Monday, December 12, 2011

दम्पती यानी घर के मालिक

couple
हि न्दी में घरबार, घरबारी या गृहस्थ ऐसे शब्द हैं जिनसे रिश्तों और प्रेम की डोर से बंधी एक ऐसी व्यवस्था का बोध होता है जिसे एक पारिवारिक परिसर कहा जा सकता है। ऐसा ही एक शब्द है दम्पती जिसमें निवास, आवास और आश्रय की महत्ता झलक रही है। आमतौर पर रोटी, कपड़ा और मकान किसी भी दाम्पत्य का आधार माने गए हैं। इसमें गौर करें तो मकान ही एक ऐसी व्यवस्था है जिसे साथ-साथ रहकर पति-पत्नी घर का रूप देते हैं, वर्ना रोटी और कपड़ा तो मनुष्य की वैयक्तिक मूलभूत आवश्यकताएँ हैं। विवाहपूर्व भी स्त्री और पुरुष किसी न किसी आश्रय में रहते ही हैं। वह घर उनके माता-पिता का होता है। विवाहित व्यक्ति को सबसे पहले भोजन और वस्त्र की नहीं, आश्रय की तलाश होती है। ऐसा स्थान जहाँ वे दाम्पत्य जीवन जी सकें। जहाँ रह कर वे दम्पती कहला सकें। सामान्य विवाहित जोड़े को दम्पती तभी कहा जाता है जब वह अपना आशियाना बना लेता है। देखा जाए तो घर-मालकिन और घर-मालिक जैसे शब्द दरअसल गिरस्त और गिरस्तिन के अर्थ में प्रयुक्त होते हैं। किराए के मकान में भी घर बसाया जा सकता है। दम्पती में इसी घर का भाव है, न कि मकान का। आमतौर पर पति शब्द में ही घर-मालिक का भाव मौजूद है मगर दम्पती जैसा एक शब्द ऐसा भी है जिसमें पति-पत्नी के भाव के साथ दोनों को समान रूप से घर-मालिक, गृहस्वामी बताया गया है।

हिन्दी में संस्कृत मूल के दम्पति का दम्पती रूप प्रचलित है जिसका अर्थ है पति-पत्नी। संस्कृत में दम्पति का जम्पती रूप भी है। मोनियर विलियम्स के संस्कृत कोश में दम का अर्थ घर, मकान,आश्रय बताया गया है वहीं बांधने का, रोकने का, थामने का, अधीन करने का भाव भी है। यही नहीं, इसमें सज़ा देने, दण्डित करने का भाव भी है। अनिच्छुक व्यक्ति या जोड़े को चहारदीवारी में रखना दरअसल सज़ा ही तो है।  दम्पति का एक अन्य अर्थ है गृहपति। पुराणों में अग्नि, इन्द्र और अश्विन को यह उपमा मिली हुई है। दम्पति का एक अन्य अर्थ है जोड़ा, पति-पत्नी, एक मकान के दो स्वामी अर्थात स्त्री और पुरुष। दम् की साम्यता और तुलना द्वन्द्व से भी की गई है जिसमें द्वित्व का भाव है अर्थात जोड़ी, जोड़ा, युगल, स्त्री-पुरुष आदि। जो भी हो, दम्पति में एक छत के नीचे साथ-साथ रहने वाले जोड़े का भाव है। आजकल सिर्फ़ पति-पत्नी के अर्थ में दम्पति शब्द का प्रयोग होने लगा है जबकि इसमें घरबारी युगल का भाव है। दम्-पति अर्थात घर के दो स्वामी।
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विवाह संस्था के दो रक्षक यानी पति-पत्नी, एक छत के नीचे जीवन-यापन करता युगल यानी पति-पत्नी। ज़ाहिर इसमें उनके घरबारी होने का ही भाव है। दम्पती से बना है दाम्पत्य। यह शब्द वैवाहिक स्थिति को दर्शाता है अर्थात पति-पत्नी के साथ साथ रहने की अवस्था ही दाम्पत्य है। मगर सिर्फ साथ साथ रहना दाम्पत्य नहीं है बल्कि  एक दूसरे के अधीन हो जाना, एक दूसरे को सहारा देना ही दाम्पत्य है। मगर अनिच्छित दाम्पत्य सज़ा से कम नहीं होता। 

ह जो दम् शब्द है, यह भारोपीय मूल का है और इसमें आश्रय का भाव है। आश्रय के अर्थ में भारतीय मनीषा में धाम शब्द का बड़ा महत्व है। धाम का मोटा अर्थ यूं तो निवास, ठिकाना, स्थान आदि होता है मगर व्यापक अर्थ में इसमें विशिष्ट वास, आश्रम, स्वर्ग सहित परमगति अर्थात मोक्ष का अर्थ भी शामिल है। धाम इंडो-यूरोपीय भाषा परिवार का शब्द है। प्राचीन भारोपीय भाषा परिवार की dem/domu धातुओं से इसकी रिश्तेदारी है जिनका अभिप्राय निर्माण से है। संस्कृत धातु धा इसके मूल में है जिसमें धारण करना, रखना, रहना, आश्रय जैसे भाव शामिल हैं। यूरोपीय भाषाओं में dome/domu मूल से कई शब्द बने हैं। गुम्बद के लिए अंग्रेजी का डोम शब्द हिन्दी के लिए जाना पहचाना है। सभ्यता के विकासक्रम में डोम मूलतः आश्रय था। सर्वप्रथम जो छप्पर मनुष्य ने बनाया वही डोम था। बाद में स्थापत्य कला का विकास होते होते डोम किसी भी भवन के मुख्य गुम्बद की अर्थवत्ता पा गया मगर इसमें मुख्य कक्ष का आशय जुड़ा है जहां सब एकत्र होते हैं। लैटिन में डोमस का अर्थ घर होता है जिससे घरेलु के अर्थ वाला डोमेस्टिक जैसा शब्द भी बनता है । अवेस्तन में इसका रूप दंग-पैतोइस होता है । अंग्रेजी के डेस्पट शब्द पर गौर करें जिसका अर्थ निरंकुश शासक या तानाशाह है । यह मूलतः ग्रीक पद despótēs से विकसित हुआ है जिसका अर्थ शासक, पालक है और इसका रिश्ता भी लैटिन के डोमस domus से है । भारोपीय पद डेम-पोटिस से इसकी समतुल्यता गौरतलब है । यह गौरतलब है कि रोमन संस्कृति में जो डेमपोटेस महल में रहनेवाले शासक के अर्थ में सिर्फ़ पुरुषवाची सर्वसत्ता का प्रतीक था, भारतीय संस्कृति में दम्पती के अर्थ में उसमें पति-पत्नी की अर्थवत्ता और सत्ता स्थापित हुई ।
सीधे सरल स्वभाव वाले व्यक्ति को शालीन कहा जाता है। शाल् यानी रहने का स्थान, शाला, धर्मशाला, पाठशाला आदि इससे ही बने हैं। संस्कृत का शालः बना है शल् धातु से जिसमें तीक्ष्ण, तीखा, हिलाना, हरकत देना, गति देना, उलट-पुलट करना जैसे भाव है। ये सभी भाव भूमि में हल चला कर खेत जोतने की क्रिया से मेल खाते हैं। हल की तीक्ष्णता भूमि को उलट-पुलट करती है। शालः शब्द के मूल में बाड़ा अथवा घिरे हुए स्थान का अर्थ भी निहित है। डॉ रामविलास शर्मा के मुताबिक शालीन वह व्यक्ति है जिसके रहने का ठिकाना है। मोटे तौर पर यह अर्थ कुछ दुरूह लग सकता है, मगर गृहस्थी, निवास, आश्रय से उत्पन्न व्यवस्था और उससे निर्मित सभ्यता ही घर में रहनेवाले व्यक्ति को शालीन का दर्जा देती है। कन्या के लिए हिन्दी का लोकप्रिय नाम शालिनी संस्कृत का है जिसका अर्थ गृहस्वामिनी अथवा गृहिणी होता है। व्यापक अर्थ में गृहस्थ ही शालीन है। स्पष्ट है कि आश्रय में ही शालीनता का भाव निहित है। जिसका कोई ठौर-ठिकाना न हो वह आवारा, छुट्टा सांड जैसे विशेषणों से नवाज़ा जाता है। हमेशा घर में रहनेवाले व्यक्ति को घरू या घरघूता, घरघुस्सू आदि विशेषण दिये जाते हैं। –अगली कड़ीः घरबारी होना, गिरस्तिन बनना
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4 कमेंट्स:

प्रवीण पाण्डेय said...

चलिये हम दम्पति बन चुके हैं।

Shah Nawaz said...

वाह! ज़बरदस्त जानकारी!

सोनू said...

घरघुस्सू के साथ घरघुसरा भी।

विष्णु बैरागी said...

दम्‍पती/दम्‍पति और शालीन के मूल अर्थ चौंकाते हैं और यह भी बताते हैं कि 'लोक' किस प्रकार अर्थ बदल देता है।

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