Wednesday, September 19, 2007

बिस्तर, बस्ते का बंदोबस्त

हिन्दी में बस्ता एक ऐसा शब्द है जिसे हर बच्चा अपने भाषाज्ञान के शुरूआती दौर में ही सीख लेता है। बस्ता शब्द दरअसल फारसी का है मगर जन्मा संस्कृत शब्द बद्ध से है। बद्ध का अर्थ होता है बांधा हुआ, जकड़ा हुआ, दबाया हुआ या कस कर रोका हुआ। संस्कृत के इसी बद्ध ने प्राचीन ईरानी में बस्तः रूप ग्रहण किया। यही बस्तः फारसी और उर्दू में भी नज़र आता है जैसे दस्तबस्तः यानि विनम्रता के साथ हाथ बांधकर , जोड़कर स्वागत करना। इसे हिन्दी उर्दू में दस्त-बस्ता भी लिखा-बोला जाता है। करबद्ध यही है और एक मायने में नमस्कार भी ।
बहरहाल, संस्कृत का बद्ध अवेस्ता में बस्तः हुआ जिसका मतलब हुआ जिसे बांधकर, जमा कर, तह कर या गठरी बांधकर रखा गया हो। इसी से बना फारसी-उर्दू में बस्ता यानी स्कूल बैग या पोथी-पोटली। पुराने जमाने में विद्याध्ययन के लिए छात्रों को दूर दूर तक जाना पड़ता था और वे घर से कई तरह का सामान साथ ले जाया करते थे। तब सफर भी पैदल या घोड़ों पर ही तय किया जाता था जाहिर है सामान को सुरक्षित रखने के लिए उसे बेहद विश्वसनीय तरीके से बांधकर या जकड़ कर रखा जाता था। यह क्रिया पहले बद्ध कहलाई फिर इससे बस्त शब्द बना और बाद में बस्ता के रूप में स्कूलबैग के अर्थ में सिमट कर रह गया। यही नहीं, बांध कर रखने क्रिया के चलते ही इसे बिस्तर का रूप लेने में ज्यादा समय नहीं लगा। फारसी में भी बिस्तर का मतलब शय्या या बिछौना ही होता है। किसी शब्द की अर्थवत्ता कितनी व्यापक है यह तब उजागर होता है जब उससे मुहावरे जन्म लेने लगें । बद्ध शब्द से जन्मे बस्ता और बिस्तर यहां कामयाब नज़र आते हैं क्योंकि इनकी मौजूदगी मुहावरों में भी नज़र आती है मसलन घर जाने की तैयारी अथवा काग़ज़ पत्र समेटने के अर्थ में बस्ता बांधना, बिस्तर लपेटना या बिस्तर बांधना खूब बोले जाते हैं। बीमारी के सन्दर्भ में बिस्तर से लगना मुहावरा आम है।
बद्ध और बस्त से न सिर्फ हिन्दी में बल्कि उर्दू-फारसी में भी कई शब्द बनें हैं।
पहले बात बस्तः या बस्त की। व्यवस्था, प्रबंध अथवा इंतेजामात के अर्थ में आमतौर पर बंदोबस्त शब्द का इस्तेमाल होता है। इसमें जो बस्त है वह बद्ध से ही आया है । मज़े की बात यह कि जो बंद है उसका मतलब भी बंधन या गांठ से ही है। दिलचस्प यह भी है कि फारसी में बंदोबस्त भी चलता है और बस्तोबंद भी, मगर हिन्दी में बंदोबस्त ही आम है। रिश्ता , तअल्लुक के अर्थ में भी बस्तगी शब्द बोला जाता है।
बद्ध भी कई शब्दों में मौजूद है जैसे मजबूत पकड़ के लिए बद्धमूल शब्द जिसका मतलब हुआ जिसकी जड़ तक गहराई तक गई हो। दृष्टिबद्ध यानि टकटकी लगाए देखने वाला। हवाई चप्पलों का इस्तेमाल करने वाले जानते हैं कि अंगूठे की गिरफ्त में रहने वाली रबर को बद्दी कहते हैं । दरअसल शुद्धरूप में यह बद्धी है जिसका मतलब है बांधने की डोर या रस्सी।

2 कमेंट्स:

Gyandutt Pandey said...

बहुत खूब पोस्ट!

Udan Tashtari said...

बख्तरबंद--इसकी उत्पत्ति भी संबंधित है क्या?

बढ़िया आलेख.

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