लू, आँचल, अंगवस्त्र का निचला झूलता हिस्सा जिसे किसी अन्य के कंधे पर भी डाला जा सकता है या खुद के सिर को भी ढँका जा सकता है। दामन में छाया का भाव भी है। हवाओं से चलते वाले जहाज़ों के बादबान को भी दामन कहा जाता है। पर्वतीय उपत्यका को भी दामन कहते हैं क्योंकि वह चारों ओर से सुरक्षित होती है। पहाड़ी के दामन में ही बसाहट होती है। मद्दाह के उर्दू-हिन्दी कोश के मुताबिक मैदान या समतल भूमि को भी दामन कहा जाता है। साड़ी के पल्लू के लिए आँचल शब्द भी खूब इस्तेमाल होता है। अंचल या आँचल में भी सुरक्षा का भाव है। आँचल पल्ला भी है, छाया भी और बन्धन भी। अंचल का अर्थ इलाका, क्षेत्र भी होता है। प्रायः क्षेत्र के नामों के साथ अंचल शब्द का इस्तेमाल होता है जैसे वनांचल, अरुणांचल आदि। दामन शब्द की मुहावरेदार अर्थवत्ता भी है और पल्ले से जुड़े जितने भी मुहावरे हैं वे सब दामन के साथ इस्तेमाल होते हैं जैसे “दामन थामना” यानी संकट में भरोसा करना, “दामन छुड़ाना’ यानी पीछा छुड़ाना, “दामन में छिपाना” यानी आश्रय में लेना आदि। हाँ, उर्दू में “दामन साफ़ होना”, “पाक दामन होना” जैसे लोकप्रिय मुहावरे भी हैं। पाक-दामन या दामन साफ़ होना का अर्थ है किसी भी बुराई से खुद को बचा कर रखना। दामन के निवास या घर जैसे अर्थों पर गौर करें। “मेरा दामन साफ़ है” का अर्थ खुद के चरित्र, घर, ज़मीन या आधार को पवित्र बताना ही है। उर्दू में दामने-मरियम मुहावरा है। सतीत्व, साधुता के सन्दर्भ में इसका प्रयोग होता है। गौरतलब है कि मरियम का दामन बेदाग़ था।
इंडो-ईरानी परिवार का होने के नाते दम, दामन, दाम के उर्दू, फ़ारसी में समान आशय के बावजूद अर्थवत्ता में कुछ अन्तर है। जैसे दाम का एक अर्थ पालतू मवेशी भी होता है। भाव यहाँ भी जंगली, वनचर को अपना सहचर बना लेने का है। गौर करें कि पालतू बनाने के लिए पशुओं को जाल में फाँसना पड़ता है। फाँसने का फन्दा रस्सी से ही बनता है। जाल भी बिछाया जाता है जो रस्सी से ही बनता है। फाँसना क्रिया के मूल में ही दरअसल खुद पशु है। पशु है इसीलिए वह फँसता है। पशु शब्द की उत्पत्ति भी दिलचस्प है। आदिमकाल से ही मनुष्य पशुओं पर काबू करने की जुगत करता रहा। अपनी बुद्धि से उसने डोरी-जाल आदि बनाए और हिंसक जीवों को भी काबू कर लिया। संस्कृत में एक शब्द है पाश: जिसका अर्थ है फंदा, डोरी, शृंखला, बेड़ी वगैरह। जाहिर है जिन पर पाश से काबू पाया जा सकता था वे ही पशु कहलाए। पाश: शब्द से ही हिन्दी का पाश शब्द बना जिससे बाहूपाश, मोहपाश जैसे लफ्ज बने। प्राचीनकाल में पाश एक अस्त्र को भी कहा जाता था। पाश: शब्द के जाल और फंदे जैसे अर्थों को और विस्तार तब मिला जब बोलचाल की भाषा में इससे फाँस, फाँसी, फँसा, फँसना, फँसाना जैसे शब्द भी बने।
पौराणिक सन्दर्भों में दम का अर्थ पाश, रस्सी, माला, हार, कमरबन्द आदि के तौर पर भी मिलता है। कृष्ण का एक नाम दामोदर भी है। माँ यशोदा ने कृष्ण को एक बार कमरबन्द के ज़रिए पेड़ के तने से बान्ध दिया था। इसीलिए उन्हें दामोदर (दाम + उदर जिसका पेट रस्सी से बन्धा हो) कहा जाने लगा। यह तो हुआ दाम का बन्धनकारक यानी रस्सी के आशय वाला भाव। आश्रय सूचक भाव वाली व्याख्या भी है। दाम का अर्थ विश्व या लोक से ग्रहण करते हुए इसका अर्थ-जिसके उदर में सारा विश्व हो, यह भी बताया जाता है। हिन्दी में अदवान, अदवाइन जैसे शब्द भी हैं जिनसे रस्सी का आशय निकलता है। अदवाइन या अदवान चारपाई के पैंताने की ओर वाली रस्सी की उस बुनावट को कहते हैं जिसके जरिए चारपाई के झोल को कसा जाता है। टर्नर के अनुसार यह बना है अन्तदमनी से जबकि शब्दसागर के मुताबिक यह अधःदाम से बना है। दोनों में ही दाम शब्द का महत्व है। बाकी अन्त और अधः का भाव भी एक ही है। प्रायः सभी कोशों में दामनी को एक रस्सी या वह आवरण बताया जाता है जिसे घोड़ों के पुश्त पर धूप से बचाव के लिए डाला जाता है। दामनी का एक अर्थ मद्दाह साहब के कोश में महिलाओं की ओढ़नी भी बताया गया है। दामनगीर उस व्यक्ति को कहते हैं जिसने आश्रय के लिए साथ पाया हो, दामन पकड़ा हो। वह साया, छाया अथवा आश्रय जिसकी छत्रछाया में हम महफ़ूज़ रहें, उसे दामने-दौलत कहते हैं। मित्र का साथ ही दामने-यार है और रात का आखिरी पहर दामने-शब है।

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4 कमेंट्स:

प्रवीण पाण्डेय said...

इतने दिनों से बँधा बँधा लग रहा था, आज कारण स्पष्ट हुआ।

singhSDM said...

इस सफ़र में हम तो ऐसे जुड़े हैं कि हर बार यह कहना कि पोस्ट अच्छी लगी रस्मी सा लगने लगा है ...... मगर मजबूर हैं फिर से कहेंगे पोस्ट हमेशा कि तरह अच्छी है.

विष्णु बैरागी said...

यह पोस्‍ट पढ कर मुझे तो एक ही बात समझ आई कि जब-जब भी शब्‍दों को कोई उलझन होगी तब-तब आपको दामनगीर बना लेना बेहतर होगा।

Baljit Basi said...

अदवान को पंजाबी में 'दौण' कहते हैं.. स्पष्ट है ये सम्बन्धत शब्द हैं. एक माथे का गहना होता है 'दौणी'. इसको हिंदी में दाविनी,दावनी, दांवनी, दामिनी कहते हैं. संस्कृत में दामन माथे के हार को कहते हैं. यह शब्द भी इस धातु से जुड़े हुए हैं. इसी धातु से बना एक अंग्रेज़ी शब्द है diadem जिसको हम मुकट कह सकते है. यह लातीनी और आगे ग्रीक से आया. इसमें dia का अर्थ आरपार और dem इसी धातु के ग्रीक रूप dein से बना है. इन्हीं अर्थों में फारसी शब्द 'दाहिम'. इसके और भी रूपांतर हैं.

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