Tuesday, March 2, 2010

सहज की खोज में सहजिया

रो जमर्रा की बोलचाल में सहज शब्द का खूब इस्तेमाल होता है। आखिर यह सहज है क्या? सरल, सामान्य, सुगम sc50 या साधारण जैसे अर्थों में सहज शब्द का प्रयोग होता है। वैसे सहज का अर्थ है प्रकृत या साधारण रूप में रहनेवाला। सामान्य बोलचाल से लेकर अध्यात्म तक इस शब्द की व्याप्ति है। सहज शब्द बना है सह+ज से। संस्कृत शब्द सह का अर्थ है सम्मिलन, साथ-साथ, सहित, मिलकर आदि। ज धातु में उत्पन्न होना, उद्भूत होना, पैदा होना, वंशज होना जैसे भाव हैं। इस तरह सहज का अर्थ है जो अपने मूल रूप में है अर्थात जिसमें अपना मूल स्वभाव निहित है। जो स्वाभाविक है, आनुवंशिक है। साथ-साथ जन्मा है यानी सहजात है। सहज में सहोदर का भाव भी है। यूं सहज में सामान्य, प्राकृतिक, नैसर्गिक स्थितियों का संकेत ही है जिसमें हमेशा एक सा बना रहना, आसान का अर्थ है। भक्ति आंदोलन (नवीं सदी से पंद्रहवी सदी तक) के दौर मे मगध क्षेत्र में सहजयान का जन्म हुआ। सहज शब्द का प्रयोग दार्शनिक अर्थों में खूब हुआ। सहज शब्द से बना सहजिया सम्प्रदाय कबीर के वक्त में प्रसिद्ध हुआ था। दरअसल मध्यकालीन भक्तिआंदोलन सिद्ध, नाथ, योगी सम्प्रदायों के जरिये बढ़ा जिनका मूल रूप से ब्राह्मण विचारधारा से टकराव था।
विद्वानों के अनुसार सहजिया सम्प्रदाय तांत्रिक बौद्ध परम्परा से जन्मा था जो सहजयान कहलाता था, बाद में यह सहजिया में रूपांतरित हुआ। इस धारा का विकास भक्तिकाल के दौरान कई अलग अलग भक्ति सम्प्रदायों में नज़र आता है। डॉ शशिभूषण दास के अनुसार यह गुह्य साधनावाले योगी सम्प्रदाय का बौद्ध प्रभावित रूप था। पश्चिमोत्तर के सूफी और बंगाल के बाउल / बाऊल भी इससे प्रभावित रहे। हजारी प्रसाद द्विवेदी की सहजसाधना पुस्तक के मुताबिक सहजयान Tantric बौद्धधर्म की महायान शाखा की उपशाखा मन्त्रनय से निकली तीन भक्तिधाराओं अर्थात वज्रयान, कालचक्रयान और सहजयान में एक है जिसमें शुरुआती दो धाराओं में मन्त्रों का महत्व है किन्तु सहजयान में मन्त्रों का महत्व नहीं है। सहजयानियों के मुताबिक सहजावस्था की प्राप्ति ही परमसुख है। निर्वाण और महासुख उसके ही पर्याय हैं। ब्राह्मणवाद के निषेध में यह पंथ खूब बढ़ा चढ़ा था। सरहपा का नाम सहजयानियों में सर्वप्रमुख है। सिखों में भी सहजधारी सिख होते हैं जो दाढ़ी-बाल आदि न रखते हुए सामान्य हिन्दुओं की तरह रहते हैं।
हजिया, सहजपंथ, सहजधारी, सहजयान जैसे शब्दों के अलावा भी सहज शब्द का प्रयोग होता है जैसे सहज समाधि जिसका तात्पर्य ध्यान की उस अवस्था से है जो बिना किसी आसन या तन्त्रसाधना के हासिल होती है। इसे ही सहजध्यान भी कहते हैं। सहजबुद्धि का अर्थ है सभी जीवधारियों में ईश्वरप्रदत्त वह चेतना या बुद्धि जिससे वे कुछ करने के लिए प्रेरित होते हैं या उन्हें उचित अनुचित का बोध होता है।

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16 कमेंट्स:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

हम सब सहजिया ही हैं। जो सहज जीवन जीते हैं।

Sanjay Kareer said...

सहज समाधि पाने के लिए जो साधना करनी होती है वह शायद सबसे कठिन है। बढि़या पोस्‍ट...

M VERMA said...

सहज ढंग से सहज शब्द को विश्लेषित किया.
साधुवाद इस सार्थक प्रयास को

Udan Tashtari said...

बहुत सहजता से समझ आ गया.

डॉ. मनोज मिश्र said...

अच्छा लगा ,आभार .

निर्मला कपिला said...

सुन्दर सहज पोस्ट । धन्यवाद

ali said...

शब्दार्थ सरल किन्तु व्यवहृति अत्यंत दुष्कर...अत्यंत दुर्लभ !

प्रवीण पाण्डेय said...

सहज का ज्ञान, सहजता से बता दिया ।

हिमांशु । Himanshu said...

सहजता से सब कुछ सहज बनाने का ठौर ही है यह ब्लॉग !
मेरे प्रिय शब्दों में से एक है यह ! आज इससे बेहतर परिचय हुआ । आभार ।

Mansoor Ali said...

होली की धमाल मस्ती से बाहर निकल कितनी जल्दी, सहजता से शब्दों के सफ़र पर गामज़न हो गए आप !

ख़ास रहने की है आदत हमको,
हम महज़ ही तो नहीं हो पाते,
बस सहज ही तो नहीं हो पाते!

पिंड कीचड़ से छुडाते रहते,
अपना दामन भी बचाए रहते,
हम जलज ही तो नहीं हो पाते!

-मंसूर अली हाशमी
http://mansooralihashmi.blogspot.com

Baljit Basi said...

ऐसा सतिगुरु जे मिलै ता सहजे लए मिलाइ
*
भाई रे गुर बिनु सहजु न होइ
*
जनम मरण दुखु काटीऐ लागै सहजि धिआनु
*
अजित भाई ही हमारे तो साचे गुरू हैं.

डॉ टी एस दराल said...

अच्छा लगा सहज ज्ञान।

वन्दना अवस्थी दुबे said...

वाह बहुत सहजिया पोस्ट..:)

अजित वडनेरकर said...

बलजीत भाई,
हम पर पाप न चढ़ाइये।

Kusum Thakur said...

आप सब्दों के सफ़र को बहुत ही सहज बना देते है ...!

'अदा' said...

कितनी सहजता से सहज को समझा दिया ...

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