Monday, July 7, 2008

किस्सा- ए- बेवकूफी यानी एटलस

हिन्दी समेत दुनिया को ज्यादातर भाषाओं में विश्व के मानचित्र या नक्शों की किताब के लिए `एटलस´ शब्द चलन में है। भारत में भी कई एटलस प्रकाशित होते हैं। अक्सर एटलस के कवर पर एक विशाल आकार का आदमी अपने कंधों पर पृथ्वी को उठाए नज़र आता है। बताया जाता है कि ग्रीक पुराणों में `एटलस´ का जिक्र एक दानव के तौर पर हुआ है। यह उन खंभों की रक्षा करता है जिन पर स्वर्ग टिका हुआ है। अफ्रीका उत्तर पश्चिमी मुल्क मोरक्को में एक पर्वत श्रंखला का नाम भी एटलस है। वहां के लोगों की धारणा भी यही है की स्वर्ग इसी पर्वत पर टिका है।

रअसल बेल्जियम निवासी प्रसिद्ध भूगोल शास्त्री जेरार्ड्स मर्केटर (1512-1596 ) ने नक्शों के एक संग्रह का प्रकाशन कराया था जिसके शुरू में पृथ्वी को कंधों पर उठाए एक दैत्य की तस्वीर थी और नीचे `एटलस´ लिखा था। तभी से स्वर्ग के खंभों का रखवाला यह यूनानी राक्षस नक्शों की किताबों में अमर हो चुका है। मर्केटर पहले गणितीय उपकरण बनाते थे मगर बाद में धातु पर नक्काशी का काम सीखने के बाद उनकी दिलचस्पी मानचित्रों में जागी। मानचित्रों की दुनिया में मर्केटर का असल काम जर्मनी के ड्यूसबर्ग शहर आने के बाद हुआ।

ग्रीक पुराणों में दानवों (टाइटन्स) का उल्लेख है। एटलस भी एक दानव था। भारतीय पुराणों की तरह ही ग्रीक कथाओं में भी देव-दानवों के युद्ध प्रसंग हैं। तो एटलस एक बार देवताओं से हार गया और बतौर सज़ा उसे आकाश अपने कंधों पर उठाना पड़ा। क़िस्सा आगे तब बढ़ता है जब एक पुराणकालीन हीरो- हरक्यूलिस,जिसमें हर तरह के नायकोचित गुण थे, को अचानक सुनहरे सेब प्राप्त करने की इच्छा जागती है। उसे बताया जाता है कि सुनहरे सेबों की पैदावार जहां है वहां का पता तो सिर्फ एटलस ही जानता है। हरक्यूलिस एटलस के पास जाता है जहां वह कंधे पर आकाश उठाए सज़ा भुगत रहा होता है।

टलस सेब लाने को तैयार हो जाता है मगर उसकी परेशानी है कि आकाश को उठाए वह यहां वहां कैसे जाए ? उसकी बात को वाजिब मान कर हरक्यूलिस उसका बोझ अपने कंधे पर ले लेता है। एटलस जब सेब ले कर आता है तो दूर से ही हरक्यूलिस को देखता है, जिसकी इतनी सी देर में ही आसमान के बोझ से हालत पतली हो गई है। पसीने के धारे बह रहे हैं, हांफनी चल रही है (अपने हिन्दुस्तान में तो बच्चे ही आसमान सर पर उठा लेते हैं और उन्हें नहीं , दुनिया को पसीने छूटते हैं)। वह सोचता है कि अब फिर ये बोझ उठाना होगा , सो क्यों न सुनहरी सेब हरक्युलिस को थमा कर पतली गली से निकल लिया जाए !

धर हरक्यूलिस उसके दिल की बात भांप लेता है सो एटलस से कहता है कि भैया , एक मिनट के लिए इसे पकड़ना, ज़रा कंधे के नीचे कुछ गद्दा-चुमली लगा लूं। एटलस फिर से अपने कंधे पर आसमान थाम लेता है। अपनी बेवकूफी से खुद बुलाई बला के टलते ही हरक्यूलिस ने तो वहां से दौड़ लगाने में ही भलाई समझी और मूर्ख एटलस को गधापन दिखाने यानी दोबारा बोझ उठाने का फल यह मिला कि वक्त के साथ वह पहाड़ में बदल गया जिसे आज मोरक्को के एटलस पर्वत के नाम से जाना जाता है।

12 कमेंट्स:

सतीश पंचम said...

मजाकिया अंदाज में अच्छी जानकारी दी।

Udan Tashtari said...

हा हा!! भैया , एक मिनट के लिए इसे पकड़ना, ज़रा कंधे के नीचे कुछ गद्दा-चुमली लगा लूं और टिपिया दूँ, फिर वापस लेता हूँ अजित भाई. :) क्या अंदाजे बयां रहा.

अनूप शुक्ल said...

वाह्! ये लफ़ड़ा है एटलस् का। मुझे पता ही न् था।

विष्‍णु बैरागी said...

अच्‍छी जानकारी है । राहत इस बात की है कि 'एटलस' का न तो कोई शाब्दिक अर्थ है और न ही पर्याय वर्ना 'एटलस' ब्‍लाग विश्‍व में तूफान उठा देता ।

आपके परिश्रम को नमस्‍कार ।

दिनेशराय द्विवेदी said...

एटलस कथा सुनाने के लिए धन्यवाद! रोचक प्रस्तुति है। दुनियाँ भर में और संभवतः दुनियाँ की सभी भाषाओं में एक समान रूप से प्रयोग में लाया जाने शब्द है यह। यह एक बात और बताता है कि शब्द किसी भाषा विशेष की जागीर नहीं होता और उन्हें उदारता पूर्वक उपयोगिता के आधार पर कोई भी अपना सकता है। किसी भी भाषा के विकास में इस उदारता का सर्वाधिक योगदान होता है।

मीनाक्षी said...

रूखे विषय भी आप बहुत रोचक तरीके से कह जाते हैं.

PD said...

बहुत बढिया.. बचपन से ही एटलस देखता पढता आया हूं.. उसमें खूब रूची भी रही है.. मगर सच्चा अर्थ आज पता लगा.. :)

Dr. Chandra Kumar Jain said...

अद्भुत जानकारी.
आभार
================
डा. चन्द्रकुमार जैन

मीत said...

गज़ब है भाई. जानकारी तो है ही कमाल की, अंदाज़-ए-बयाँ भी लाजवाब.

Anonymous said...

वाह दिलचस्प था ...
-ऋचा तैलंग

pallavi trivedi said...

atlas aur harculis ki kahani to aaj pahli baar hi jani..sachmuch bahut rochak jankari rahi.

डा० अमर कुमार said...

सच में आपकी विशद खोजपरक लेखों ने मुझे
वडनेरकर एडिक्ट बना दिया है ।
सराही जाने योग्य पोस्ट ।

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