Wednesday, December 14, 2011

जिगरी का गुर्दा और कलेजा

पिछली कड़ियाँ1.आखिर क्या है ये ‘सौहार्द्र’2.दिलो-दिमाग़ की बातें hearts

दि ल की बात निराली होती है, पर किसी ने सोचा नहीं होगा कि इतनी निराली होगी जहाँ जिगर दिल से ज़्यादा मज़बूत नज़र आएगा। गुर्दा भी दिल हो जाएगा और कलेजा भी दिल कहलाने लगेगा। मगर सच यही है कि हृदय को दिल तो कहा ही जाता है साथ ही कलेजा और जिगर भी इसके ही नाम है। पिछली कड़ी में स्पष्ट हुआ कि हृदय से ही दिल बना है। सवाल उठता है कि कलेजा और जिगर कहाँ से आए और क्यों दिल के पर्याय बन गए। मुझे लगता है मूलतः यह लोक-अभिव्यक्ति है। दिल के लिए वृक्क (किडनी) और यकृत ( लिवर ) जैसे महत्वपूर्ण शरीरांगों को क्रमश जिगर और कलेजा कहना सामान्य बात नहीं है। एक खास चीज़ के लिए कई सारी उपमाएँ या पर्याय तभी सामने आते हैं जबकि उसके ज़रिये कई तरह की अभिव्यक्तियाँ होती हों। चिन्तन-पीठ के स्तर पर दिल और दिमाग़ एक मुकाम पर खड़े नज़र आते हैं। यह अलग बात है कि दुनियावी मामलों में दिल की सोच को, दिमाग़ की सोच से कम तरज़ीह दी गई है, बावजूद इसके दिल के बाकी जितने भी पर्याय हैं वे सोचने का काम नहीं करते। उनका ज़िक्र जिस्मानी हिस्से या शारीरिक अवयव की तरह ही होता है।
बसे पहले दिल-गुर्दा की बात। इस शब्दयुग्म में भी मुहावरेदार अर्थत्ता है जिसका अर्थ होता है, शक्ति, सामर्थ्य और हिम्मत। मिसाल के तौर पर देखे-आसमान से छलाँग लगाना आसान नहीं, दिल-गुर्दे का काम है। अब यह गुर्दा शब्द सीधे सीधे दिल का पर्याय तो नहीं, पर दिल के साथ इसे अक्सर जोड़ा जाता है। खून को साफ़ रखने का काम करने वाले हिस्से के लिए हिन्दी में किडनी kidney या गुर्दा बेहद आम शब्द हैं। इसे संस्कृत में एक शब्द है वृक्क जिसका अर्थ है हृदय और गुर्दा। टर्नर के मुताबिक वृक्क शब्द में आंत, गुर्दा, हृदय, फेंफड़े जैसे सभी आन्तरिक अंगों की अभिव्यक्ति होती है। हृदय और गुर्दा शब्द के आदिमूल के साथ हृदय शब्द चस्पा था, इसीलिए बाद के दौर में जिगर या कलेजा जैसे भीतरी हिस्सों के साथ भी हृदय का अर्थ जुड़ता चला गया। वृक्क का अवेस्ताई रूप है वेरेत्का या वेरेद्त्का जिससे इसका पहलवी रूप प्राप्त होता है गुर्तक। फ़ारसी के उत्तरी सीमान्त क्षेत्रों में इसका गुर्दा रूप प्रचलित हुआ। हिन्दी में एक मुहावरा है-बुक्का फाड़ कर रोना। आमतौर पर यह माना जाता है कि वृक्क का अपभ्रंश बुक्का है। मगर  वृक्क का एक रूप वृक्का भी है और बुक्का human-organsभी इसी वृक्क से आ रहा है। अमरकोश के मनुष्य वर्ग के चौंसठवें श्लोक में “बुक्काग्रमांसं” में वृक्क का बुक्का रूप बनता दिख रहा है। टर्नर के कोश के मुताबिक पाली में यह वक्का है, सिन्धी में यह बोक्का है, जिप्सी-रोमानी और जिप्सी-ग्रीक में यह बुको है तो कुर्द में यह जुकुरा है। बहरहाल हिन्दी में बुक्का का अर्थ हृदय है। यह मूलतः संस्कृत रूप बुक्क से आया है। हृदय को चीर कर निकलते रूदन के लिए बुक्का फाड़कर रोना जैसा मुहावरा प्रचलित हुआ।
हिन्दी में दिल या हृदय के लिए कलेजा शब्द भी खूब प्रचलित है मगर इनके अर्थ-प्रयोगों में पर्याप्त भिन्नता है। जैसा कि ऊपर कह आए हैं, कलेजा सोचने का काम नहीं करता। दिल चुराया जाता है, कलेजा नहीं।  अलबत्ता दिल चीरने की तर्ज पर कलेजा चीरने की बातें भी हैं। कोई अपना, सगा सा अगर दिल का टुकड़ा है तो उसी तर्ज़ पर कलेजे का भी टुकड़ा होता है। हाँ, मांसाहारी लोग कलेजे के टुकड़े को कलेजी कह कर उदरस्थ कर लेते हैं। दिल के टुकड़े को दिली-चीज़  नहीं कहा जाता। कलेजा यूँ तो दिल का ही नाम है मगर इसका अर्थ लीवर भी होता है। लीवर जिसे संस्कृत में यकृत कहते हैं। कलेजा बना है संस्कृत के कालेयम् से। गहरे लाल या कालिमा की हद तक लाल रंग के इस अवयव को अपने वर्ण की वजह से ही यह नाम मिला होगा।  इंडो-ईरानी भाषाओं में का रूपान्तर अक्सर में होता है जैसे यश्न का जश्न रूप। यव् से जौ का बनना। कालेयम् का कलेजा में रूपान्तर समझना बहुत आसान है। प्राकृत में इसका रूप कलिया होता है। लहँदा, पंजाबी, हिन्दी, बांग्ला में यह कलेजा है। नेपाली में यह कलेजो, असमी में कॉलिजा है, अवधी में यह करेजा, करेजो, करेजू, करेजवा है। सिन्धी-कच्छी रूप करजो है। हिन्दी के लोकगीतों में कलेजा का करेजा, करेजवा जैसे रूप ही देखने को मिलते हैं जिनका अभिप्राय लीवर से नहीं बल्कि हृदय से होता है। दिल, जिगर सम्बन्धी ज्यादातर मुहावरे कलेजे के सन्दर्भ में भी प्रयोग होते हैं जैसे कलेजा फुँकना, कलेजा जलना, कलेजा निकाल कर रखना आदि।
ब खबर लेते हैं जिगर की। एक मशहूर शायर हुए हैं जिगर मुरादाबादी। ज़ाहिर सी बात है कि जिगर में अगर महज़ लिवर ही होता तो वे अपना तख़ल्लुस जिगर कतई न रखते। दिल में जो बात है, वो कुछ खास है। जिगर, कलेजा, गुर्दा इसलिए खास नहीं क्योंकि वे सिर्फ़ दिल नहीं, कुछ और भी हैं। बहरहाल दिल वाले तमाम मुहावरे जिगर पर भी फिट बैठते हैं। बस, जिगर चुराया नहीं, दिखाया जाता है और दिल चुराया भी जाता है, दिखाया भी जाता है। जिगर दिखाना यानी शौर्य का प्रबन्ध करना। शौर्य के सन्दर्भ में दिल के साथ जब गुर्दा जुड़ता है तब जिगर वाली बात पैदा होती है। जिगर, लिवर और संस्कृत का यकृत सगे भाई हैं यानी आदि भारोपीय भाषा से जन्मे हैं। के में तब्दील होने के नियम को याद रखा जानाचाहिए। यकृत के रूप अवेस्ता में याकर, यकारा होता है तो सुदूर लैटिन में यह जेकुर है। पहलवी में यह जकार और फिर जगार हुआ। इसके बाद फ़ारसी में यह जिगर हुआ। कुर्द में यह जर्ग़ है। जिगर का एक रूप होता है दिगर जो कुछ अफ़गानी ज़बानों में है। इसका पश्तो रूप लिगर बनता है। यही प्रक्रिया सुदूर यूरोप की अंग्रेजी में भी घटी जहाँ इसका रूप लिवर हुआ। दिल का टुकड़ा, कलेजे का टुकड़ा की तर्ज़ पर जिगर का टुकड़ा भी प्रसिद्ध मुहावरा है। यह फ़ारसी के लख्ते जिगर से आया है जिसका अभिप्राय सन्तान से है। यारी-दोस्ती की पुख्तगी बताने के लिए जिगरी शब्द भी आजकल चलन में है। जिगरी यानी जो दिल के क़रीब हो।

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6 कमेंट्स:

प्रवीण पाण्डेय said...

दिल, कलेजा, जान
हर नुक्कड़ पर फेंकने वाले मिल जायेंगे,
पर बिना उनके कैसे रह पायेंगे।

सोनू उपाध्‍याय said...

वाह बहुत ही बढिया अजीत जी.. कमाल है.. मुझे जिगर इतना बडा हो सकता है पता ही नहीं था..

Dineshrai Dwivedi said...

बड़े दिल-गुर्दे वाली पोस्ट है।
मेरा मानना है कि शरीर के भीतरी अंगों के बारे में मनुष्य का ज्ञान धीरे धीरे विकसित हुआ है। निश्चित है उस के अनुसार इन शब्दों के अर्थों में भी अंतर आया होगा और नए भावों को व्यक्त करने को नए शब्दों की आवश्यकता भी महसूस हुई होगी। इस पोस्ट में मनु्ष्य के ज्ञान के विकास की यात्रा की झलक भी होती तो यह पोस्ट और महत्वपूर्ण हो जाती।

घनश्याम मौर्य said...

'दिल' का अच्‍छा पोस्‍टमार्टम किया है आपने।

Mansoor Ali said...

नॉन वेज आईटम का रोचक शाकाहारी प्रस्तुतिकरण !
दिल-गुर्दे पर कभी एक इंटरव्यू रूपी ब्लॉग [३ एपिसोड में] इस तरह व्यंगात्मक अभिव्यक्ति की थी २००८ में.
लिंक
http://mansooralihashmi.blogspot.com/search/label/%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B2%20-%20%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%87%20%E0%A4%AA%E0%A4%B0%20%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A5%89%E0%A4%97

विष्णु बैरागी said...

बाप रे! 'कतरा-ए-खूँ' को लेकर इतनी जद-ओ जहद? आपने यकीन दिला दिया कि दिल का मामला वाकई इतना आसान नहीं। समझने के दिल दमगुर्दा चाहिए।

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