Thursday, September 27, 2007

दीद के बहाने दिठौने का दर्शन !

ज़माने की नज़र से बचाने के लिए अक्सर बच्चों को दिठौना लगाया जाता है। श्रृंगाररस के कवियों ने तो अच्छी खासी उम्रों वाली नायिकाओं तक को बुरी नज़र से बचाने के लिए दिठौने लगाए हैं। दिठौना एक काला टीका होता है जो चेहरे पर लगा दिया जाता है। इसी तरह मालवी, अवधी, राजस्थानी , बृज आदि हिन्दी की ज्यादातर बोलियों में दीठ या दीठि शब्द भी नज़र के अर्थ में प्रचलित हैं।

अधर धरत हरि के परत, ओंठ, दीठ, पट जोति।
हरित बाँस की बाँसुरी, इंद्र धनुष दुति होति॥


यह शब्द बना है संस्कृत शब्द दृष्टि: से जिसका मतलब है आंख की देखने की शक्ति अर्थात देखना, नजर डालना, चितवन और विचार आदि । इसी श्रंखला में आते हैं दृष्टिगोचर, दृष्टिपात, दृष्टिगत दृष्टिमान, और दृष्टिहीन आदि शब्द भी । ये तमाम शब्द बने हैं संस्कृत धातु दृश से। दीठ या दृष्टि से संबंधित कई मुहावरे भी बने है जैसे नज़र लगने के लिए दीठ लगना भी प्रचलित है। इसी तरह दीठ चुराना यानी किसी का सामना करने से बचना, दीठ गड़ाना या दीठ जमाना यानी टकटकी लगाए ताकना वगैरह ।
दृशः से ही फारसी का दीदः शब्द बना है जिसका मतलब भी आंख ही होता है। इससे ही बना दीद जो हिन्दी में दृष्टि का पर्यायवाची है। किसी श्वेत श्याम फिल्म का बड़ा प्यारा सा गीत है-

मुझे मिल गया बहाना तेरी दीद का ,
कैसी खुशी लेके आया चांद ईद का


दीदः से उपजे कई शब्द हिन्दी-उर्दू में भी आमतौर पर इस्तेमाल हो रहै हैं मसलन दीदादिलेरी अर्थात दुस्साहस या बेशर्मी, दीदार, दीदाबाजी, दीदावर (पारखी), दीदावरी यानी भले बुरे की पहचान आदि। दीदे मटकाना, दीदे नचाना, दीदे फूटना या फोड़ना जैसे मुहावरे भी प्रचलित हैं।

अगला पड़ाव है - आदर्श दृष्य का दर्शन

4 कमेंट्स:

Udan Tashtari said...

अधर धरत हरि के परत, ओंठ, दीठ, पट जोति।
हरित बाँस की बाँसुरी, इंद्र धनुष दुति होति॥
इंद्र धनुष दुति होति कि फिर काहे ठिठोना
मुन्ना काला होए तो फिर काहे का रोना
कहे समीर कविराय, बात ये मेरी मानो
दिठौने का परताप, यूँ बचा ले तो जानो.

--बहुत सही ज्ञान दिये हो भाई!!! हमें तो कभी लगाया नहीं गया दिठौना...हम तो खुद ही दिठौना टाईप थे अपने आजू बाजियों को बचाते. :)

अनिल रघुराज said...

अजित जी, आपने याद दिला दिया। बचपन में हम लोग कूद-कूद कर गाते थे - दिया, दियाली कोने कै, बारह रोज दिठौने कै...

काकेश said...

ज्ञान वर्धक!

Shastri JC Philip said...

बोलचाल की भाषा में प्रचलित कुछ और शब्दों कि व्युतपत्ति एवं आपासी संबंध आज समझ में आया -- शास्त्री जे सी फिलिप


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