Saturday, September 1, 2007

फुलका भी एक फूल है ....

रोटी हिन्दी में चपाती के लिए
सर्वाधिक प्रचलित शब्द है । रोटी के बारे में सफर की पिछली कड़ी में लिखा जा चुका है कि इस शब्द की व्युत्पत्ति संस्कृत शब्द रोटिका से हुई है जिसके मूल में इंडो-यूरोपीय अर्थात भारोपीय भाषा परिवार का रोटो शब्द है जिससे संस्कृत ,हिन्दी, अग्रेजी के वृत्त, रथ, रोटिका, रोटी, रोटेशन और रोटरी जैसे अनेक शब्द बने हैं जो सभी गोलाई का भाव लिए है। अब देखते हैं कि फुलका और चपाती का आधार क्या है।
फुलका पूरे देश में रोटी के सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले प्रकार का नाम है । जैसा कि नाम से जाहिर है यह कि तवे या सीधीं आंच पर सिंकने की वजह से गर्म भाप भर जाने से रोटी फूल जाती है इसी वजह से इसे फुलका भी कहते हैं। जाहिर है जबतक इसमें भाप है तब तक ही यह फुलका है, बाद में यह सामान्य चपाती या रोटी ही कहलाएगी। गर्मागर्म खाने में ही फुलके का आनंद है। फुलका शब्द का जन्म हुआ है संस्कृत की फु धातु से जिसका मतलब है फुलाना, फूंक मारना , आदि। इसी से बना है संस्कृत का ही फुल्ल शब्द जिसका मतलब हुआ खिलना, फूलना, फुलाना । गौरतलब है कि पुष्प के लिए फूल शब्द का जन्म भी इसी फु से हुआ है।
अब आते हैं चपाती पर। चपाती यानी गेहूं के आटे से बनी पतली-चपटी रोटी। संस्कृत में एक शब्द है चर्पट: जिसका अर्थ है रगड़ना, दबाना आदि। इसके अलावा थप्पड़ लगाना या पिटाई करना भी मायने हैं। चर्पट: से ही बना है चपेट (चपेट में आना या चपेट में लेना) चपेटा (लाख की गोटी जिससे चौपड़ जैसे खेल खेले जाते हैं), चपड़ा यानी लाख। इसी के साथ चपत यानी थप्पड़ और चांटा भी इससे ही बना है। चर्पटः से ही बना संस्कृत में चर्पटी जिसका मतलब हुआ चपाती। गौर करें कि आटे की लोई को हथेली पर थाप-थाप कर बनाई गई रोटी इसीलिए चपाती कहलाई क्योकिं उसे चपत लगाकर चपटा बनाया गया। संस्कृत से ही यही लफ्ज फारसी में भी गया और वहां भी चपत , चपात बनकर विराजा जिसका मतलब हुआ थप्पड़। चपत से चपाती भी फारसी में बन गया जिसका मतलब हथेलियों की थपकी से बहुत पतली और बढ़ाई गई रोटी है।

5 कमेंट्स:

संजय तिवारी said...

फुलका खाते-खाते इत्ते बड़े हो गये, शास्त्र आज पढ़ा. इन नित्यप्रति की बातों पर विरले लोगों का ही ध्यान जाता है.

अनामदास said...

थप्पड़ का ज़िक्र आपने किया तो हमें खाए हुए थप्पड़ की याद आ गई है, मां-बाप और गुरुजनों का आशीर्वाद. इसके लिए अनेक शब्द हैं, बिहार में कुछ ज्यादा हैं, क्योंकि वहाँ इसका उपयोग शायद अधिक होता है.

थप्पड़, लप्पड़, झापड़, थोपी, चटकन, तबड़ाक, चमेटा, कनटाप...

ALOK PURANIK said...

गहरी खोजके लाते हैं आप भी। कमाल है।

harshdev said...

आज इत्तफाक से सुबह - सुबह नेट लगाया तो फुलका पढ़ने को मिल गया। अच्छा काम हो रहा है। कथादेश में बजरबट्टå को लेकर विवाद भी पढ़ा था। ऐसे विवाद तो इस तरह के किसी भी काम में होते ही रहते हैं। कई बार इनसे सुधार का मौका भी मिल जाता है। मेरी शुभकामनाएं ।

विष्णु बैरागी said...

चपाती और चांटे में एक समानता और है - दोनों ही गरम होते हैं ।

तीन-चार दिन पहले आप 'चेट' पर आए थे । मेरे सिस्‍टम में कोई गडबडी थी । मैं सन्‍देश लिख कर 'एण्‍टर' मार रहा था लेकिन सन्‍देश आप तक नहीं पहुंच पा रहा था । आपको ई-मेल किया तो 'फेल्‍यूअर नोटिस' आ गया ।

मैं नौसिखिया हूं, जरा मुझे सिखाइएगा कि क्‍या करूं ।

नीचे दिया गया बक्सा प्रयोग करें हिन्दी में टाइप करने के लिए

Post a Comment


Blog Widget by LinkWithin