Sunday, December 11, 2011

डेरा डालना, डेरा उठाना

Tent Campपिछली कड़ीः भेद की दीवारें, दीवारों के भेद 
कि सी स्थान पर अस्थाई मुकाम या पड़ाव के लिए हिन्दी में डेरा शब्द बहुत प्रचलित है। खेमा, तम्बू, टेन्ट, झोपड़ी, मकान, मन्दिर, मकान, ठिकाना और छोटी बस्ती के लिए डेरा शब्द प्रयुक्त होता है। इस शब्द में मुहावरेदार अर्थवत्ता है। डेरा वैसे तो आश्रय शब्दावली से निकला शब्द है जिसमें आवास, निवास और रहवास का भाव है मगर यह समूहवाची भी है। डेरा एक मोहल्ला, ढाणी, पिण्ड के अलावा धार्मिक या जातीय पहचान वाले समूह की बसाहट भी हो सकता है और सामान्य अर्थों में तम्बू, छोलदारी या अस्थायी बस्ती भी। डेरा अपने आप में पंथ का पर्याय भी है। भारत के पश्चिमी सीमान्त पर आज़ादी से पहले डीआई खान या डीजी खान जैसे नामों वाली बस्तियाँ थीं जिनमें डेरा शामिल था जैसे डेरा इस्माइल खान या डेरा ग़ाजी खान। इनके नाम से ही ज़ाहिर होता है कि कभी यहाँ इस्माइल खान या ग़ाज़ी खान जैसे किसी योद्धा ने अपने लावलश्कर के साथ शिविर डाला होगा। डेरा बस्सी, डेरा बाबा नानक जैसी और भी बस्तियों के नाम हम सबने सुने हैं।

हिन्दी कोश डेरा की व्युत्पत्ति को लेकर एकमत नहीं हैं। शब्दसागर में डेरा का आशय अस्थायी मुकाम, ठहराव से जोड़ते हुए इसका अर्थ मण्डली, गोल, निवास, कैम्प, छावनी आदि बताया गया है। इसकी व्युत्पत्ति ठहरना या ठहराव के ठेठ देसी उच्चारण ठैराव या ठैरना से बताई गई है। यह युक्तिसंगत नहीं है। डेरा शब्द उत्तर भारत की सभी भाषाओं में इसी रूप में प्रचलित है। डेरा में अस्थायी मुकाम, कैम्प, शामियाना, खैमा जैसे भाव ठैरना और ठैराव से अभिव्यक्त नहीं होते। दूसरी बात यह कि ये दोनों शब्द भी इन रूपों में बहुत कम व्यवहार में हैं। कुछ कोशों में डेरा का रिश्ता पर्शियन और पहलवी से बताया है। टर्नर के अनुसार पर्शियन में इसका रूप डेरा होता है जबकि पहलवी में यह डेरो है। जॉन प्लैट्स के कोश में हिन्दी देहरा का रूपान्तर देरा से होने की सम्भावना जताई गई है। हिन्दी में देहरा या देवरा शब्द देवालय का अपभ्रंश है। क्रमश ह और व को लोप से इनके देवघर > देवहर > देवरा और देवघर > देवहर > देहरा जैसे दो रूप प्राप्त होते हैं जो हिन्दी की बोलियों में प्रचलित हैं। देहरा का अर्थ है मकान, निवास, आशियाना, तम्बू अथवा देवस्थान। देवरा और देहरा उत्तर भारत में कई स्थानों के साथ जुड़ा नज़र आता है। राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल रामदेवरा और देहरादून में यह स्पष्ट है। देहरा का आशय यूँ तो देवस्थान से ही है पर देहरादून के सन्दर्भ में यह डेरा का रूपान्तर भी हो सकता है। सिखों के सातवें गुरु हरराय जी के पुत्र बाबा रामराय के 1675 में दून घाटी आने का उल्लेख है। विभिन्न सन्दर्भों से पता चलता है कि उन्होंने दून घाटी में पड़ाव डाला था तब से ही इस स्थान की पहचान देहरादून (डेरादून) हुई। देहरादून में दून का अर्थ है घाटी। यह शब्द बना है द्रोणि से जिसका अर्थ होता है पर्वतीय उपत्यका, घाटी, वैली। हिन्दी का दोना इससे ही बना है। जहाँ तक देहरादून के देहरा की व्युत्पत्ति का प्रश्न है , तमाम विकल्पों के साथ फ़ारसी के देह / दिह से भी देहरा की व्युत्पत्ति सम्भावित है । देह / दिह में गाँव, दीवार, परकोटा जैसे भाव हैं । इस तरह देहरादून का अर्थ हुआ वादी का गाँव । ग्वालियर के पास एक घाटीगाँव भी है । फ़ारसी के दहलीज में 'देह' को देखा जा सकता है । देहरा, देहरी ( देहली) भी दरवाज़े या चौखट की अर्थवत्ता रखते हैं । इस तरह देहरादून का अर्थ हुआ दर ऐ वादी अर्थात घाटी का दरवाज़ा । वह बस्ती जहाँ से द्रोणिका अर्थात दून घाटी शुरू होती है ।
प्रश्न यह है कि देहरा से डेरा को उद्भूत मानें तो शिविर, तम्बू के अर्थ में डेरा भाव का आशय इसमें स्पष्ट नहीं है। डेरा को प्रचलित शब्द मानें और सिर्फ़ देहरादून वाले देहरा का रिश्ता भी कैम्प के अर्थ में डेरा से जोड़ें तब डेरा कहाँ से आया। डेरा bedouinशब्द में सेमिटिक स्रोत से आया है, ऐसा लगता है। प्राकृतिक आश्रयों की आदिम व्यवस्था से आगे बढ़ कर जब कबीलाई घुमंतू समाज ने खेमों में बसेरा करना सीख लिया था। आदिम समाज की बसाहट छोटे छोटे समूहों में होती थी। कोई एक समूह भी एक गोल, मण्डलाकार आकार के तम्बू में रहता था। यूँ भी कोई समूह जब एक साथ होता है तो बैठने की व्यवस्था गोलाकार, मण्डलाकार ही होती है ताकि सभी एक दूसरे के सम्मुख रहें और इस समूह में किसी अन्य के प्रवेश न करने के लिए सुरक्षा-चक्र भी बन जाए। एक दूसरे के सम्मुख होने से समूह दसों दिशाओं में नज़र भी रख सकता था। मूल बात बसाहट की गोलाकार व्यवस्था है। सेमिटिक धातु d-y-r में फिरना, घूमना, मुड़ना, पलटना, वक्र होना जैसे भाव है। अरबी में इससे बना दाइरः अर्थात गोल, घेरा, परिधि, मण्डल आदि। इसके अलावा इसमें मजलिस, सभा, परिषद, परिवार का भाव भी है। यही नहीं, दायरा के दायरे में मोहल्ला, टोला, बस्ती, आश्रम, परिसर का आशय भी है।
रबी के दाइरः का हिन्दी रूप ही दायरा है। इन तमाम अर्थों में मूल बात जो उभर रही है, वह सुरक्षित आश्रय है। इस धातु का एक और रूपान्तर है d-w-r जिससे बना है दर और इसमें भी यही सारे भाव हैं अर्थात घर, मकान, परिवार, आश्रय आदि। अमेरिकन हेरिटेज डिक्शनरी के मुताबिक ये सभी भाव अरब के मूल निवासी खानाबदोश बेदुइन के रहने के ठिकानों अर्थात तम्बुओं, खेमों के लिए प्रयुक्त होते रहे जिन्हें दर, दार, दाइरः कहा जाता रहा। इंडो-ईरानी परिवार की कई लोकभाषाओं में दन्त्य का रूपान्तर मूर्धन्य में होता है। सिख विकी के मुताबिक पंजाबी का डेरा शब्द फ़ारसी के दैर का रूपान्तर है। गौरतलब है कि फ़ारसी में दैर अरबी से आया है जहाँ इसका अर्थ विहार, मठ, आश्रम, देवालय, उपासनास्थल आदि। है। इसी धातु मूल से उपजा दयार शब्द भी हिन्दी-उर्दू में प्रचलित है। दयार का अर्थ भी मकान, घर आश्रय होता है। कुछ विद्वान इन सभी शब्दों में भारोपीय dhwer की झलक भी देखते हैं। संस्कृत का द्वार, रूसी का द्वेर, फ़ारसी का दर, अंग्रेजी का डोर, फ़ारसी का दर्रा ( घाटी, दरवाज़ा ), दरवाज़ा जैसे शब्दों की रिश्तेदारी भी दर, दार, दाइर से है। 
सेमिटिक धातु d-w-r या d-y-r दिर पर गौर करें। मुझे लगता है डेरा का आदिस्त्रोत कहीं न कहीं इंडो-ईरानी परिवार की बहुप्रयुक्त आदिक्रिया वर् में निहित है जिसमें घूमने, घेरने का भाव है जिसकी व्याख्या आवरण, रक्षा कवच में होती है। कवच किसी वस्तु, स्थान या व्युक्ति को चारों ओर से सुरक्षित बनाता है। वर् से ही बनता है वार जो मनुष्यों और पशुओं के लिए सुरक्षित स्थान का नाम है। लोकभाषा में बाड़ा इसका आम प्रचलित रूप है। मराठी में वाड़ा मोहल्ला है तो पाड़ा हिन्दी में मोहल्ला है। बाड़ी बांग्ला में घर है और बाड़ा पशुओं का आश्रय है। वर् से बने वृ और दिर् की समानता पर गौर करें। इसी कड़ी में सेमिटिक दैर dair की तुलना दीवार के अवेस्ता मूल देगा-वरा dega-vara से करनी चाहिए। सम्भव है। अवेस्ता के ज़रिए पश्चिमी ईरान की ओर इस शब्द का सेमिटिक रूपान्तर dair दैर हुआ हो। ऐसा लगता है कि दैर, दायरा में जो मण्डलाकार, सुरक्षा घेरे का भाव है वह इंडो-ईरानी भाषाओं के किन्हीं आदिरूपों से सेमिटिक परिवार में दाखिल हुआ होगा। ज़ाहिर है सबसे पास का उदाहरण देगा-वरा का ही नज़र आ रहा है। देगा में सुरक्षात्मक संरचना और वरा में मण्डलाकार आकार, जिसमें भी सुरक्षा का ही भाव है, स्पष्ट नज़र आ रहा है। इसकी विस्तृत चर्चा पिछली कड़ी में की जा चुकी है।
डेरा शब्द की अर्थवत्ता का भारतीय भाषाओं में विस्तार हुआ। डेरा बस्ती भी है और बसेरा भी। तम्बू भी है और घेरा भी। मन्दिर भी है, मजलिस भी। मंजिल भी है और मकाम भी। अस्थायी मुकाम की अर्थवत्ता वाले इस शब्द में स्थायित्व भी समा गया। डेरेदार, डेरेदारिन, डेरेवाली जैसे शब्द उन खानदानी तवायफ़ों के लिए कहे-सुने जाते रहे हैं जो कभी बस्ती के बाहर रहती थीं। बाद में शहर में कोई जगह लेकर धन्धा करने वाली तवायफों के लिए यह शब्द रूढ़ हो गया। वैसे डेरेवाल, डेरेदार जैसे शब्द भी हैं जो शिविरार्थी के अर्थ में प्रयुक्त होते हैं। डेरा डालना मुहावरा भी है जिसका आशय कहीं विश्राम करना है। घर-गृहस्थी के साज़ो सामान के साथ कहीं और जा बसने के सन्दर्भ में डेरा-डण्डा उखड़ना जैसा मुहावरा भी प्रचलित है। इसमें प्राचीन घुमंतू समाज की स्मृति है। डेरा यानी तम्बू या छप्पर और डण्डा यानी उसका स्तम्भ। डेरा-डंगर भी ऐसा ही पद है। इसमें डंगर का तात्पर्य पशुओं से है। खानाबदोश समाज अपने मवेशियों के साथ ही एक स्थान से दूसरे स्थान पर भटकता फिरता था। ज़रूर देखें आश्रय शृंखला के सभी आलेख।
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4 कमेंट्स:

प्रवीण पाण्डेय said...

देखा जाये तो देह में आत्मा डेरा डालती है।

अजित वडनेरकर said...

@प्रवीण पाण्डेय
बहुत सही कहा आपने। आध्यात्मिक अर्थ में देह और आत्मा की व्याख्याएँ बहुत सुन्दर हैं।

sushma 'आहुति' said...

behtreen post...

Baljit Basi said...

मैं आप से सहमत हूँ कि डेरा शब्द की व्युत्पति अरबी के धातु से हुई. इसके आगे तो मैं कह नहीं सकता . हाँ, अरबी में इस मूल से बने बेशुमार शब्द मिलते हैं जिन में से कई तो हमारी भाषाओँ में भी घुल-मिल चुके हैं . दायरा के इलावा और शब्द हैं, दौर, दौरा, दौरी, मदारी( जो घूम घूम कर अथवा गोल अखाड़े में तमाशा दिखाता है), इदारा, दारोमदार वगैरा वगैरा. कई सिख श्रोत डेरा बाबा नानक और देहरादून में डेरा/देहरा शब्दों के अर्थ और तरह से करते हैं. इनको देवघर से भी नहीं जोड़ते बल्कि 'देह' से इसका नाता बताते हैं. अर्थात यहाँ गुरुनानक, गुरु हर राय के बेटे की 'देहों' का अंतिम संस्कार हुआ. पंजाबी की एक अखबार ने सर्वे किया, पंजाब में करीब ९००० डेरे हैं . पंजाब में १२००० गाँव हैं इस तरह हम कह सकते हैं कि औसतन एक गाँव में एक डेरा है. यह एक तरह के मठ या अखाड़े हैं जिनकी अपील तथाकथित निमन-जाती के लोगों को है. सिख धर्म सिधांतक रूप में गुरु ग्रन्थ साहिब को ही अपना गुरु मानता है और किसी भी देहधारी व्यक्ति की पूजा के विरुद्ध है. इसलिए मुख्यधारा के सिखों की इन डेरा वालों से टक्कर होती रहती है. पंजाब में पैदा हुए आतंकवाद में इस रुझान का बड़ा हाथ है. इसको 'डेरावाद' का नाम दिया गया है. 'डेरा सच्चा सौदा ' इस वक्त पंजाब का सब से बड़ा डेरा है जिसके पैरोकारों की गिनती चालीस लाख से भी अधिक है. 'डेरावाद' का रुझान पंजाब की विशेष राजसी/धार्मिक परस्थितियों की पैदावार है. सिख धर्म इसको आपने लिए सब से बड़ी चिनौती समझता है.

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