Sunday, December 25, 2011

दम मारो दम और नाक में दम-1

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Blow"संस्कृत,ज़ेद व यूरोपीय भाषाओं का तुलनात्मक करने वाले जर्मन भाषाविद प्रो.एफ बॉप ने अठारहवीं सदी में भारोपीय धातु ध्म की कल्पना की थी जिसमें फूँकने, दबाने का भाव है।"
क ज़बान से दूसरी ज़बान में दाखिल हुए शब्दों के लोकप्रिय होने के पीछे कुछ खास वजह होती हैं। पहली वजह यह हो सकती है कि वह शब्द जिस भाव को अभिव्यक्त करता है वह भाव या संज्ञा मूल भाषा में न हो। जैसे अंग्रेजी के स्टेयरिंग, ब्रेक, टिफिन जैसे शब्दों के आसान विकल्प हिन्दी में नहीं हैं। दूसरी वजह उस शब्द के वैकल्पिक मूल शब्द की तुलना में विदेशी शब्द का उच्चारण आसान या लुभावना होना जैसे प्रसन्न, मुदित, आनंद की तुलना में फ़ारसी का ख़ुश शब्द ज़्यादा इस्तेमाल होता है। तीसरे क्रम पर ऐसे विदेशी शब्द आते हैं जिनकी अर्थवत्ता मूल भाषा के वैकल्पिक शब्द की तुलना में ज्यादा होती है इस कड़ी में दम शब्द आता है। फ़ारसी के दम में जितने भाव है उन्हे व्यक्त करने वाला हिन्दी में कोई अकेला शब्द नहीं है। एक भाषा के शब्दों की घुसपैठ दूसरी भाषा में इन्हीं कारणों से होती है। अक्सर इसके पीछे किसी साजिश को देखा जाता है। दम शब्द को हिन्दी नें अपनाया है और अब यह हिन्दी का ही हो गया है। मूल रूप से यह इंडो-ईरानी भाषा परिवार का सदस्य है। इससे मिल कर खान पान की शब्दावली में दमआलू या दमपुख्त ( भाप में पकी सामग्री) जैसे शब्द बने हैं तो स्वास्थ्य सम्बन्धी दमा शब्द भी इसी कतार में है। फायर ब्रिगेड वाला दमकल इंजन भी इसके साथ ही खड़ा नज़र आता है तो सूफ़ी कव्वाली दमादम मस्त कलन्दर की याद भी आए बिना नहीं रहती। चलते चलते मुहावरों वाला नाक में दम भी याद कर लीजिए। 
म का अर्थ है श्वास, प्राणवायु, ज़ोर, धक्का, धौंकना, दबाना, क्षण, कालांश, भाप, दबाव, शक्ति, जोश, वाष्प, खींचना, कश, सेंकना, विश्राम, वाष्पित वगैरह वगैरह। ध्यान रहे ये तमाम अर्थ हिन्दी के किसी एक शब्द में अभिव्यक्त नहीं होते। अगर दम का मूलार्थ दबाव, धकेलना, फूँकना भी माना जाए तो इसका आशय शक्ति, श्वास, या क्षण नहीं हो सकता मगर दम के अर्थ विस्तार में यह हुआ है। हृदय की दो धड़कनों के बीच के अन्तराल को दम शब्द की अर्थवत्ता में इज़ाफ़ा कर दिया और इसमें क्षण या लम्हा का आशय उभर आया। फ़ारसी दम का मूल है अवेस्ता का दम शब्द है। इसका संस्कृत प्रतिरूप है धम् जिसमें धौंकने, फूँकने, धकेलने, निश्वास और फूँक कर आग सुलगाने का आशय है।

breathing... दम का मूलार्थ दबाव, धकेलना, फूँकना भी माना जाए तो इसका आशय शक्ति, श्वास, या क्षण नहीं हो सकता मगर दम के अर्थ विस्तार में यह हुआ है। ...

इंडो-ईरानी परिवार की ज्यादातर भाषाओं में जैसे खोतानी, पार्थियन, फ़ारसी, सोग्दियन और पहलवी में इसका दम रूपान्तर ही प्रचलित है। संस्कृत,ज़ेद व यूरोपीय भाषाओं का तुलनात्मक करने वाले जर्मन भाषाविद प्रो.एफ बॉप ने अठारहवीं सदी में भारोपीय धातु ध्म की कल्पना की थी जिसमें फूँकने, दबाने का भाव है। पकोर्नी इसके लिए
dhem धातु बताते हैं। उनके मुताबिक इसमें धौंकने के साथ साथ धूल-धुँआ उड़ने जैसा भाव भी है। वे अंग्रेजी के dim, damp जैसे शब्दों का रिश्ता इससे जोड़ते हैं। दक्षिण-पूर्वी ईरानी ज़बान पारची में इसका रूप धमन होता है जिसका अर्थ है हवा, वायु। हिन्दी में धम्मन चमड़े से बनी उस झोली ( भाथी )को कहते हैं जिसे दबाने से भट्टी में हवा पहुँचती है। हारमोनियम का हवा भरने का पल्ला भी धम्मन कहलाता है। प्राकृत में इसका रूप धमणी है अर्थात धौंकनी। हवा फूँकने की नली। 
संस्कृत धम में निहित फूँकने, धकेलने की क्रिया से श्वास लेने के आशय का शब्द चाहे हिन्दी में नहीं बना हो, पर इसके फ़ारसी रूपान्तर दम में यही सारे भाव होते हुए श्वास लेने का भाव भी प्रकट होता है। हृदय का काम लगातार फूलना-सिकुड़ना है जिसके ज़रिए नसों में दबाव के साथ खून दौड़ता है। हिन्दी में हृदय से ताज़ा रक्त शरीर के विभिन्न अंगों तक ले जाने वाली वाहिनी को धमनी कहती है। यह धमनी शब्द इसी धम से आ रहा है जिसका आशय है तेज दबाव वाली रक्तवाहिनी। प्राकृत में इसका रूप धमणी है अर्थात धौंकनी। हवा फूँकने की नली। हृदय दरअसल रक्तशोधन यन्त्र है। रक्त में यहाँ ऑक्सीजन मिलाई जाती है और उसे धक्के से धमनी के ज़रिए पूरे शरीर में दौड़ाया जाता है। अशुद्ध रक्त वाली वाहिनी को शिरा कहते हैं जो पूरे शरीर से अशुद्ध रक्त एकत्र कर फिर से हृदय तक लाती है। लुहारों-कसेरों के यहाँ छोटी भट्टी होती है जिसे बाँस या धातू की पोली फूँकनी से फूँका जाता है ताकि आग तेज़ हो सके। इसे धौंकनी कहते हैं। ज्यादा हवा यानी ज्यादा आक्सीजन। आग को हवा नहीं, आक्सीजन की दरकार होती है। संस्कृत में धमक शब्द का अर्थ फूँकने, धौंकने वाला है। धौंकनी भी इसी मूल का है। अलबत्ता हिन्दी के धमक, धमकी जैसे शब्दों की इससे कोई रिश्तेदारी नहीं है। मेरे विचार में ये दोनो शब्द अनुकरणात्मक हैं।
म् में निहित फूँकने, धकेलने की क्रिया का अर्थविस्तार ताक़त, शक्ति के अर्थ में फ़ारसी के दम में नज़र आता है। दम लगाना यानी ज़ोर लगाना है। चिलम या हुक्का पीने को “दम लगाना” या “दम मारना” भी कहते हैं जहाँ इसका अर्थ धुँए के कश को ताक़त के साथ भीतर खींचना है। गौरतलब है कि दम की तरह ही कश भी इंडो-ईरानी परिवार का शब्द है। संस्कृत का मूल शब्द है “कृष्” जिसका अर्थ है खींचना, धकेलना, उखाड़ना और हल चलाना। प्राचीन फारसी यानी अवेस्ता में भी “कृष्” शब्द इसी अर्थ में प्रचलित था। आज की फारसी में इसका रूप कश के रूप में मिलता है। कश यानी खींचना। गौर करें कि धूम्रपान में धुँएं को खींचा जाता है इसलिए इस क्रिया को कश कहा जाता है। इसी कश से बना कशिश जिसका मतलब भी आकर्षण है और खुद आकर्षण इसी कृष से बना है। कशमकश, रस्साकशी, मेहनतकश, नीमकश फाकाकशी जैसे शब्दों में भी यह मौजूद है। -जारी

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10 कमेंट्स:

प्रवीण पाण्डेय said...

दम और कश तो हम हिन्दी ही नहीं समझते थे, ये तो संस्कृत निकले।

चंदन कुमार मिश्र said...

शुरूआत में ही अच्छा लगा। कश हम भी अरबी-फारसी समझ रहे थे। मेरे गाँव के एक पंडित जी ने एक बार कृष्ण का अर्थ पूछा तब अचानक ध्यान आ गया था। कृष् से कृष्ण यानी जो अपनी तरफ खींचे। फिर आकर्षण भी ऐसे ही निकल आया।

आशा जोगळेकर said...

दम, धमणी, धमक, कृष, कृष्ण, आकर्षण और कश भी ।सब का मूल एक । मराढी में धमक शब्द हिम्मत के अरथ में प्रयोग होता है । शायद ज्यादा हिम्मत दिखाना ही धमकी देना होता होगा । रोचक यात्रा शब्दों की ।

विष्णु बैरागी said...

'कृष्' को लेकर तनिक जिज्ञासा पैदा हुई है। इसका सामान्‍य अर्थ 'दुबला', 'क्षीणकाय' लिया जाता है।

'कृष्' को 'आकर्षण' से जोडना गले नहीं उतर रहा। यह तो 'कर्षण' से बना है जो 'कृष्' से कहीं मेल खाता नजर नहीं आता। 'कर्षण' की मूल धातु 'कृष्' नहीं लगती।

सुलभ said...

बोलने के क्रम में एक मुहावरा "दम धरिये.." सहसा याद आया. आशय "विश्राम" से है.

अजित वडनेरकर said...

@विष्णु बैरागी
आदरणीय भैया,
दुबला, क्षीण, हीनस्वास्थ्य के अर्थ में जो कृशकाय है, कृषकाय नहीं।
'कर्षण' की मूल धातु 'कृष्' ही है। वर्ण विपर्यय हुआ है। रेफ् ने अपनी जगह बदल दी है। मोनियर विलियम्स के कोश
का हवाला दे रहा हूँ जहाँ कर्ष की मूल धातु कृष् है और धातु रूप में कृष् की प्रविष्टि भी समानार्थी ही है।

कर्ष [p= 259,3] [L=45537] m. ( √कृष्) , the act of drawing , dragging Pa1n2.
कृष् 1 [p= 306,1] [L=55083] to draw , draw to one's self , drag , pull , drag away , tear RV. AV. S3Br. &c ;

सादर, साभार

चंदन कुमार मिश्र said...

मुझे साफ पता नहीं था कि कृष्ण का यह अर्थ कितना सही है लेकिन अन्दाजा था कि सही है खीचने वाला अर्थ। क्योंकि कृषि शब्द भी तो खिंचाई के अर्थ में ही लगता है। हल का खिंचना...खेती ...और कृषक शब्द भी तो कृष से ही निकला लगता है फिर तो साफ होना चाहिए ही।

रोहित said...

इससे एकदम का अचानक वाला अर्थ तो समझ में आया। एकदम मतलब एक ही क्षण में। पर एकदम का जो दूसरा अर्थ है बिल्कुल, ठीक, पूरी तरह से, वो कैसे बना?

अजित वडनेरकर said...

@रोहित भाई, यह जो दूसरा अर्थ आप ले रहे हैं, वह पहले का ही तो पूरक है। एकदम यानी तत्क्षण। उसी साँस में। अब गौर करें कोई पूछता है कैसे हैं, जवाब में "एकदम ठीक" कहा जाता है। यहाँ एकदम यानी तत्क्षण है। बिना किन्तु-परन्तु के, जैसा हूँ, इस क्षण हूँ, वर्तमान में हूँ, ठीक हूँ...यह भाव इस एकदम में है। इस तरह चाहें तो पूरी तरह से, बिल्कुल जैसे भावों का विस्तार की व्याख्या इसे कह सकते हैं।

Baljit Basi said...

' कृष्ण' का सभी जगह काला अर्थ दिया गया है. आपको इसका संबंध आकर्षण से जोड़ते समय इस व्युत्पति का दलीलों सहित खंडन करना चाहिए तभी बात बनेगी. अलबत्ता इसका संबंध भारोपी मूल ker से भी जोड़ा जाता है जिसका अर्थ, आग, जलना बताया जाता है. इस तरह से अंग्रजी शब्द carbon, cremation,hearth और बहुत से भारोपी भाषाओँ के अनेक शब्द इसके सुजाति बताए जाते हैं. कहते हैं युक्रेन के शहर चेर्नोबिल (न्यूक्लियर दुर्घटना वाला) का नाम भी इस मूल से आया है.

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