Monday, December 10, 2007

सयानेपन की चाह में हो गए बुजुर्ग

याना एक ऐसा लफ्ज है जिसे बचपन से जवानी तक हम अपने लिए सुनना ज़रूर चाहते हैं मगर सयानेपन की सिफत पैदा करते करते करते बुढ़ापा आ जाता है। दुनिया सिर्फ इस बुढ़ापे पर तरस खाकर हमें सयाना मान लेती है और हम दुनिया के इस सयानेपन को कभी नहीं समझ पाते और हमेशा उसे कोसते रहते हैं। बहरहाल, सयाना शब्द कहां से आया?
सयाना हिन्दी में भी है और उर्दू में भी। यह शब्द उपजा है संस्कृत के ज्ञान में सं उपसर्ग के मेल से। संज्ञान का अर्थ हुआ अच्छी तरह जाना हुआ, समझा हुआ। जिसे दुनिया का सम्यक बोध हो, जिसकी अनुभूतियां सचेत हों वह । इससे बना हिन्दी का सयान शब्द जिसका मतलब भी समझदारी, बुद्धिमानी और चतुराई है और फिर बुद्धिमान और चतुर के अर्थ में बना सयाना । आमतौर पर वयस्क अवस्था होने पर भी मनुश्य को सयाना कहा जाता है । जाहिर है समाज ने अनुभव से यह जाना है कि वयस्क होने पर बुद्धि आ ही जाती है। शादी के संदर्भ में आमतौर पर कहा जाता है- बेटी सयानी हो गई है , हाथ पीले करने चाहिए। इसी तरह गांवों में आमतौर पर प्रौढ़ अथवा बुजुर्गों को सयाना कहा जाता है । वजह वही है -एक खास उम्र के बाद यह मान लिया जाता है कि इसकी बुद्धि विकसित हो चुकी है और व्यावहारिक अनुभवों से भी उसने काफी ज्ञान जुटा लिया होगा। गांव - देहात में झाड़-फूक करने वाले के लिए भी सयाना शब्द खूब प्रचलित है। गोंडी समेत कई जनजातीय भाषाए आर्यभाषा परिवार की नहीं हैं इसके बावजूद यह शब्द इन भाषाओं में है। साफ है कि सदियों पूर्व आर्यों और जनजातियों के बीच भाषायी संपर्क ज़रूर होगा।
शब्दों की अवनति के संदर्भ में इस सयाना शब्द पर गौर करे। हिन्दी में आजकल ज्यादा अक्लमंदी या चालाकी दिखाने के संदर्भ में स्यानपंथी शब्द चलता है यानी ज्यादा चालाकी दिखाने की राह पर चलना। नेपाली उच्चारण की तर्ज पर मुंबईया ज़बान में श्याना, श्याणा शब्द है। इसका मतलब भी चालाक व्यक्ति से ही है। मराठी में सयाना शब्द का रूप है शहाणा। एक उपनाम भी है शहाणें। ज़रूरत से ज्यादा समझदारी दिखानेवाले के लिए हिन्दी उर्दू मे डेढ़अक्ल शब्द चलता है, उसी तर्ज पर मराठी में भी दीड़शहाणा शब्द प्रचलित है।

आपकी चिट्ठी-
पिछली पोस्ट - इसकी तो हिन्दी कर दी पर दस टिप्पणियां मिली हैं। सर्वश्री संजय, अभय तिवारी , भूपेन , ज्ञानदत्त पांडे , शिवकुमार मिश्र , आशा जोगलेकर , अनूप शुक्ल, संजीत त्रिपाठी, बालकिशन और आलोक पुराणिक का बहुत बहुत आभार । संजय, आपने जो सुझाव दिया है इंटरएक्टिव होने का वह पसंद आया। कोशिश यही रहेगी कि इस पर अमल कर सकूं ।

4 कमेंट्स:

Sanjay said...

आपने स्‍यानपंथी का उल्‍लेख किया तो जोड़ना चाहुंगा कि यहां बुंदेलखंड में इसका बिगड़ा स्‍वरूप स्‍यानपती चलता है. मुंबइया फिल्‍मों के डायलॉग्‍स में 'ओ श्‍याणे' जैसे शब्‍द तो अब बहुत आम हैं. आज से पचास साल बाद इस शब्‍दों के सफर में यही शब्‍द सयाने के साथ जुड़े हुए बताए जाएंगे. यूं ही तो चलता है शब्‍दों का सफरनामा.
अपुन का सुझाव आपको पसंद आया, ये जान कर लग रयेला है कि अपुन भी श्‍याणा हो गया बाप.
शुक्रिया!!

अनूप शुक्ल said...

सयानी पोस्ट। रेणुका शहाणे याद आ गयी।

Pramod Singh said...

अच्‍छा है, महाराज..

बाल किशन said...

सचमुच सायानी करने वाली पोस्ट है.
हाँ कभी कभी हिन्दी मे एक शब्द मैंने भी इस्तेमाल किया है और होते हुए देखा है जिसका मतलब हुआ अति चालक " ढेर सयाना"

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