Monday, December 21, 2009

लिफाफेबाजी और उधार की रिकवरी

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लिफाफा से जुड़े कई मुहावरे प्रचलित हैं जैसे बंद लिफाफा। आमतौर पर गूढ़ और अबूझ व्यक्ति के लिए यह उपमा है… envelope
कली लोगों का चरित्र अक्सर एक कृत्रिम आवरण avaran में लिपटा रहता है जिसके जरिये वे जैसे होते है, उससे अलहदा दिखने की कोशिश करते हैं ऐसे लोगों को मुहावरेदार भाषा में लिफाफेबाज कहा जाता है। यह व्यवहार आडम्बर और दिखावा की श्रेणी में आता है। आवरण कई तरह के होते हैं। लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए स्टाइलिश कपड़े पहने जाते हैं, जो शरीर का आवरण है। मेकअप यानी सौन्दर्य प्रसाधनों का प्रयोग भी आवरण ही है। बर्तनों को चमकाने के लिए उस पर कलई की जाती है और गहनों पर मुलम्मा चढ़ाया जाता है। यानी जो कुछ प्राकृतिक है अपने मूल स्वरूप में है, उससे हटकर हम उस पर किसी न किसी असत्य की परत चढ़ाने से नहीं चूकते। इस तरह नकली रूप या किरदार सामने लाकर हमें खुशी मिलती है। दिलचस्प यह कि हर कोई यही कर रहा है और अपनी सिफत छुपाने की कोशिश में हम सब बहुरूपिया बन चुके हैं। बल्कि कहना चाहिए कि लिफाफेबाजी करते करते हम सिर्फ  लिफाफा भर रह गए हैं जिसके अंदर कुछ नहीं है।
लिफाफा हिन्दी का बड़ा आम शब्द है जो बरास्ता अरबी-फारसी होते हुए हिन्दी-उर्दू में दाखिल हुआ है। सेमेटिक भाषा परिवार की अरबी, हिब्रू और आरमेइक भाषाओं में लफ़्फ़ा laffa या lapu जैसी धातुए हैं जिनमें लपेटने, अंतर्निहित करने, आवरण चढ़ाने जैसे भाव है। अरबी लफ़्फ़ा से बना लिफ़ाफ़ाह lifafah शब्द जिसका अर्थ था आवरण, रैपर या कवर। किसी चीज़ पर दूसरी चीज़ जोड़ना या चस्पा करना। ढकने का अर्थ भी इसमें निहित है। हिन्दी उर्दू में इसका उच्चारण लिफाफा होता है। यह आमतौर पर कागज से बनी आयताकार थैली है जिसमें कागजी दस्तावेज रख कर उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाता है। इसका मूल काम किसी दस्तावेज को सुरक्षित और गोपनीय रखना है। लिफाफे का इस्तेमाल डाक भेजने के काम आनेवाली कागज की थैली या खरीते के तौर पर

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किया जाता है। अरबी में इसका मतलब कफन भी होता है। इसके अलावा दो दशक पहले तक दुकानदार अखबारी रद्दी से बनाए गए लिफाफों में सामान दिया करते थे। लिफाफा से जुड़े कई मुहावरे प्रचलित हैं जैसे बंद लिफाफा। आमतौर पर गूढ़ और अबूझ व्यक्ति के लिए यह उपमा है। लिफाफा खुल जाना यानी किसी का भेद उजागर होना या वास्तविक बात का प्रकट हो जाना। लिफाफे को देखकर मजमून भांपना यानी किसी के मन की बात जान लेना या भेद की बात उजागर हो जाना आदि।
रैपर शब्द का इस्तेमाल बोलचाल की हिन्दी में खूब होता है। इसका मतलब भी आवरण ही होता है। बाजारवाद के दौर में इसकी महत्ता बहुत ज्यादा है। रोजमर्रा की जितनी भी रेडीमेड वस्तुएं हैं, निर्माता उन्हें चमकदार आवरण में लपेट कर बाजार में उतारता है ताकि ग्राहक उसके बाहरी रूप से आकर्षित हो सके। यह अंगरेजी के रैप wrep से बना है जिसका अर्थ है लपेटना, घुमाना, मोड़ना आदि। भाषाविज्ञानी इसकी व्युत्पत्ति संदिग्ध मानते हैं। वैसे कुछ विद्वान इसकी व्युत्पत्ति प्रोटो इंडो यूरोपीय भाषा परिवार की धातु वर् wer से मानते हैं जिसमें घुमाना, दोहरा करना, लपेटना जैसे ही भाव हैं। इससे मिलती जुलती संस्कृत धातु है वृ जिसमें और साफ नजर आ रहे हैं जिसका अर्थ है घेरना, लपेटना, ढकना, छुपाना और गुप्त रखना। इससे बने वर्त या वर्तते में वही भाव हैं जो प्राचीन भारोपीय धातु वर् wer में हैं। गोल, चक्राकार के लिए हिन्दी संस्कृत का वृत्त शब्द भी इसी मूल से बना है। गोलाई दरअसल घुमाने, लपेटने की क्रिया का ही विस्तार है। वृत्त, वृत्ताकार जैसे शब्द इसी मूल से बने हैं। संस्कृत की ऋत् धातु से भी इसकी रिश्तेदारी है जिससे ऋतु शब्द बना है। गोलाई और घूमने का रिश्ता ऋतु से स्पष्ट है क्योंकि सभी ऋतुएं बारह महिनों के अंतराल पर खुद को दोहराती हैं अर्थात उनका पथ वृत्ताकार होता है। दोहराने की यह क्रिया ही आवृत्ति है जिसका अर्थ मुड़ना, लौटना, पलटना, प्रत्यावर्तन, चक्करखाना आदि है।
ब बात कवर की। अंगरेजी cover लैटिन के co+operire (समान रूप से, भली भांति+ ढकना, छुपाना) से बना है। operire के मूल में प्राचीन भारोपीय धातु वर् अर्थात wer ही है। इस तरह कवर cover का अर्थ हुआ अच्छी तरह ढका हुआ, छिपाया हुआ जिसमें सुरक्षा कवच या आवरण का भाव स्पष्ट है। हिन्दी में कवर शब्द अपने सभी भावों के साथ इस्तेमाल होता है जैसे कवर करना यानी सम्पूर्णता में समेटना वगैरह वगैरह। कवर का मतलब आमतौर पर किसी वस्तु के आवरण से ही होता है और इस अर्थ में कवर शब्द का इस्तेमाल बहुत आम है। बुक कवर, सीट कवर, फाइल कवर जैसे शब्द इसे उजागर कर रहे हैं। कवर से कई शब्द बने हैं जिनमें आवृत्ति या लौटने का भाव साफ नजर आता है जैसे रिकवर अर्थात पूर्ववत होना। किसी स्थायी परिस्थिति में बदलाव के बाद फिर अपनी पूर्वावस्था में लौटना रिकवर कहलाता है। रिकवरी भी इसी मूल से उपजा शब्द है। अर्थ इसका भी वही है जो रिकवर का है, मगर उधार वसूली जैसे मामलो में इसका इस्तेमाल बड़ा सूझ-बूझ भरा है। उधार की वसूली में ऋणदाता की जेब से कर्जदाता के हाथों से होते हुए मुद्रा फिर ऋणदाता के पास पहुंचती है और एक चक्र पूरा होता है। यानी सब कुछ पूर्ववत हो जाता है। ver में निहित घूमने, लौटने पलटने की बात यहां साफ हो रही है। किसी वस्तु को चारों और जब आवरण में लपेटते हैं तब भी उसके दोनों सिरे चक्कर लगाते हुए एक साथ मिल जाते हैं। (क)वर और (आ)वरण में समानता पर भी गौर करें। अंगरेजी और हिन्दी उपसर्गों के हटने पर जो ध्वनियां बचती हैं वे स्पष्ट तौर पर एक ही मूल से निकली हुई दिखती हैं।

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17 कमेंट्स:

खुशदीप सहगल said...

लिफ़ाफ़ेबाज़ों के लिए...

क्या मिलिए ऐसे लोगों से
जिनकी सूरत छिपी रहे
नकली चेहरा सामने आए
असली फ़ितरत छिपी रहे...

जय हिंद...

हिमांशु । Himanshu said...

"...(क)वर और (आ)वरण में समानता पर भी गौर करें। अंगरेजी और हन्दी के उपसर्ग हटाने पर जो ध्वनियां बचती हैं वे स्पष्ट तौर पर एक ही मूल से निकली हुई दिखती हैं।..."
कितना रोचक रहा यह जानना ! आभार ।

मनोज कुमार said...

अच्छी जानकारी।

निर्मला कपिला said...

बहुत अच्छी जानकारी। धन्यवाद्

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

महत्वपूर्ण आलेख।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

वाह...!
लिफाफा इतना बढ़िया है तो मजमून तो और भी बढ़िया होगा!

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

लिफ़ाफ़ेबाज़ ही नही हू शाय्द इसीलिये वहा तक नही पहुच पा रहा हू जहा मुझे होना चहिये था

डॉ टी एस दराल said...

लिफाफे से रिकवरी का सफ़र अच्छा रहा.
ये हिंदी में टाइप करने वाला बॉक्स कैसे लगाया , ज़रा ये भी बताएं.
उपयोगी जानकारी रहेगी.

शीबा असलम फेहमी said...

is blog writing ke procedure mein aap jis researck se guzartey hongey usne aapko infiradi taur par kitna enrich kiya hoga iska tasswur hi mujhe overwhelm karta hai, ek pur-justuju zahen ke taur par aap bahot kamyaab hain, mujhey aapse rashq hone laga hai. magar dua bhi hai ki aap yeh daulat batortey rahen, aur hum kam-jaankaron ko iska zara bahot hissa bhi milta rahey.
(Meri khichdi aur adhkachri zabaan ko nazarandaz kar dijiyega, mafhoom pahunchana zyada bada maqsad tha),
bahot ehtram ke saath,
Sheeba

Sheeba Aslam Fehmi said...
This comment has been removed by the author.
Sheeba Aslam Fehmi said...

अजीत जी इस ब्लॉग लिखने की प्रक्रिया में आप जिस शोध से गुज़रते होंगे उसने आपको इन्फ़िरादी तौर पर कितना एनरिच किया होगा इसका तसव्वुर ही मुझे ओर्व्हेल्म करता है , एक पुर-जुस्तुजू ज़हेन के तौर पर आप बहोत कामयाब हैं , मुझे आपसे रश्क़ होने लगा है . मगर दुआ भी है की आप यह दौलत बटोरते रहें , और हम कम -जानकारों को इसका ज़रा बहोत हिस्सा भी मिलता रहे .
(मेरी खिचड़ी और अधकचरी ज़बान को नज़रंदाज़ कर दीजियेगा , मफ़हूम पहुँचाना ज़्यादा बड़ा मकसद था),
बहोत एहतराम के साथ ,
शीबा असलम फ़हमी

परमजीत बाली said...

आप की हर पोस्ट ज्ञान बढाने वाली होती है।आभार।

Baljit Basi said...

१. हम तो पुड़िया और डूने पर ही बैठे हैं, इनकी भी बात हो जाए.
२.लिफाफे की बात करते करते आप गिलाफ को क्यों भूल गए?
३.पंजाबी में एक शब्द 'बाणा' चलता है खास तौर पर सिख धर्म के प्रसंग में जिस का मतलब विशेष आवरण ही है जैसे 'नीला बाणा' 'सिखी बाणा' क्या इसका 'वर्ण' से संबंध है या 'आवरण' से ?

रंजना said...

कितना कुछ सिखा जाते हैं आप...बहुत बहुत आभार और आपके श्रम को नमन...

Suman said...

nice

ज्ञानदत्त G.D. Pandey said...

वाह! लफ्फाजी और लिफाफेबाजी एक से लगते हैं। :-)

अभिषेक ओझा said...

लिफाफा पढ़ते-पढ़ते 'ठोंगा' याद आया. अखबार का बना जिसमें किराने की दूकान वाले कभी सामान दिया करते थे... प्लास्टिक की थैलियों के आने से पहले.

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