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Wednesday, February 17, 2010
कथा-पुराण यानी पुरानी कहानी
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अजित वडनेरकर
12
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3:24 AM
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nature
Tuesday, February 16, 2010
फ़िरक़ों की अफ़रातफ़री, क़यामत आने को है…
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अजित वडनेरकर
14
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4:31 AM
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Sunday, February 14, 2010
बहादुर की जाति नहीं होती[माई नेमिज खान-2]
पिछली कड़ी-माई नेमिज खान बहादुर पठान [1]
| मध्यकाल में बहादुर शब्द की महिमा खान शब्द की तरह ही बढ़ती रही। शौर्यसूचक इस शब्द की व्याप्ति सिर्फ शासक वर्ग तक सीमित न रहकर आम लोगों में भी हुई। |
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अजित वडनेरकर
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Saturday, February 13, 2010
माई नेमिज खान बहादुर पठान [1]
... मार्कोपोलो ने अपने प्रसिद्ध यात्रा वर्णन में कुबलाई खान के बौद्ध होने और चीन में उसे खाकान कहने वाले कई प्रसंग बताए हैं...
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अजित वडनेरकर
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2:49 AM
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Friday, February 12, 2010
अजीत वह, जो पराजित होता रहे
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अजित वडनेरकर
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2:47 AM
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Thursday, February 11, 2010
रक्तपात, खूनखराबा और विरक्ति
पिछली कड़ियों-पहले से फौलादी हैं हम…और जब आंख ही से न टपका, तो फिर लहू क्या है....से आगे
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अजित वडनेरकर
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Wednesday, February 10, 2010
जब आंख ही से न टपका, तो फिर लहू क्या है....
पिछली कड़ी-पहले से फौलादी हैं हम…से आगे
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अजित वडनेरकर
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Tuesday, February 9, 2010
हुजूर, अंगूर नहीं, खट्टे हैं खजूर…
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अजित वडनेरकर
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Sunday, February 7, 2010
विश्व पुस्तक मेला में मित्रों से मिलना
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अजित वडनेरकर
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ब्लागिंग
कोई वाकौ देवांग कहै है…
प्रस्तुतकर्ता
अजित वडनेरकर
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रहन-सहन,
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