Friday, September 5, 2008

मिर्जा एडमिरल उर्फ अमीरुल बह्र...

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अमीर खुसरो,मिर्ज़ा ग़ालिब और मीर तकी मीर जैसे कई और नाम हैं जिनके आगे लगे ये शब्द न होते तो वे इतने रसूख़दार न लगते

ब्दों के सफर में विदेशी मूल के ऐसे ढेरों आमफहम शब्द मिलेंगे जिन्होंने समतुल्य हिन्दी शब्दों को प्रचलन से हटाते हुए अपना प्रभुत्व कायम किया है। आज बोलचाल में उन्हें ही अपनाया जाता है। अरबी का अमीर ऐसा ही एक लफ्ज है जो श्रीमंत, धनवान, धनाढ्य, धनिक जैसे हिन्दी के पर्याय होने के बावजूद ज्यादा प्रचलित है।
मीर मूलतः अरबी भाषा का शब्द है और अरबी सौदागर की तरह ही इसने भी खूब यात्राएं की और अपने कुनबे को समृद्ध किया है। यह बना है अम्र से जिसका मूल अर्थ है नायक, सरदार अथवा अध्यक्ष । जाहिर है ये तमाम लफ्ज किसी न किसी पद का बोध भी कराते हैं और इनके साथ प्रभुत्व, अधिकार और प्रकारांतर से समृद्धि भी जुड़ी हुई है जिसकी वजह से इससे बने अमीर में नायकत्व से जुड़े इन तमाम भावों के साथ धनवान, धनाढ्य, धनिक जैसे अर्थ प्रमुख हो गए। अमीर का बहुवचन होता है उमरा । इसी लिए बादशाही दौर में सामंतों को अमीर-उमरा कहते थे। शुद्ध रूप में यह अमीर अल उमरा है जिसका मतलब होता है अमीरों का अमीर। तुर्की के सुल्तान की भी यह उपाधि थी क्योंकि किसी ज़माने में उसे ईस्लामी दुनिया में अव्वल दर्जा मिला था। उमरा से ही हिन्दी में उमराव शब्द बना है । उमरावजान और उमरावसिंह जैसे नामों में यही झांक रहा है।
मीर की महिमा का एक और रूप दिखता है मीर शब्द में । यह अमीर का ही संक्षिप्त रूप है मगर इसकी प्रथक सत्ता है। प्रायः राज्याश्रित कई पदों के साथ इसे जोड़ा जाता रहा है अथवा उपाधि के रूप में इसका प्रयोग होता रहा। मीरमुंशी अर्थात हैडक्लर्क। रीतिमुक्त धारा के सिरमौर कवि घनानंद मौहम्मदशाह रंगीले के दरबार में मीरमुंशी थे। मीरेकारवां, मीरबख्शी यानी तनख्वाह बांटने वाला अधिकारी, मीरमहफिल यानि सभापति आदि अनेक शब्द इससे बने हैं।
मिर्ज़ा शब्द भी इससे ही निकला है मगर यह अरबी नहीं बल्कि फारसी का है। अपने शुद्ध रूप में यह मीरज़ा है जिसका मतलब होता है शाही खून यानी राजपुत्र । यह शब्द भी मूल फारसी शब्द अमीरज़ादा का संक्षिप्त रूप है। अमीर यानी शासक ज़ादा यानी पुत्र अर्थात राजकुमार। मीरज़ा ने मुखसुख के आधार पर मिर्ज़ा रूप ले लिया । मीर और अमीर की तरह ही मिर्ज़ा शब्द का भी उपाधि या खिताब के तौर पर इस्तेमाल होता रहा है।
अमीर के नायकत्व वाला भाव अगर सर्वाधिक अगर सुरक्षित रहा है तो एक ऐसे शब्द में जो है तो अंग्रेजी का मगर मूल उसका भी रबी ही है। जलसेना अध्यक्ष को अंग्रेजी में एडमिरल कहा जाता है। यह बना है अरबी के अमीर अल बह्र से। यूरोप का इस शब्द से परिचय करीब ग्यारहवी सदी में क्रूसेड धर्मयुद्धों के दौर में हुआ जब उनका साबका अरब लड़ाकों से हुआ। अरबों की जलसेना जबर्दस्त थी और यूरोपवाले भी इसमें बढ़े-चढ़े थे। सबसे पहले कैटलन भाषा ने इसे अपनाया जो पश्चिमी भूमध्यसागरीय इलाके में बोली जाने वाली भाषा है। यहां इसका उच्चारण हुआ एमिरल। फिर पुर्तगाली में इसका रूपांतरण हुआ almirante जो अंग्रेजी में admyrall होता हुआ admiral के रूप में स्थापित हो गया।

6 कमेंट्स:

Udan Tashtari said...

जबरदस्त!!! बहुत आभार!

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

वाह! क्या बात है... जमाए रहें। हम रोज की तरह आज भी हाजिर हैं ज्ञान-गंगा में डुबकी लगाने को...

Dr. Chandra Kumar Jain said...

लफ्ज़ों की 'मीर बख्शी' किसी को
अल्फाजों का 'अमीर उल उमरा' भी
बना सकती है, इसका सुबूत आपका
यह सफ़र है....इसकी हर बात निराली है !
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हर दिन हम कुछ ज़्यादा अमीर हो जाते हैं,
गर आप न दिखे तो अधीर हो जाते है !

आपको शिक्षक-दिवस की शुभकामनाएँ
डॉ.चन्द्रकुमार जैन

दिनेशराय द्विवेदी said...

बहुत सारे शब्दों के अर्थ स्पष्ट हुए,जिन्हें पढ़ते बरस हो गए थे।

गौतम राजरिशी said...

....इतना अतुल्य भंडार और मैं अब तक इस से अछुता था. बहुत बहुत मेहरबानी अजीत जी....

मीनाक्षी said...

हज तो साल मे एक बार होता है लेकिन उमरा कभी भी किया जाता सकता है... मक्का मदीना उमरा करने लोग जाते है... उस पर कुछ जानकारी हो तो बताइए..

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