Friday, September 26, 2008

पकौड़ियां, पठान और कुकर

28424012_b2827136c5 मजबूती के अर्थ में रोज़मर्रा की हिन्दी में पक्का शब्द खूब इस्तेमाल होता है जिसका रिश्ता भी पक्व से ही है। ईंट को आंच पर गर्म करते हैं तो वह मज़बूत होती है, पक्की होती है। इसी तरह जठराग्नि में अन्न को पका कर शरीर मज़बूत होता है।
कौड़ी जैसी शानदार चीज़ शायद ही किसी को नापसंद हो। नाम सुनते ही मुंह में पानी आने लगता है । बारिश का मौसम तो खासतौर पर गर्मागर्म पकौड़ों के लिए जाना जाता है मगर ज्यादा खा लेने से पाचन तंत्र के खराब होने का भी खतरा है। क्या आप जानते हैं कि पकौडे और कुकर में कुछ रिश्तेदारी है ? है न अजीब बात ! पकौड़ियों की रिश्तेदारी कड़ाही से हो सकती है, तेल से हो सकती है , पाचन से हो सकती है पर कुकर से तो हरगिज़ नहीं । मगर रिश्तेदारी है । इन दोनों बल्कि तीनों शब्दों का जन्म एक ही मूल शब्द ( धातु ) से हुआ है ।
भाषा विज्ञानियो ने इंडो-यूरोपीय भाषा परिवार में एक धातु खोजी है pekw पेक्व जिसका अर्थ है पकना या पकाना। लैटिन में इसका रूप हुआ कोक्कुस जो कोकस होते हुए पुरानी इंग्लिश के कोक coc में ढल गया और फिर इसने कुक का रूप धारण कर लिया। कुक यानी खाना बनाना । जाहिर है कुकर उस उपकरण का नाम हुआ जिसमें खाना जल्दी पकता है। पेक्व की सादृश्यता संस्कृत शब्द पक्व से गौरतलब है जिसका अर्थ पकाया हुआ होता है। पक्व शब्द बना है पच् धातु से जिसमें गर्म करना, भूनना, पूर्णता तक पहुंचाना या विकसित होना जैसे भाव शामिल हैं। पक्व क्रिया में भोजन का बनना भी शामिल है और उसे पचाना भी। पच् धातु से पाचक, पाचन, सुपाच्य जैसे शब्द बने हैं जिनका रिश्ता पके हुए भोजन से है। क्योंकि अगर भोजन पका हुआ नहीं है तो वह पचेगा नहीं।
काना अगर एक क्रिया है तो उसकी सम्पूर्णता उसके पचने में निहित है। पकौड़ी शब्द बना है पक्व+वटी > पक्कउडी > पकौड़ीवटी शब्द उसी वट् से बना है जिसमें गोल गोल बनाना, घेरना आदि भाव शामिल हैं और जिससे भारत के प्रमुख खाद्य पदार्थ जैसे भाजी बड़ा, वड़ापाव, आलू बड़ा (बोंडा) आदि बने हैं। पकवान शब्द भी पक्व+अन्न से बना है जिसका अर्थ तरह तरह के , घी में तले हुए अथवा भूने हुए भोज्य पदार्थ होता है। मजबूती के अर्थ में रोज़मर्रा की हिन्दी में पक्का शब्द खूब इस्तेमाल होता है जिसका रिश्ता भी पक्व से ही है। ईंट को आंच पर गर्म करते हैं तो वह मज़बूत होती है, पक्की होती है। इसी तरह जठराग्नि में अन्न को पका कर शरीर मज़बूत होता है। पुकाना शब्द का मुहावरों में खूब प्रयोग होता है जैसे खिचड़ी पकाना यानी गुप्त मंत्रणा करना, गोपनीयता बरतना। कान पकाना यानी किसी बात का जरूरत से ज्यादा दोहरा। 
फारसी का एक शब्द है पुख्ता । आमतौर पर इसका इस्तेमाल भी उर्दू-हिन्दी में खूब होता है। पुख्ता यानी मज़बूत, पका हुआ, टिकाऊ, पायेदार आदि। पुख्ता शब्द बना है फारसी के पुख्तः से जिसका मूल अवेस्ता की पच धातु ही है जिसमें पकाना, पकना का भाव शामिल है। फारसी पुख्त में पकना-पकाना जैसे भाव भी शामिल हैं। दमपुख्त एक ऐसी ही क्रिया है जो आमतौर पर मीट को कुकरनुमा बर्तन में भाप की गर्मी से पकाने के लिए कही जाती है। कुकर का उदाहरण यहां मौजूद है जो भाप की गर्मी से ही भोज्य पदार्थ को जल्दी पकाता है।
Paunk na Bhajiyaफ़गानिस्तान की भाषा पश्तो या पुख्तो कहलाती है। उस इलाके को पुख्तोनिस्तान या पख्तूनिस्तान भी कहते हैं। यहां के निवासी पख्तून या पश्तून कहलाते हैं। संस्कृत की एक धातु है पश् जिसका अर्थ है सुदृढ़, मज़बूत, ऊंचा , बुलंद । ध्यान दें कि जिस इलाके को पख्तूनिस्तान कहा जा रहा है वह समूचा पहाड़ी इलाका है। यहां पश् धातु में पहाड़ की मज़बूती और बुलंदी का भाव प्रमुख है। पश् को पष् मानें तो बनता है पाषाण अर्थात पहाड़ यानी बुलंद, मज़बूत, विराट, पुख्ता । फारसी में इसी मूल से निकला एक और शब्द है पज़ जिसका मतलब पका हुआ भी होता है और मज़बूत भी जो पष् का ही रूप है। हिन्दी उर्दू में मवाद के लिए जो पस शब्द का प्रयोग होता है उसका रिश्ता फोड़े के पकने से ही है। पख्तून का देशज रूप हुआ पठान जो हिन्दी में खूब इस्तेमाल होता है। पहाड़ का एक रूप होता है पठार जो इसी शब्द समूह का हिस्सा है। यानी पकौड़ों की रिश्तेदारी न सिर्फ कुकर से बल्कि काबुलीवाला यानी पठान से भी है जिसके पास आमतौर पर हम किशमिश बादाम की उम्मीद कर सकते हैं , पकौड़ों की तो हरगिज़ नहीं।

11 कमेंट्स:

अभिषेक ओझा said...

पकौडी बनाने में तो हम उस्ताद हैं... लेकिन ये सब नहीं जानते थे :-) अब बनाने के बाद लोगों को फंडे भी दे दिया करेंगे !

अनामदास said...

बेहद पकी हुई पोस्ट, बहुत ज्ञानवर्धक. सचमुच आनंद आया. पक्वड़ी खाते वक़्त, किसी पठान से बात करते समय, कुकर में दाल उबालते समय...आपकी याद आएगी.

लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` said...

ये तो गज़ब रीश्ता बतलाया आपने अजित भाई
पकौडी से कुकर वाला :)और पठान जी भी साथ !!

Gyandutt Pandey said...

शब्द चर्चा के साथ रेसिपी भी चाहिये थी पकौड़ी बनाने की। और नहीं तो लिंक।

दिनेशराय द्विवेदी said...

पकाने और कुक करने की इतनी नजदीक की रिश्तेदारी से तो ऐसा लगता है सारे शब्द आपस मैं भाई-बंद ही हैं। वैसे ही जैसे सारे इंन्सानों के पूर्वज अफ्रीकी

Ghost Buster said...

स्वादिष्ट जानकारी.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

स्वादिष्ट जानकारी दी है आपने ...इस लेख में

Mrs. Asha Joglekar said...

वाह क्या बात है आपके पठानी पकौडों की । क्या पक्का (पका नही )शब्द भी इसी की उपज है ?

Sanjay said...

एकदम दमपुख्‍त पोस्‍ट

प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल said...

पकौडे, पठान और कुकर से सजी पोस्ट. पकौडे देखकर मुह मे पानी आना स्वाभाविक है स्वादिष्ट लगी पोस्ट पकौडे के साथ.

प्रेमचंद गांधी Prem Chand Gandhi said...

बहुत ही उम्‍दा पोस्‍ट। सुस्‍वादु और सुपाच्‍य। बस आप इसमें उन व्‍यंजनों को बताना भूल गए, जिनके आगे 'पाक' प्रत्‍यय लगा होता है, जैसे सुपारीपाक, मोतीपाक, धनियापाक। वैसे पूरी पाक कला ही इससे जुड़ती है, एक पोस्‍ट में इससे ज्‍यादा और क्‍या लिखा जा सकता है। बधाई।

नीचे दिया गया बक्सा प्रयोग करें हिन्दी में टाइप करने के लिए

Post a Comment


Blog Widget by LinkWithin