Wednesday, December 12, 2007

गाँठ बांधने का दौर [गठबंधन-1]

बीते कुछ बरसों से भारतीय राजनीति मे गठबंधन का दौर चल रहा है। अब इस गठबंधन की गाँठ कितनी पक्की होती है इसका नमूना खुद राजनीतिक ही पेश करते रहते हैं। हाल की ताजी मिसाल कर्नाटक की है। बहरहाल गठबंधन बड़ा मजे़दार शब्द है यह दो

अलग अलग शब्दों से मिलकर बना है गठ+बंधन। इस कड़ी में बात करते हैं पहले हिस्से यानी गठ की, अगली कड़ी में बंधन पर चर्चा होगी।
गठ शब्द बना है संस्कृत की धातु ग्रथ् से इससे ही बना है ग्रन्थः जिसका मतलब हुआ एक जगह जमा, झुण्ड, लच्छा, गुच्छा आदि। पुस्तक, किताब, साहित्यिक रचना, प्रबंध जैसे अर्थों वाला ग्रन्थ इसी से जन्मा है। गौर करें कि पुस्तक विभिन्न पृष्ठों का समुच्चय या झुण्ड है। ग्रन्थ से बनी ग्रन्थिः । इससे ही हिन्दी में बने गाँठ या गठान जिसका मतलब है रस्सी का बंधन, जोड़, उभार, जमाव आदि। गांठ जिस्म में भी पड़ती है और मन में भी। मन की गाँठ भी किन्हीं विचारों का जमाव ही है जो ग्रन्थि के रूप में हमारे व्यवहार में नज़र आता है।
कबिरा धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय ।
जोड़े से भी ना जुड़े , जुड़े गाँठ पड़ जाय ।।

शरीर की पेशियों, नसों में भी अक्सर ग्रन्थि विकसित हो जाती है जो त्वचा पर उभार ला देती है। इसे भी गाँठ ही कहते हैं। सिखों में जो पुरोहित होता है, ग्रन्थी कहलाता है। यह बना है संस्कृत के ग्रन्थिकः से । पुरोहितों का काम पोथी पुराणों के बिना चलता नहीं सो ग्रन्थ से जुड़ा ग्रंथी।
कपडों, किताबों या अन्य वस्तुओं की पैकिंग को गट्ठर कहा जाता है। पोटली को गठरी कहते हैं। ये भी ग्रंथ से बने हैं। अच्छी तंदुरूस्ती वाले को गठीला सजीला भी कहा जाता है।
फलों के बीज आमतौर पर गुठली कहलाते है जो इससे ही संबंधित है। एक कहावत ने तो आम की गुठली को ही मशहूर कर दिया है।
जब ग्रन्थ के पन्नों को जोड़ा जा रहा होता है तो इस क्रिया को ग्रन्थनम् कहते हैं। इससे ही बना है गाँठना। यानी चीज़ों को मिलाना, जमाना, एक साथ रखना। आज गाँठना शब्द से बने रौब गाँठना, रिश्ते गाँठना जैसे मुहावरे प्रचलित हैं। गाँठना शब्द आज नकारात्मक अर्थ में ही प्रयोग होता है। यानी जोड़-जुगाड़ में लगे रहना।
जब गाँठने की क्रिया सम्पन्न हो जाती है तो उसका गठन हो जाता है। यानी उसका समु्च्चय बन जाता है। एकता के अर्थ में संगठन शब्द इससे ही बना है। ग्रन्थ से बने और भी कई शब्द हिन्दी की विभिन्न बोलियों में तलाशने पर मिल जाएंगे जैसे - गठीला, गठौत , गठड़िया और गठजोड़ आदि।

आपकी चिट्ठी
पिछली पोस्ट सयानेपन की चाह में हो गए बुजुर्ग को अनूप जी, संजय जी, प्रमोद भाई और बालकिशन जी की सराहना मिली। आप सबका आभारी हूं।
संजयजी आपने स्यानपती का उल्लेख किया है वो इलाकाई प्रभाव है। मैने स्यानपत शब्द तक प्रयोग होते सुना है। ये बने सयानपंथ से ही हैं। बालकिशन जी जिस ढेर सयाना का उल्लेख कर रहे हैं दर हकीकत वह है डेढ़अक्ल वाला डेढ़ सयाना ही जो मराठी में दीड़ शहाणा के तौर पर प्रचलित है।


5 कमेंट्स:

Sanjay said...

कबीर का दोहा कई दिन बाद नजर से गुजरा तो पढ़ कर अच्‍छा लगा. गठ तो हो गया अब बंधन और कर दें ताकि गठबंधन पूरा हो जाए.

rajivtaneja said...

बहुत ही अच्छा एवं सटीक विवरण....

सदके जाएं आपकी पारखी नज़र के...

अपुन ने तो कभी गौर ही नहीं किया...

धन्यवाद...जानकारी के लिए

बोधिसत्व said...

अजित भाई
गूँथना किधर जाएगा...चोटी गूँथना....ऐसे ही जानने की चाह है...

बाल किशन said...

अच्छी जानकारी दी आपने एकबार फ़िर. आपको धन्यवाद.
एक शब्द पर ध्यान और विस्तार( अगर हो सके तो ) अगले अंक मे चाहूँगा. " हीन ग्रंथि" यंहा तो "ग्रंथि" शायद "भावना" के रूप मे इस्तेमाल हुआ है?

Baljit Basi said...

आप की बात सही है की सिखों में जो पुरोहित होता है, ग्रन्थी कहलाता है,लेकिन अगर यह कहा जाये कि सिख सन्दर्भ में सिखों के धर्म ग्रन्थ श्री गुरु ग्रन्थ साहिब का विधिवत रूप से पाठ करने वाले को ग्रन्थी कहा जायेगा तो अधिक सही होगा है. सिख पुरोहित शब्द से चिढ़ सकते हैं.

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