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Friday, January 21, 2011
लाहोल बिला कूबत इल्ला बिल्ला...
प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
12
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3:26 AM
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इस्लाम islam,
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Thursday, January 20, 2011
सम्पादक, एडिटर और मुदीरे-आला
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Monday, January 17, 2011
टैक्सी की तकनीक, टैक्स की दक्षता
पिछली कड़ियाँ--1.हाथों की कुशलता यानी दक्षता 2.दक्षिणापथ की प्रदक्षिणा
... टैक्सी taxi किसी ज़माने में टैक्सीमीटर कार हुआ करती थी अर्थात ऐसी सवारी गाड़ी जिसमें बैठने के बाद मनचाहे गंतव्य का भाड़ा अपने आप मीटर के ज़रिये पता चल जाए। इसकी शुरुआत जर्मनी में 1890 के आसपास मानी जाती है।...
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Friday, January 14, 2011
फ़रमान सुनें या प्रमाण मानें
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Wednesday, January 12, 2011
दक्षिणापथ की प्रदक्षिणा
पिछली कड़ी-हाथों की कुशलता यानी दक्षता
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Monday, January 10, 2011
‘चिरंजीव’ की ‘चिता’ से रिश्तेदारी
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प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
11
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पर
2:44 AM
Saturday, January 8, 2011
नाजाइज़ थी जज़िया की इजाज़त
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प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
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Sunday, January 2, 2011
अजीबोग़रीब में अजीब और ग़रीब की तलाश
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Saturday, January 1, 2011
छह साल से लिया है शब्दों से पंगा
... सफ़र के पाठक बलजीत बासी को सिर्फ़ एक साथी के तौर पर जानते हैं। बासी जी मूलतः पंजाबी के कोशकार हैं। पंजाब विश्वविद्यालय के अंतर्गत पंजाबी-अंग्रेजी कोश की एक बड़ी परियोजना से दो दशकों तक जुड़े रहे। ज़ाहिर है शब्द व्युत्पत्ति में उनकी गहन रुचि है।बाद में वह प्रोजेक्ट पूरा हो जाने पर वे अमेरिका के मिशिगन स्टेट में जा बसे। अब कभी कभार ही इधर आना होता है। वहाँ भी वे अपना शौक बरक़रार रखे हैं। अमेरिका में खासी तादाद में पंजाबीभाषी बसे हैं और इसीलिए वहाँ कई अख़बार, मैग़ज़ीन आदि इस भाषा में निकलते हैं। इनमें से एक है शिकागो, न्यूयॉर्क और सैनफ्रान्सिस्को से प्रकाशित होने वाला साप्ताहिक पंजाब टाइम्स, जिसमें वे नियमित स्तम्भ लिखते हैं। बासी जी ने इसके ताज़ा अंक में सफ़र के पुस्तकाकार आने के संदर्भ में एक परिचयात्मक आलेख लिखा है जिसका गुरुमुखी से देवनागरी में किया मशीनी अनुवाद खुद उन्होंने हमें भेजा है। उन्होंने ताक़ीद किया है कि इसमें से हम जो चाहें काट सकते हैं, सिवाय उन अल्फ़ाज़ के जो उन्होंने हमारी तारीफ़ में कहे हैं। हम पूरा आलेख दो किस्तों में छाप रहे हैं। आप समझ ही गए होंगे क्यों। अब सेल्फ प्रमोशन और मार्केटिंग का ज़माना है, सो हम भी पूरी बेशर्मी से अपने ही ब्लॉग पर मियाँ मिट्ठू बनने की हिमाक़त दिखा रहे हैं। पिछली कड़ी आपने पढ़ी-अमेरिकी पंजाबी पत्रिका में शब्दों का सफ़र अब अगली कड़ी पेशे ख़िदमत है।
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प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
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Friday, December 31, 2010
अमेरिकी पंजाबी पत्रिका में शब्दों का सफ़र
... सफ़र के पाठक बलजीत बासी को सिर्फ़ एक साथी के तौर पर जानते हैं। बासी जी मूलतः पंजाबी के कोशकार हैं। पंजाब विश्वविद्यालय के अंतर्गत पंजाबी अंग्रेजी कोश की एक बड़ी परियोजना से दो दशकों तक जुड़े रहे। ज़ाहिर है शब्द व्युत्पत्ति में उनकी गहन रुचि है।बाद में वह प्रोजेक्ट पूरा हो जाने पर वे अमेरिका के मिशिगन स्टेट में जा बसे। अब कभी कभार ही इधर आना होता है। वहाँ भी वे अपना शौक बरक़रार रखे हैं। अमेरिका में खासी तादाद में पंजाबीभाषी बसे हैं और इसीलिए वहाँ कई अख़बार, मैग़ज़ीन आदि इस भाषा में निकलते हैं। इनमें से एक है शिकागो, न्यूयॉर्क और सैनफ्रान्सिस्को से प्रकाशित होने वाला साप्ताहिक पंजाब टाइम्स, जिसमें वे नियमित स्तम्भ लिखते हैं। बासी जी ने इसके ताज़ा अंक में सफ़र के पुस्तकाकार आने के संदर्भ में एक परिचयात्मक आलेख लिखा है जिसका गुरुमुखी से देवनागरी में किया मशीनी अनुवाद खुद उन्होंने हमें भेजा है। उन्होंने ताक़ीद किया है कि इसमें से हम जो चाहें काट सकते हैं, सिवाय उन अल्फ़ाज़ के जो उन्होंने हमारी तारीफ़ में कहे हैं। हम पूरा आलेख दो किस्तों में छाप रहे हैं। आप समझ ही गए होंगे क्यों। अब सेल्फ प्रमोशन और मार्केटिंग का ज़माना है, सो हम भी पूरी बेशर्मी से अपने ही ब्लॉग पर मियाँ मिट्ठू बनने की हिमाक़त दिखा रहे हैं।
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प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
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Tuesday, December 28, 2010
जिन्न का जनाज़ा और जीनियस
अगली कड़ी-मजनूँ की औलाद और दीवाना
-जारी
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प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
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1:58 PM
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