Wednesday, December 30, 2009

मगजपच्ची से भेजा-फ्राई तक

brain

ब किसी मसले पर अत्यधिक सोच-विचार होता है तब अक्सर इसे मगजपच्ची या मगजमारी कहा जाता है यानी यानी बहुत ज्यादा दिमाग लगाना। स्पष्ट है कि मगज शब्द का अर्थ मस्तिष्क या दिमाग ही है। आमतौर पर हिन्दी में मस्तिष्क के अर्थ में दिमाग, मगज या भेजा जैसे शब्दों का ज्यादा प्रयोग होता है। दिमाग शब्द का प्रयोग अक्सर शिष्ट भाषा में होता है जबकि मगज या भेजा शब्दों का प्रयोग देशी बोलियों में खूब होता है और इन शब्दों की विशिष्ट अर्थवत्ता के चलते इनसे जुड़े मुहावरे भी खूब प्रचलित हैं। अनर्गल बोलनेवाले और बातूनी व्यक्ति की वाचिक-चेष्टाओं को भेजा चाटना, दिमाग चाटना या मगज चाटना कहा जाता है। मगजपच्ची का अर्थ है दिमाग पक जाना। इसी तरह मगजमारी में मस्तिष्क की सोचने-विचारने की क्षमता चुक जाने का भाव है।
गज और भेजा इंडो-ईरानी और इंडो-यूरोपीय मूल के शब्द हैं जबकि दिमाग अरबी मूल से आया है। संस्कृत में इसकी मूल धातु है मज्ज्। यह भी दिलचस्प है कि हिन्दी में मगज शब्द जहां फारसी से आया है वहीं भेजा शब्द इसके मूल तत्सम का तद्भव रूप है। मगज शब्द का मूल फारसी रूप मग्ज़ है। यह अवेस्ता के मज्ग mazga से बना है। इसका संस्कृत रूप है मस्ज् जिसका अर्थ है सार, तरल, रस आदि। इससे ही बना है संस्कृत और हिन्दी का मज्जा शब्द जिसका अर्थ है अस्थियों के भीतर का द्रव (बोनमेरो bonemarrow), वसा, चर्बी, पौधों का रस आदि। ध्यान रहे सार शब्द का मूल भाव रस में ही है। सार अर्थात निचोड़ शब्द से भी यह स्पष्ट है। मज्जनम् शब्द का अर्थ है डूबना, भीगना, द्रव में सराबोर होना। जीवशास्त्र के नजरिये से देखें तो भी मस्तिष्क खोपड़ी के भीतर एक द्रव के भीतर तैरता है। मस्तिष्क का काम है इंद्रियों से मिले संकेतों को ग्रहण कर उनका सार अर्थात अभिप्राय समझना, सो मज्जा शब्द में मस्तिष्क का भाव इसी रूप में स्थापित हुआ। मज्जा का अवेस्ता रूप हुआ मस्ग। वर्ण विपर्यय से इसका फारसी रूप हुआ मग्ज जिसमें इसके वे सभी अर्थ  सुरक्षित रहे जो मूल संस्कृत-अवेस्ता में थे यानी सार, तत्व, निष्कर्ष, नतीजा, अक्ल, बुद्धि आदि। फारसी मग्ज़ ने ही हिन्दी-उर्दू में मगज का रूप लिया।
संस्कृत में चर्बी के लिए मेद शब्द है। पृथ्वी को मेदिनी कहा जाता है क्योंकि यह सभी सभी पार्थिव पदार्थों का सार रूप है। मेद का एक अर्थ मस्तिष्क भी है। मेद का रिश्ता मज्ज् से है। मराठी में मस्थिष्क के लिए एक शब्द मेदू भी है। मेद में सार अर्थात गूदा का भाव भी है। गूदा क्या है? जैव-वानस्पतिक पदार्थों का वह रूप जिसमें से बीच, अस्थि या छाल की उपस्थिति न हो। अर्थात गूदा, सार है। मेद या मज्जा को इसी रूप में देखें तो मस्तिष्क का सार रूप वाला अर्थ और भी स्पष्ट होता है। का अगला रूप होता है। मेधः, मेधा, मेधावी जैसे शब्द भी इसी क्रम में खड़े नजर आते हैं जिनका bsअर्थ बुद्धि, प्रतिभा, बुद्धिमान है और रिश्ता अंततः मस्तिष्क यानी मगज से ही जुड़ता है। इंडो-ईरानी भाषा परिवार की कुछ अन्य भाषाओं में भी इसके विभिन्न रूप देखने को मिलते हैं जैसे खोतान में यह मज्सा majsaa है पश्तो में मग्जे। ताजिकिस्तान और बदख्शां क्षेत्रों में बोली जाने वाली शुघ्नी भाषा में इसका रूप मग्स है। इस शब्द की व्याप्ति मंगोल-तुर्किक परिवार में भी हुई है। इस परिवार की चुवाश भाषा, जो रूस के मध्यक्षेत्र में बोली जाती है, इसका रूप है माइम, जबकि सुदूर साइबेरिया के याकुतिया क्षेत्र की साखा जबान में भी इसकी मौजूदगी मेयी के रूप में पहचानी गई है। किरगिजिस्तान की किरगिजी बोली में यह मे me है और तातारी में यह माई है। इसी तरह यूरोपीय भाषाओं में भी इस शब्द ने आश्चर्यजनक रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
भाषाविज्ञानियों ने इसके मूल प्राचीन भारोपीय धातुरूप की कल्पना मोज़्घो mozgho के रूप में की है जिसमें अस्थिमज्जा या मस्तिष्क का भाव है, जिसका अर्थ है दिमाग, बुद्धि, समझ, भेजा वगैरह। प्राचीन जर्मन में इसका रूप हुआ मस्ज्ग mazga और जर्मन में मर्ह् Marh , डच में यह हुआ मर्ग़। जर्मन से यह अंग्रेजी के मैरो marrow में ढल गया जिसका अर्थ है अस्थिद्रव, सार, मज्जा वगैरह। ध्यान रहे, मूल धातु में निहित रस या सार वाले भाव का दिमाग या मस्तिष्क वाले अर्थ में विस्तार कई भाषाओं मे हुआ है। अंग्रेजी के मैरो में इसका अस्थिमज्जा वाला अर्थ सुरक्षित रहा मगर कई भाषाओं में इसके भाववाची अर्थविस्तार ने मगज का रूप लिया। हिन्दी का भेजा शब्द भी मज्जस् से बना है। संस्कृत के तद्भव रूपों में ध्वनि का चरित्र में बदलता है। यहां मज्ज> मज्जस् > भज्जअ> भेजा के जरिये यह हुआ है। व्यर्थ की बकवाद करने के अर्थ में दिमाग चाटने वाले मुहावरे की तरह ही भेजा खाना या भेजा चाटना मुहावरा भी हिन्दी को लालित्य प्रदान करता है। मांसाहारी लोगों के लिए भेजा खाना मुहावरा नहीं बल्कि सचमुच भेजा एक खाद्य पदार्थ है साथ ही अस्थिमज्जा भी मासाहारियों को खूब पसंद है। निचोड़ना और चूसना जैसे शब्द अपने आप में मुहावरे की खासियत रखते हैं। हड्डी तक चूस जाना मुहावरे का अर्थ है ऐसी मुसीबत जिससे पार पाने में जीवन की सभी शक्तिया चुक जाएं। मांसाहारियों में धारणा है कि अस्थिमज्जा में जीवनी शक्ति होती है। हड्डियों के भीतर सुरक्षित द्रव होने से यह धारणा बनी हो या इसका जीववैज्ञानिक आधार भी है, इसकी गहराई में जाने की जरूरत नहीं है, मगर मांसाहारी हड्डी निचोड़ने चूसने से नहीं चूकता है क्योंकि इसके भीतर एक खास स्वाद छुपा है। [संबंधित कुछ अन्य शब्दों की चर्चा अगली किसी कड़ी में]

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12 कमेंट्स:

Udan Tashtari said...

लेकिन यह ज्ञान मगज में बैठ गया.

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यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि आप हिंदी में सार्थक लेखन कर रहे हैं।

हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार में आपका योगदान सराहनीय है.

मेरी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं.

नववर्ष में संकल्प लें कि आप नए लोगों को जोड़ेंगे एवं पुरानों को प्रोत्साहित करेंगे - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

निवेदन है कि नए लोगों को जोड़ें एवं पुरानों को प्रोत्साहित करें - यही हिंदी की सच्ची सेवा है।

वर्ष २०१० मे हर माह एक नया हिंदी चिट्ठा किसी नए व्यक्ति से भी शुरू करवाएँ और हिंदी चिट्ठों की संख्या बढ़ाने और विविधता प्रदान करने में योगदान करें।

आपका साधुवाद!!

नववर्ष की अनेक शुभकामनाएँ!

समीर लाल
उड़न तश्तरी

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

यह बात चौकाती है मुझे अधिक्तर शब्द जो समान अर्थ के हो किसी भी भाषा के उन्का पहला अक्षर समान ही होता है .
बलजीत जी आ रहे होगे कुछ सन्शोधनो के साथ

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

यह भेजा भी अजीब चीज है। देखिए ना इतनी पोस्टें सफर की पढ़ने के बाद भी सुरक्षित है बल्कि और धारदार हो गया है।

मनोज कुमार said...

अच्छी जानकारी देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद
आपको नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

हिमांशु । Himanshu said...

बेहतरीन पोस्ट | भेजा-फ्राई तो बहुत ही चर्चित शब्द है |

शोभना चौरे said...

बहुत रोचक लगा भेजा फ्राय
आभार

Baljit Basi said...

1.English words, merge, emerge, submerge, immerse are also related to Sanskrit 'majjan' to dip, to bathe.
2.Punjabi word for marrow (majja) is 'mijh'
'mijh kadhana' means to beat black and blue

3.Guru Nanak uses both 'medni' and 'sar' in this line:

'जिनि उपाई मेदनी सोई करदा सार'(The One who created the world, takes care of it)
'सार' in punjabi also means knowledge, information, enquiring or taking care of (especally health or well being.)

Amit said...

मेधा बुद्धि का एक और उदाहरण है--ये ब्लॉग !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बात समझ में आ गई!
ज्यादा मगजपच्ची नही करनी पड़ी!

नव वर्ष की शुभकामनाएँ!

निर्मला कपिला said...

बहुत सुन्दर रहा ये सफर भी । धन्यवाद आपको नववर्ष की अग्रिम बधाई शायद 3-4 दिन नेट से दूर रहूँगी धन्यवाद्

काशिफ़ आरिफ़ said...

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इस लेख को पढने के लिये बहुत मगज मारी करनी पडी लेकिन आखिरकार सब कुछ समझ आ गया...

नये साल की बहुत-बहुत मुबारकबाद

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Jumardi Ramdani said...

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